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पत्नी को मुखाग्नि देने के बाद पतसि की भी रूकी सांस
Updated Thu, 27 Jul 2017 11:18 PM IST
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जमानिया (गाजीपुर)। नगर पालिका क्षेत्र के नसरतपुर उर्फ हरपुर गांव निवासी एक महिला का गुरुवार की सुबह निधन हो गया। उसके अंतिम संस्कार के दौरान मुखाग्नि देने के कुछ देर बाद पति की भी दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। दो मौत से परिवार के लोगों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। कुछ ही घंटे के अंतराल में पति-पत्नी की मौत की लोगों में चर्चा होती रही।
नसरतपुर उर्फ हरपुर गांव निवासी महेश यादव (86) की 80 वर्षीय पत्नी बगसरी देवीकी आज सुबह लगभग चार बजे निधन हो गया। इससे परिवार के लोग शोक में डूब गए। पत्नी की मौत पर पति महेश पूरी तरह से गुमशुम हो गया और शांत होकर बैठ गया। परिवार के साथ दर्जनों मुहल्लावासी बागसरी का अंतिम संस्कार करने के लिए नगर के बलुआ गंगा घाट पर पहुंचे। जहां पति पति महेश यादव ने पत्नी को मुखाग्नि दी। इसके कुछ ही देर बाद महेश को दिल का दौरा पड़ गया। परिवार के लोग आनन-फानन में उसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर ले गए, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। कुछ ही घंटों के अंतरात में दो मौत होने परिवार के लोग गम के सागर में डूब गए। कुछ ही घंटे के अंतराल में हुई पति-पत्नी की मौत पर लोग दुखी जुबान से चर्चा करते रहे। लोगों की चर्चाओं में यह बात प्रमुखता से शामिल थी कि ऊपर वाले का खेल भी निराला होता है। जिसे कोई नहीं समझ सकता। महेश और बागसरी ने शादी के दौरान सात जन्मों तक साथ रहने की खाई जाने वाली कसम को सच कर दिया। साथ-साथ जिए और साथ-साथ इस दुनिया से विदा हो गए।
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नसरतपुर उर्फ हरपुर गांव निवासी महेश यादव (86) की 80 वर्षीय पत्नी बगसरी देवीकी आज सुबह लगभग चार बजे निधन हो गया। इससे परिवार के लोग शोक में डूब गए। पत्नी की मौत पर पति महेश पूरी तरह से गुमशुम हो गया और शांत होकर बैठ गया। परिवार के साथ दर्जनों मुहल्लावासी बागसरी का अंतिम संस्कार करने के लिए नगर के बलुआ गंगा घाट पर पहुंचे। जहां पति पति महेश यादव ने पत्नी को मुखाग्नि दी। इसके कुछ ही देर बाद महेश को दिल का दौरा पड़ गया। परिवार के लोग आनन-फानन में उसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर ले गए, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। कुछ ही घंटों के अंतरात में दो मौत होने परिवार के लोग गम के सागर में डूब गए। कुछ ही घंटे के अंतराल में हुई पति-पत्नी की मौत पर लोग दुखी जुबान से चर्चा करते रहे। लोगों की चर्चाओं में यह बात प्रमुखता से शामिल थी कि ऊपर वाले का खेल भी निराला होता है। जिसे कोई नहीं समझ सकता। महेश और बागसरी ने शादी के दौरान सात जन्मों तक साथ रहने की खाई जाने वाली कसम को सच कर दिया। साथ-साथ जिए और साथ-साथ इस दुनिया से विदा हो गए।
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