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उतम साहित्य वही जो समाज को जोड़ने का कार्य करे
Updated Sun, 21 Oct 2018 11:28 PM IST
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भदौरा(गाजीपुर)। दुर्गा पूजा समिति पचौरी के सौजन्य से गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय परिसर में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि पूर्व पर्यटन मंत्री ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि उत्तम साहित्य वही है जो समाज को जोड़ने का कार्य करे। हर दौर में कविता ने समाज एवं राजनीति को दिशा देने का कार्य किया है।
कवि सम्मेलन की शुरुआत वाराणसी से आए आर्यन एरावत की कविता से हुई। आर्यन ऐरावत की कविता जो जालिम है उसे हरगिज मोहब्बत मिल नहीं सकती, किसी भी पेड़ के साए में राहत मिल नहीं सकती... को लोगों ने काफी सराहा। इसके बाद बिहार से आए हास्य कवि हृदय नारायण ने अपनी रचना घरवो कुफुत, बनवो कुफुत, कुफुते के बा रोटी, कवन कलम से किस्मत हमरो लिखल ए तिरलोकी...सुनाकर लोगों की वाहवाही लूटी। ओज एवं श्रृंगार के प्रसिद्ध कवि सूरजमणि त्रिपाठी की रचना बात उल्फत की कर नहीं सकते, उस खुदा से भी डर नहीं सकते, मैं कभी भी बिगड़ नहीं सकता, तुम कभी भी सुधर नहीं सकते... सुनाकर लोगों की सराहना बटोरी। मऊ से पधारे वीर रस के युवा रचनाकार पंकज प्रखर ने कुछ जयचंद और जाफरों से भारत शर्मिंदा है, भूल न जाना इस धरती पर वीर हमीद भी जिंदा है... सुनाकर लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। फजीहत गहमरी ने अपनी कविता जो देशद्रोही हो उसे सूली चढ़ाइए, पत्थर चलाने वालों पर गोली चलाइये... के अलावा वयोवृद्ध कवि विनय राय, हेमंत उपाध्याय ने भी अपनी रचना सुनाकर वाहवाही लूटी। कार्यक्रम का संचालन मिथिलेश गहमरी ने किया। इस अवसर पर पूर्व मंत्री के प्रतिनिधि मन्नू सिंह, समिति के अध्यक्ष रवि उपाध्याय, विनय गुप्ता, सोनू उपाध्याय, राकेश बाबा, कविंद्र प्रताप सिंह, सोनू सिंह, धनजी, सिंटू, जयहिंद, चंद्रप्रकाश आदि उपस्थित थे।
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कवि सम्मेलन की शुरुआत वाराणसी से आए आर्यन एरावत की कविता से हुई। आर्यन ऐरावत की कविता जो जालिम है उसे हरगिज मोहब्बत मिल नहीं सकती, किसी भी पेड़ के साए में राहत मिल नहीं सकती... को लोगों ने काफी सराहा। इसके बाद बिहार से आए हास्य कवि हृदय नारायण ने अपनी रचना घरवो कुफुत, बनवो कुफुत, कुफुते के बा रोटी, कवन कलम से किस्मत हमरो लिखल ए तिरलोकी...सुनाकर लोगों की वाहवाही लूटी। ओज एवं श्रृंगार के प्रसिद्ध कवि सूरजमणि त्रिपाठी की रचना बात उल्फत की कर नहीं सकते, उस खुदा से भी डर नहीं सकते, मैं कभी भी बिगड़ नहीं सकता, तुम कभी भी सुधर नहीं सकते... सुनाकर लोगों की सराहना बटोरी। मऊ से पधारे वीर रस के युवा रचनाकार पंकज प्रखर ने कुछ जयचंद और जाफरों से भारत शर्मिंदा है, भूल न जाना इस धरती पर वीर हमीद भी जिंदा है... सुनाकर लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। फजीहत गहमरी ने अपनी कविता जो देशद्रोही हो उसे सूली चढ़ाइए, पत्थर चलाने वालों पर गोली चलाइये... के अलावा वयोवृद्ध कवि विनय राय, हेमंत उपाध्याय ने भी अपनी रचना सुनाकर वाहवाही लूटी। कार्यक्रम का संचालन मिथिलेश गहमरी ने किया। इस अवसर पर पूर्व मंत्री के प्रतिनिधि मन्नू सिंह, समिति के अध्यक्ष रवि उपाध्याय, विनय गुप्ता, सोनू उपाध्याय, राकेश बाबा, कविंद्र प्रताप सिंह, सोनू सिंह, धनजी, सिंटू, जयहिंद, चंद्रप्रकाश आदि उपस्थित थे।
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