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मानसून दे रहा धोखा, पिछड़ रही धान की खेती
Updated Sat, 16 Jun 2018 10:52 PM IST
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गाजीपुर। मानसून पिछले एक हफ्ते से ललचा रहा है। मौसम की बेरुखी के चलते अब धान की खेती पिछड़ने के कगार पर है। बारिश की कमी से खेतों में खरीफ की फसल पर गहरा असर पड़ सकता है। धान की रोपनी का महत्वपूर्ण समय चल रहा है, लेकिन किसान असहाय बने आसमान की तरफ देख रहे हैं। कृषि के जानकारों की माने तो अगर सही समय पर नर्सरियों की रोपनी नहीं हुई तो, खेती के पिछड़ने के साथ ही उत्पादन में भी कमी आएगी।
जिले में बरसात न होने से किसान चिंतित हैं। यही हाल रहा तो पानी की कमी से धान की नर्सरी मुरझा सकती है। खरीफ की खेती के लिए लोग बेसब्री से बारिश का इंतजार कर रहे हैं। नहरों तथा ताल-पोखरों के सूख जाने से पानी की किल्लत हो गई है। खेतों तक पानी पहुंचा पाना बहुत ही कठिन काम हो गया है। धान की नर्सरियां सूख रही हैं। जो बची भी है वहां पलेवा के अभाव में रोपनी नहीं हो पा रही है। जून का महीना धान की फसल की रोपनी के लिए प्रमुख माना जाता है। यह माह भी आधा बीत गया है। अवर्षण की वजह से पशुओं का चारा, बरसाती सब्जियां सहित अन्य फसल खेतों में सूख रही है। कई इलाकों में अभी धान का बेहन डालने का काम भी चल रहा है। पानी की कमी से इस काम में भी बाधा आ रही है। किसानों को काफी मेहनत करनी पड़ रही है। खेतों में पहले से बोए जा चुके नर्सरी को जिंदा रखने में पानी की आवश्यकता पड़ रही है। कृषि विभाग से जुड़े विकास सिंह यादव ने कहा कि धान की रोपनी अभी तक हो जानी चाहिए लेकिन अभी एक सप्ताह तक इंतजार किया जा सकता है। किसानों को धीरज से काम लेना चाहिए। रोपनी करने में थोड़ी समझदारी दिखाने की आवश्यकता है क्योंकि बारिश नहीं होगी तो खेतों को पानी देने में काफी खर्च बढ़ जाएगा।
जिले में बरसात न होने से किसान चिंतित हैं। यही हाल रहा तो पानी की कमी से धान की नर्सरी मुरझा सकती है। खरीफ की खेती के लिए लोग बेसब्री से बारिश का इंतजार कर रहे हैं। नहरों तथा ताल-पोखरों के सूख जाने से पानी की किल्लत हो गई है। खेतों तक पानी पहुंचा पाना बहुत ही कठिन काम हो गया है। धान की नर्सरियां सूख रही हैं। जो बची भी है वहां पलेवा के अभाव में रोपनी नहीं हो पा रही है। जून का महीना धान की फसल की रोपनी के लिए प्रमुख माना जाता है। यह माह भी आधा बीत गया है। अवर्षण की वजह से पशुओं का चारा, बरसाती सब्जियां सहित अन्य फसल खेतों में सूख रही है। कई इलाकों में अभी धान का बेहन डालने का काम भी चल रहा है। पानी की कमी से इस काम में भी बाधा आ रही है। किसानों को काफी मेहनत करनी पड़ रही है। खेतों में पहले से बोए जा चुके नर्सरी को जिंदा रखने में पानी की आवश्यकता पड़ रही है। कृषि विभाग से जुड़े विकास सिंह यादव ने कहा कि धान की रोपनी अभी तक हो जानी चाहिए लेकिन अभी एक सप्ताह तक इंतजार किया जा सकता है। किसानों को धीरज से काम लेना चाहिए। रोपनी करने में थोड़ी समझदारी दिखाने की आवश्यकता है क्योंकि बारिश नहीं होगी तो खेतों को पानी देने में काफी खर्च बढ़ जाएगा।
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