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विज्ञान मेला में स्टाल बने रहे आकर्षण का केंद्र
Updated Sun, 31 Dec 2017 11:29 PM IST
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सैदपुर (गाजीपुर)। नगर के मोहनलाल सरस्वती विद्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में विज्ञान मेला का आयोजन रविवार को किया गया। इसका उद्घाटन मुख्य अतिथि उपजिलाधिकारी सत्यम मिश्र ने किया। मेला में प्रमुख रूप से नवीन कृषि तकनीक, सौर मंडल, संचार और सूचना के नए संसाधन, साफ-सफाई, जल शोधन यंत्र-तंत्र विषयक स्टाल लोगों के आकर्षण का केंद्र बने रहे। छात्र-छात्राओं ने एक से बढ़कर एक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया।
छात्र-छात्राओं में तुषा पाठक, नैना, शिवानी, अनुष्का यादव, सौम्या द्विवेदी, अनुभूति, अनुराधा यादव, शिवांगी आदि ने गरबा, धूमर के साथ विभिन्न प्रांतों के गीतों आदि सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शानदार प्रस्तुति कर उपस्थित लोगों की खूब तालियां बटोरीं। इस मौके पर मुख्य अतिथि उपजिलाधिकारी सत्यम मिश्र ने कहा कि शिक्षा विकास का महत्वपूर्ण आधार है। इसके केंद्र से विकास की असंख्य धाराएं निकलती हैं। यह विकास का सबसे सबल माध्यम है। शिक्षा के माध्यम से मजबूत समाज और राष्ट्र की स्थापना की जा सकती है। कहा कि शिक्षा विकास की अनिवार्य शर्त है। शिक्षा का व्यवसायीकरण हो चुका है। ऐसे माहौल में संस्कार परक शिक्षा प्रदान करते हुए शिशु मंदिर भारतीय संस्कृति को संरक्षित करने का भी कार्य कर रहे हैं। विशिष्ठ अतिथि सेवानिवृत्त प्रवक्ता बद्री शर्मा ने कहा कि शिक्षाविदों और शिक्षा संस्थानों को सोचना होगा कि रोजगारपरक शिक्षा के साथ ही मूल्यपरक और मानवीय संवेदनाओं से जुटी शिक्षा से बच्चों को जोड़ा जाए। अध्यक्षता करते हुए शिवचरणदास जायसवाल विजय बाबू ने कहा कि जागरूक समाज शिक्षा के बदले स्वरूप से भयभीत है। ऐसे में शिशु मंदिर आज भी लोगों की संभावनाओं के केंद्र बने हुए हैं। भाषा, संस्कार और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से शिशु मंदिर राष्ट्रीयता, सामाजिकता और शिक्षा का इंद्रधनुष रच रहे हैं। विद्यालय के प्रधानाचार्य संतोष पांडेय ने शिशु मंदिरों की स्थापना और उद्देश्यों तथा उसकी प्रासंगिकता और प्रगति से अवगत कराया। प्रबंधक जितेंद्र सिंह ने स्वागत और आभार व्यक्त किया। संचालन ओमप्रकाश तिवारी ने किया। इस मौके पर इश्तियाक अहमद, विजय शुक्ल, गोपाल यादव, सूर्यकांत तिवारी, रेनू बरनवाल, अन्नू द्विवेदी, गुंजन, मधुबाला, देवकीर्ति यादव, हीरा यादव, प्रीतम जायसवाल, सभासद ब्रजेश जायसवाल, मनीष पांडेय, काशीनाथ सोनकर आदि मौजूद रहे।
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छात्र-छात्राओं में तुषा पाठक, नैना, शिवानी, अनुष्का यादव, सौम्या द्विवेदी, अनुभूति, अनुराधा यादव, शिवांगी आदि ने गरबा, धूमर के साथ विभिन्न प्रांतों के गीतों आदि सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शानदार प्रस्तुति कर उपस्थित लोगों की खूब तालियां बटोरीं। इस मौके पर मुख्य अतिथि उपजिलाधिकारी सत्यम मिश्र ने कहा कि शिक्षा विकास का महत्वपूर्ण आधार है। इसके केंद्र से विकास की असंख्य धाराएं निकलती हैं। यह विकास का सबसे सबल माध्यम है। शिक्षा के माध्यम से मजबूत समाज और राष्ट्र की स्थापना की जा सकती है। कहा कि शिक्षा विकास की अनिवार्य शर्त है। शिक्षा का व्यवसायीकरण हो चुका है। ऐसे माहौल में संस्कार परक शिक्षा प्रदान करते हुए शिशु मंदिर भारतीय संस्कृति को संरक्षित करने का भी कार्य कर रहे हैं। विशिष्ठ अतिथि सेवानिवृत्त प्रवक्ता बद्री शर्मा ने कहा कि शिक्षाविदों और शिक्षा संस्थानों को सोचना होगा कि रोजगारपरक शिक्षा के साथ ही मूल्यपरक और मानवीय संवेदनाओं से जुटी शिक्षा से बच्चों को जोड़ा जाए। अध्यक्षता करते हुए शिवचरणदास जायसवाल विजय बाबू ने कहा कि जागरूक समाज शिक्षा के बदले स्वरूप से भयभीत है। ऐसे में शिशु मंदिर आज भी लोगों की संभावनाओं के केंद्र बने हुए हैं। भाषा, संस्कार और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से शिशु मंदिर राष्ट्रीयता, सामाजिकता और शिक्षा का इंद्रधनुष रच रहे हैं। विद्यालय के प्रधानाचार्य संतोष पांडेय ने शिशु मंदिरों की स्थापना और उद्देश्यों तथा उसकी प्रासंगिकता और प्रगति से अवगत कराया। प्रबंधक जितेंद्र सिंह ने स्वागत और आभार व्यक्त किया। संचालन ओमप्रकाश तिवारी ने किया। इस मौके पर इश्तियाक अहमद, विजय शुक्ल, गोपाल यादव, सूर्यकांत तिवारी, रेनू बरनवाल, अन्नू द्विवेदी, गुंजन, मधुबाला, देवकीर्ति यादव, हीरा यादव, प्रीतम जायसवाल, सभासद ब्रजेश जायसवाल, मनीष पांडेय, काशीनाथ सोनकर आदि मौजूद रहे।
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