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क्षेपं की बैठक में नए प्रस्ताव पर विचार

Mon, 29 Oct 2018 11:20 PM IST
Updated Mon, 29 Oct 2018 11:20 PM IST
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क्षेपं की बैठक में नए प्रस्ताव पर विचार
क्षेपं की बैठक में नए प्रस्ताव पर विचार
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2018-19 की कार्ययोजना एवं लेबर बजट बनाने पर चर्चा की गई
अमर उजाला ब्यूरो
कासिमाबाद। क्षेत्र पंचायत कासिमाबाद की बैठक सोमवार को आयोजित की गई। जिसमें पुरानी कार्रवाई की पुष्टि करते हुए नए प्रस्ताव पर विचार किया गया। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजनांतर्गत वर्ष 2018-19 की कार्ययोजना एवं लेबर बजट बनाने पर विचार के साथ प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना, कृषि कार्यक्रम, पशुपालन, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन आदि योजना पर विचार किया गया।
सभी सदस्यों की तरफ से ग्राम प्रधान धरवार कला सुरेंद्र यादव ने उपचुनाव में निर्वाचित ब्लाक प्रमुख अनिल कुमार को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए सभी सदस्यों से सहयोग की मांग की। क्षेत्र पंचायत सदस्य सुरेंद्र राम ने खंड विकास अधिकारी की कार्यप्रणाली पर आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि विकासखंड में मनरेगा जैसे कार्यों में लंबा कमीशन लिए बिना भुगतान नहीं किया जा रहा है। यही हाल सांसद निधि, विधायक निधि और क्षेत्र पंचायत निधि में भी है। बिना कमीशन लिए इस विकासखंड में कोई काम नहीं हो रहा है। सुरेंद्र राम ने कमीशन पूरी तरह से बंद करने की मांग की। अध्यक्षता करते हुए ब्लॉक प्रमुख अनिल कुमार ने आश्वस्त किया कि किसी भी विकास कार्य में कोई अधिकारी कमीशन नहीं लेगा। इस विकासखंड को आदर्श विकासखंड बनाना हमारी पहली प्राथमिकता होगी। इस अवसर पर खंड विकास अधिकारी धनंजय सिंह, खंड शिक्षाधिकारी अशोक कुमार, बाल विकास परियोजना अधिकारी चिंता यादव, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी राजेश कुमार, सहायक विकास अधिकारी सहकारिता भूपेंद्र सिंह, प्रधान संघ के अध्यक्ष रविंद्र यादव, महफूज अंसारी, सुभाष राम आदि उपस्थित थे। बैठक का संचालन सहायक विकास अधिकारी सहकारिता भूपेंद्र सिंह ने किया।
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आठ महिला सदस्य उपस्थित रहीं
कासिमाबाद। क्षेत्र पंचायत की इस महत्वपूर्ण बैठक में 120 क्षेत्र पंचायत सदस्य और 99 ग्राम प्रधानों के साथ वर्तमान सांसद, विधायक, विधान परिषद सदस्य के अलावा जिले के सभी वरिष्ठ अधिकारियों को भाग लेना था लेकिन इस बैठक में केवल ग्राम प्रधान और क्षेत्र पंचायत सदस्य ही मौजूद थे। बैठक में सबसे बड़ी चर्चा इस बात की रही की निर्वाचित क्षेत्र पंचायत सदस्यों, ग्राम प्रधानों में महिला सदस्य के रूप में केवल आठ महिलाएं सदस्य के रूप में उपस्थित थीं। लोगों में महिला सदस्य के रूप में उनके प्रतिनिधि उपस्थित थे जो जारी शासनादेश के विरुद्ध है।
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