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जिले की तीन तहसील मुख्यालयों पर सुविधाओं का टोटा
Updated Sat, 10 Mar 2018 11:04 PM IST
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गाजीपुर।
जनता की समस्याओं के समाधान के लिए शासन स्तर से प्रदेश में कई नई तहसीलों का गठन किया गया। इसमें जनपद की कासिमाबाद और सेवराई तहसीलें भी शामिल थीं। तहसील का गठन हुए काफी समय गुजर चुका है लेकिन आज भी तहसील मुख्यालयों पर सुविधाओं का टोटा बरकरार है। उधर डेढ़ दशक पूर्व बनी जखनियां तहसील को भी उसका उचित हक न मिलने से लोग कसक रहे हैं। यह तहसील आज भी ग्राम पंचायत के अधीन है। जखनियां तहसील विकास से कोसों दूर है। जखनियां तहसील मुख्यालय होने के बाद भी इसके विकास और देखरेख का जिम्मा ग्राम पंचायत से होता है। जबकि जिले के अन्य सभी तहसील मुख्यालय को नगर पालिका/नगर पंचायत का दर्जा प्राप्त है। यही वजह है कि जखनियां तहसील मुख्यालय मूलभूत समस्याओं के मकड़जाल में फंसकर सिसकता नजर आ रहा है।
जखनियां को मिले टाउन एरिया का दर्जा
जखनियां। तहसील मुख्यालय बनने के बाद लोगों में क्षेत्र के विकास को लेकर काफी उम्मीदें जगी थी। उसी समय यहां तहसील कार्यालय, रजिस्ट्री ऑफिस सहित तमाम कार्यालय खुले, जिससे कस्बे के साथ ही समीपवर्ती गांव बाजारों को विकास की चमक नजर आती दिखी लेकिन लगभग 18 वर्ष बीत जाने के बाद भी जखनियां को टाउन एरिया का दर्जा नहीं मिला। इस कारण पूरे कस्बे की सड़कें, जल निकासी की व्यवस्था, साफ-सफाई, स्ट्रीट लाइट, पेयजल के लिए पानी की टंकी, बारात घर इत्यादि के अभाव में जखनियां की हालत गांव से भी बदतर हो गई है। इतने बड़े कस्बे की व्यवस्था मात्र ग्राम पंचायत संस्था से होना नामुमकिन नजर आता है। भौगोलिक रूप से जखनियां तहसील मुख्यालय का कस्बा कुल तीन ग्राम सभाओं में बसा है। एक तरफ जहां रेलवे स्टेशन और मुख्य बाजार जखनियां गोविंद ग्राम पंचायत के क्षेत्र में है। वहीं, कोतवाली थाने के गौरा खास ग्राम पंचायत क्षेत्र में आता है, जबकि तहसील मुख्यालय, रजिस्ट्री ऑफिस, खंड शिक्षाधिकारी कार्यालय इत्यादि ग्रामसभा अलीपुर मदरा में स्थापित है। यहां की आबादी 50000 के पार है। बावजूद जखनियां का टाउन एरिया न बन पाना लोगों की समझ से परे है।
तहसील मुख्यालय पर नहीं है निबंधन कार्यालय
कासिमाबाद। पंद्रह अगस्त 2016 को तहसील कासिमाबाद का संचालन प्रारंभ हुआ। इस नई तहसील में आज भी कर्मचारियों की कमी खलती है। भवन के अभाव में पुराने जर्जर हो चुके अस्पताल और ब्लाक कालोनी के कमरों में किसी तरह से काम चलाया जा रहा है। अधिवक्ताओं को बैठने के लिए बार भवन की आवश्यकता है, लेकिन अभी तक इस दिशा में पहल नहीं की गई है। तहसील मुख्यालय पर निबंधक कार्यालय न होने से जमीन का बयनामा आदि का कार्य आज भी नहीं होता। इसके लिए लोगों को मुहम्मदाबाद तहसील मुख्यालय अथवा गाजीपुर सदर तहसील जाना पड़ता है।
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... और नहीं हुई तहसीलदार की नियुक्ति
सेवराई। कैबिनेट में मंजूरी मिलने के बाद सैकड़ों लोगों के विरोध के बावजूद तहसील का शुभारंभ 18 दिसंबर 2016 को किया गया। करीब एक साल तक उपेक्षा का दंश झेलने के बाद पुन: 18 दिसंबर 2017 को तहसील में उपजिलाधिकारी एसपी श्रीवास्तव की नियुक्ति की गई। इसके बाद, तहसील में कामकाज शुरू हुआ। अभी भी तहसील में रजिस्ट्रार ऑफिस, लाइट और कुर्सी मेज की कमी बरकरार है। तहसील में तहसीलदार की नियुक्ति न होने की वजह से भी कई सारे काम अधर में लटके हुए हैं। साथ ही तहसील मुख्यालय में कई विभागों में कंप्यूटर, आधुनिक नेटवर्क सुविधा सहित विभिन्न संसाधनों की कमी है। इसके चलते फरियादियों को काफी मशक्कत झेलनी पड़ती है। विभागीय दस्तावेज पूर्ण रूप से यहां स्थानांतरित नहीं किए जाने की वजह से भी फरियादियों को जमानियां और सेवराई दोनों तहसीलों का चक्कर लगाना पड़ रहा है।
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जनता की समस्याओं के समाधान के लिए शासन स्तर से प्रदेश में कई नई तहसीलों का गठन किया गया। इसमें जनपद की कासिमाबाद और सेवराई तहसीलें भी शामिल थीं। तहसील का गठन हुए काफी समय गुजर चुका है लेकिन आज भी तहसील मुख्यालयों पर सुविधाओं का टोटा बरकरार है। उधर डेढ़ दशक पूर्व बनी जखनियां तहसील को भी उसका उचित हक न मिलने से लोग कसक रहे हैं। यह तहसील आज भी ग्राम पंचायत के अधीन है। जखनियां तहसील विकास से कोसों दूर है। जखनियां तहसील मुख्यालय होने के बाद भी इसके विकास और देखरेख का जिम्मा ग्राम पंचायत से होता है। जबकि जिले के अन्य सभी तहसील मुख्यालय को नगर पालिका/नगर पंचायत का दर्जा प्राप्त है। यही वजह है कि जखनियां तहसील मुख्यालय मूलभूत समस्याओं के मकड़जाल में फंसकर सिसकता नजर आ रहा है।
जखनियां को मिले टाउन एरिया का दर्जा
जखनियां। तहसील मुख्यालय बनने के बाद लोगों में क्षेत्र के विकास को लेकर काफी उम्मीदें जगी थी। उसी समय यहां तहसील कार्यालय, रजिस्ट्री ऑफिस सहित तमाम कार्यालय खुले, जिससे कस्बे के साथ ही समीपवर्ती गांव बाजारों को विकास की चमक नजर आती दिखी लेकिन लगभग 18 वर्ष बीत जाने के बाद भी जखनियां को टाउन एरिया का दर्जा नहीं मिला। इस कारण पूरे कस्बे की सड़कें, जल निकासी की व्यवस्था, साफ-सफाई, स्ट्रीट लाइट, पेयजल के लिए पानी की टंकी, बारात घर इत्यादि के अभाव में जखनियां की हालत गांव से भी बदतर हो गई है। इतने बड़े कस्बे की व्यवस्था मात्र ग्राम पंचायत संस्था से होना नामुमकिन नजर आता है। भौगोलिक रूप से जखनियां तहसील मुख्यालय का कस्बा कुल तीन ग्राम सभाओं में बसा है। एक तरफ जहां रेलवे स्टेशन और मुख्य बाजार जखनियां गोविंद ग्राम पंचायत के क्षेत्र में है। वहीं, कोतवाली थाने के गौरा खास ग्राम पंचायत क्षेत्र में आता है, जबकि तहसील मुख्यालय, रजिस्ट्री ऑफिस, खंड शिक्षाधिकारी कार्यालय इत्यादि ग्रामसभा अलीपुर मदरा में स्थापित है। यहां की आबादी 50000 के पार है। बावजूद जखनियां का टाउन एरिया न बन पाना लोगों की समझ से परे है।
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तहसील मुख्यालय पर नहीं है निबंधन कार्यालय
कासिमाबाद। पंद्रह अगस्त 2016 को तहसील कासिमाबाद का संचालन प्रारंभ हुआ। इस नई तहसील में आज भी कर्मचारियों की कमी खलती है। भवन के अभाव में पुराने जर्जर हो चुके अस्पताल और ब्लाक कालोनी के कमरों में किसी तरह से काम चलाया जा रहा है। अधिवक्ताओं को बैठने के लिए बार भवन की आवश्यकता है, लेकिन अभी तक इस दिशा में पहल नहीं की गई है। तहसील मुख्यालय पर निबंधक कार्यालय न होने से जमीन का बयनामा आदि का कार्य आज भी नहीं होता। इसके लिए लोगों को मुहम्मदाबाद तहसील मुख्यालय अथवा गाजीपुर सदर तहसील जाना पड़ता है।
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... और नहीं हुई तहसीलदार की नियुक्ति
सेवराई। कैबिनेट में मंजूरी मिलने के बाद सैकड़ों लोगों के विरोध के बावजूद तहसील का शुभारंभ 18 दिसंबर 2016 को किया गया। करीब एक साल तक उपेक्षा का दंश झेलने के बाद पुन: 18 दिसंबर 2017 को तहसील में उपजिलाधिकारी एसपी श्रीवास्तव की नियुक्ति की गई। इसके बाद, तहसील में कामकाज शुरू हुआ। अभी भी तहसील में रजिस्ट्रार ऑफिस, लाइट और कुर्सी मेज की कमी बरकरार है। तहसील में तहसीलदार की नियुक्ति न होने की वजह से भी कई सारे काम अधर में लटके हुए हैं। साथ ही तहसील मुख्यालय में कई विभागों में कंप्यूटर, आधुनिक नेटवर्क सुविधा सहित विभिन्न संसाधनों की कमी है। इसके चलते फरियादियों को काफी मशक्कत झेलनी पड़ती है। विभागीय दस्तावेज पूर्ण रूप से यहां स्थानांतरित नहीं किए जाने की वजह से भी फरियादियों को जमानियां और सेवराई दोनों तहसीलों का चक्कर लगाना पड़ रहा है।