{"_id":"640f710389a4c7c876090954","slug":"20-students-got-the-title-of-alim-hafiz-and-qari-ghazipur-news-c-20-1-101235-2023-03-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ghazipur News: 20 छात्रों को मिली आलिम, हाफिज व कारी की उपाधि","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ghazipur News: 20 छात्रों को मिली आलिम, हाफिज व कारी की उपाधि
विज्ञापन
दारुल उलूम अहले सुन्नत मदरसा गौसिया में ग़ौसुलवरा कांफ्रेंस व जश्ने दस्तारबंदी समारोह
संवाद न्यूज एजेंसी
बारा। ओलमा की शोहबत में नाकाबिल इंसान भी अच्छा बन जाता है। उसकी बातों पर अमल करने मात्र से इज्जत मिलने लगती है। ये बातें रविवार की रात दारुल उलूम अहले सुन्नत मदरसा गौसिया बारा में ग़ौसुलवरा कांफ्रेंस व जश्ने दस्तारबंदी समारोह में आए उलेमाओं ने कहीं। इस दौरान 20 छात्रों की दस्तारबंदी की गई, जिसमें छह आलिम, नौ हाफिज व पांच कारी की डिग्री हासिल करने वाले छात्रों को पगड़ी पहनाकर उपाधि और सनद दी गई।
मेहमाने खुसुसी मौलाना उमर नूरानी गया और सैयद मंजर हुसैन पलामू ने छात्रों को दस्तार बांधते हुए उनसे शिक्षा का प्रचार प्रसार करने का आह्वान किया। मेहमानों ने कहा कि यह जो इल्म आपने हासिल किया है, इसे ना कोई चुरा सकता है ना कोई छीन सकता है। उन्होंने मौजूद जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि लाख परेशानियों का सामना हो, लेकिन अपने बच्चों को जरूर पढ़ाएं।
उलेमाओं ने कहा कि अगर जिल्लत की जिंदगी से बचना है तो अल्लाह और रसूल के बताए रास्ते पर चलना होगा। जलसे की अध्यक्षता मदरसे के प्रबंधक तारिक खान बख्शी ने की। झारखंड से आए शम्स तबरेज, रोहतास से आए वसीम खुर्माबादी, सैयद क़ासिम गाजीपुरी, पलामू से आए जियाल्लाह हुनर, महफूज आलम, समीर रजा ने एक से बढ़कर एक नात पेश कर लोगों को इस्लामी रंग से सराबोर कर दिया।
विज्ञापन
संचालन इबनुल होदा साबित रोहतासवी ने किया। मदरसे के प्रिंसिपल मौलाना कलीमुद्दीन शम्सी ने बताया कि जलसे में फारिग हुए 20 छात्रों के सर पर पगड़ी बांधकर सम्मानित किया गया। जलसे की शुरुआत हाफिज कारी अखलाक गढ़वा के तिलावते कुरआन से हुआ। इस मौके पर मौलाना नजिरुल हसन, मौलाना नूर मोहम्मद नूरी, ग्राम प्रधान बारा आजाद खान, पूर्व प्रधान शकील खान, अफजाल आलम, अबसार आलम, हाफिज शाबान, हैदर अली, हाजी रियाज, हाजी असलम आदि उपस्थित रहे।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
बारा। ओलमा की शोहबत में नाकाबिल इंसान भी अच्छा बन जाता है। उसकी बातों पर अमल करने मात्र से इज्जत मिलने लगती है। ये बातें रविवार की रात दारुल उलूम अहले सुन्नत मदरसा गौसिया बारा में ग़ौसुलवरा कांफ्रेंस व जश्ने दस्तारबंदी समारोह में आए उलेमाओं ने कहीं। इस दौरान 20 छात्रों की दस्तारबंदी की गई, जिसमें छह आलिम, नौ हाफिज व पांच कारी की डिग्री हासिल करने वाले छात्रों को पगड़ी पहनाकर उपाधि और सनद दी गई।
मेहमाने खुसुसी मौलाना उमर नूरानी गया और सैयद मंजर हुसैन पलामू ने छात्रों को दस्तार बांधते हुए उनसे शिक्षा का प्रचार प्रसार करने का आह्वान किया। मेहमानों ने कहा कि यह जो इल्म आपने हासिल किया है, इसे ना कोई चुरा सकता है ना कोई छीन सकता है। उन्होंने मौजूद जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि लाख परेशानियों का सामना हो, लेकिन अपने बच्चों को जरूर पढ़ाएं।
विज्ञापन
उलेमाओं ने कहा कि अगर जिल्लत की जिंदगी से बचना है तो अल्लाह और रसूल के बताए रास्ते पर चलना होगा। जलसे की अध्यक्षता मदरसे के प्रबंधक तारिक खान बख्शी ने की। झारखंड से आए शम्स तबरेज, रोहतास से आए वसीम खुर्माबादी, सैयद क़ासिम गाजीपुरी, पलामू से आए जियाल्लाह हुनर, महफूज आलम, समीर रजा ने एक से बढ़कर एक नात पेश कर लोगों को इस्लामी रंग से सराबोर कर दिया।
विज्ञापन
संचालन इबनुल होदा साबित रोहतासवी ने किया। मदरसे के प्रिंसिपल मौलाना कलीमुद्दीन शम्सी ने बताया कि जलसे में फारिग हुए 20 छात्रों के सर पर पगड़ी बांधकर सम्मानित किया गया। जलसे की शुरुआत हाफिज कारी अखलाक गढ़वा के तिलावते कुरआन से हुआ। इस मौके पर मौलाना नजिरुल हसन, मौलाना नूर मोहम्मद नूरी, ग्राम प्रधान बारा आजाद खान, पूर्व प्रधान शकील खान, अफजाल आलम, अबसार आलम, हाफिज शाबान, हैदर अली, हाजी रियाज, हाजी असलम आदि उपस्थित रहे।