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समय से मानदेय न मिलने पर जताई चिंता
Updated Sat, 25 Nov 2017 11:22 PM IST
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गाजीपुर। जिले के मदरसा आधुनिक अध्यापकों, प्रधानाचार्यों एवं प्रबंधकों की बैठक शुक्रवार की शाम शहर के सकलेनाबाद स्थित मदरसा मोहसिनुल उलूम में हुई। इसमें आधुनिक अध्यापकों का समय पर मानदेय न मिलने पर चिंता जताई गई।
वक्ताओं ने कहा कि सन 1995 में यह योजना भाजपा के शासनकाल में शुरू हुई और 23 वर्ष होने जा रहा है, लेकिन अभी तक इन शिक्षकों स्थाई नहीं किया गया। वर्षों से इनके मानदेय का भुगतान न होने से शिक्षक परेशानियों भरा जीवन जीने को विवश है। वह भुखमरी की कगार पर आ गए हैं। कहा कि आधुनिक अध्यापक भी सहनशील एवं धैर्यवान है। उनके भी बाल-बच्चे एवं परिवार है। वे समाज में सम्मान एवं स्वाभिमान से रहना चाहते है, लेकिन वर्षों से उन्हें उपेक्षित किया जा रहा है।
शासन-प्रशासन आधुनिक शिक्षकों के प्रति सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए उन्हें समय से मानदेय दिलाने का कार्य नहीं कर रहा है। कहा कि पोर्टल बनाने एवं मदरसे की जांच पर जितना समय सरकार लगा रही है, क्या छात्रों के विषय में उतनी चिंता है। मुंशी से लेकर फाजिल तक का रिजल्ट लगभग दो माह निकले हो गया, लेकिन अब तक मार्कशीट बनकर जनपदों में नहीं आई, जिससे छात्रों का भविष्य अंधकारमय है। इस संदर्भ में मुख्यमंत्री, निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण लखनऊ और रजिस्ट्रार मदरसा को पत्र लिखकर अवगत कराते हुए समस्या से तत्काल समाधान की मांग की गई है। कहा कि माध्यमिक शिक्षा परिषद की फरवरी माह से परीक्षा प्रारंभ होने जा रही है और अब तक मुंशी-मौलवी, कामिल, फाजिल की परीक्षा फार्म का कुछ पता नहीं है। बैठक में परवेज आलम, फिरोज अहमद, जमीला बेगम, श्यामलाल यादव, अब्दुल माजिक, मुहम्मद आरिफ, शमसुद्दीन अंसारी, प्रवीण कुमार, राम प्रसाद सिंह, रामदरश कुशवाहा आदि उपस्थित थे। सदारत मदरसा के नाजिम डा. बरदुद्दीन शास्त्री रहमती ने किया।
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वक्ताओं ने कहा कि सन 1995 में यह योजना भाजपा के शासनकाल में शुरू हुई और 23 वर्ष होने जा रहा है, लेकिन अभी तक इन शिक्षकों स्थाई नहीं किया गया। वर्षों से इनके मानदेय का भुगतान न होने से शिक्षक परेशानियों भरा जीवन जीने को विवश है। वह भुखमरी की कगार पर आ गए हैं। कहा कि आधुनिक अध्यापक भी सहनशील एवं धैर्यवान है। उनके भी बाल-बच्चे एवं परिवार है। वे समाज में सम्मान एवं स्वाभिमान से रहना चाहते है, लेकिन वर्षों से उन्हें उपेक्षित किया जा रहा है।
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शासन-प्रशासन आधुनिक शिक्षकों के प्रति सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए उन्हें समय से मानदेय दिलाने का कार्य नहीं कर रहा है। कहा कि पोर्टल बनाने एवं मदरसे की जांच पर जितना समय सरकार लगा रही है, क्या छात्रों के विषय में उतनी चिंता है। मुंशी से लेकर फाजिल तक का रिजल्ट लगभग दो माह निकले हो गया, लेकिन अब तक मार्कशीट बनकर जनपदों में नहीं आई, जिससे छात्रों का भविष्य अंधकारमय है। इस संदर्भ में मुख्यमंत्री, निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण लखनऊ और रजिस्ट्रार मदरसा को पत्र लिखकर अवगत कराते हुए समस्या से तत्काल समाधान की मांग की गई है। कहा कि माध्यमिक शिक्षा परिषद की फरवरी माह से परीक्षा प्रारंभ होने जा रही है और अब तक मुंशी-मौलवी, कामिल, फाजिल की परीक्षा फार्म का कुछ पता नहीं है। बैठक में परवेज आलम, फिरोज अहमद, जमीला बेगम, श्यामलाल यादव, अब्दुल माजिक, मुहम्मद आरिफ, शमसुद्दीन अंसारी, प्रवीण कुमार, राम प्रसाद सिंह, रामदरश कुशवाहा आदि उपस्थित थे। सदारत मदरसा के नाजिम डा. बरदुद्दीन शास्त्री रहमती ने किया।
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