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एक दर्जन से अधिक उपकेंद्रों पर लटका है ताला
Updated Wed, 30 Aug 2017 05:40 PM IST
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गाजीपुर। जिले के एक दर्जन से अधिक मातृशिशु कल्याण उपकेंद्रों पर ताला लटका हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित उपकेंद्रों के भवन काफी जर्जर हो चुके हैं। भवनों के जर्जर होने से एएनएम उपकेंद्रों पर उपस्थित रहने से परहेज कर रही हैं। इसके चलते गर्भवती महिलाओं को प्रसव और नवजात शिशुओं के टीकाकरण के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं और नवजात शिशुओं को प्रत्येक सप्ताह टीका लगाने के लिए 393 उपकेंद्रों की स्थापना की गई थी। इसमें से 144 उपकेंद्रों पर प्रसव के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई गई है। इन उपकेंद्रों को संचालन करने के लिए एएनएम के 472 पद सृजित हैं। इसमें से 46 पद रिक्त चल रहे हैं। एएनएम के अभाव में बंद पड़े कई उपकेंद्रों पर आश्रित गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को टीकाकरण के लिए लंबी दूरी तय कर सीएची-पीएचसी तक जाना पड़ता है। भांवरकोल संवाददाता के अनुसार जसदेवदेपुर, सुखडेहरा, वीरपुर पूर्वी, वीरपुर पश्चिमी, गोड़उर, महेन गांव स्थित एएनएम सेंटर एएनएम के पद रिक्त चलते से लगभग चार वर्षों से बंद पड़े हुए हैं। कासिमाबाद थाना क्षेत्र के गंगौली और खेताबपुर स्थित एएनएम सेंटर का भवन जर्जर होने से काफी दिक्कत उठानी पड़ रही है। गहमर संवाददाता के अनुसार तीन उपकेंद्र के भवन लंबे समय से जर्जर हो चुके हैं। तीनों उपकेंद्रों का संचालन एक एएनएम द्वारा किया जाता है। टीकाकरण और इलाज की जगह ग्रामीण सेंटर को उपला और भूसा केंद्र बना लिया है। सुहवल संवाददाता के अनुसार ब्लाक के करीब दो लाख की आबादी वाले क्षेत्र के लिए 46 ग्राम पंचायतों में कुल 24 परिवार कल्याण उप केंद्र स्थापित कराए गए थे लेकिन मौजूदा समय में करीब 23 से अधिक भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं। इसके चलते कुछ बंद हैं तो कुछ निजी भवन में संचालित हो रहे हैं। जखनिया संवाददाता के अनुसार क्षेत्र में 22 जच्चा-बच्चा केंद्र स्थापित हैं। इसमें से मात्र सात को ही अपना भवन मिल पाया है। शेष 15 अभी किराए के भवन में चल रहे हैं। इस संबंध में सीएमओ डॉ. गिरीश चंद्र मौर्या ने बताया कि जिन उपकेंद्रों पर ताला लगा हुआ है वहां एएनएम का पद रिक्त होने की वजह ऐसा है। एएनएम के खाली चल रहे पद पर नियुक्ति के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। साथ ही जहां पर केंद्र बंद हैं, ऐसे स्थानों पर शिविर लगाकर गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं का टीकाकरण किया जाता है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं और नवजात शिशुओं को प्रत्येक सप्ताह टीका लगाने के लिए 393 उपकेंद्रों की स्थापना की गई थी। इसमें से 144 उपकेंद्रों पर प्रसव के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई गई है। इन उपकेंद्रों को संचालन करने के लिए एएनएम के 472 पद सृजित हैं। इसमें से 46 पद रिक्त चल रहे हैं। एएनएम के अभाव में बंद पड़े कई उपकेंद्रों पर आश्रित गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को टीकाकरण के लिए लंबी दूरी तय कर सीएची-पीएचसी तक जाना पड़ता है। भांवरकोल संवाददाता के अनुसार जसदेवदेपुर, सुखडेहरा, वीरपुर पूर्वी, वीरपुर पश्चिमी, गोड़उर, महेन गांव स्थित एएनएम सेंटर एएनएम के पद रिक्त चलते से लगभग चार वर्षों से बंद पड़े हुए हैं। कासिमाबाद थाना क्षेत्र के गंगौली और खेताबपुर स्थित एएनएम सेंटर का भवन जर्जर होने से काफी दिक्कत उठानी पड़ रही है। गहमर संवाददाता के अनुसार तीन उपकेंद्र के भवन लंबे समय से जर्जर हो चुके हैं। तीनों उपकेंद्रों का संचालन एक एएनएम द्वारा किया जाता है। टीकाकरण और इलाज की जगह ग्रामीण सेंटर को उपला और भूसा केंद्र बना लिया है। सुहवल संवाददाता के अनुसार ब्लाक के करीब दो लाख की आबादी वाले क्षेत्र के लिए 46 ग्राम पंचायतों में कुल 24 परिवार कल्याण उप केंद्र स्थापित कराए गए थे लेकिन मौजूदा समय में करीब 23 से अधिक भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं। इसके चलते कुछ बंद हैं तो कुछ निजी भवन में संचालित हो रहे हैं। जखनिया संवाददाता के अनुसार क्षेत्र में 22 जच्चा-बच्चा केंद्र स्थापित हैं। इसमें से मात्र सात को ही अपना भवन मिल पाया है। शेष 15 अभी किराए के भवन में चल रहे हैं। इस संबंध में सीएमओ डॉ. गिरीश चंद्र मौर्या ने बताया कि जिन उपकेंद्रों पर ताला लगा हुआ है वहां एएनएम का पद रिक्त होने की वजह ऐसा है। एएनएम के खाली चल रहे पद पर नियुक्ति के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। साथ ही जहां पर केंद्र बंद हैं, ऐसे स्थानों पर शिविर लगाकर गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं का टीकाकरण किया जाता है।
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