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विशेषज्ञ विहीन हुआ जिला अस्पताल, भटक रहे मरीज
Updated Sat, 25 Nov 2017 11:22 PM IST
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गाजीपुर। इन दिनों जिला अस्पताल में सर्जन सहित कई रोगों के विशेषज्ञ चिकित्सकों का पद रिक्त है। इलाज के लिए मरीज भटक रहे हैं, लेकिन इस समस्या का समाधान करने वाला कोई नहीं है। प्रतिदिन करीब 800 लोग शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों से अपना इलाज कराने के लिए यहां आते हैं। कई रोगों के विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है। एंटीबायोटिक दवाईयां नहीं मिल रही हैं।
आर्थिक रूप से कमजोर मरीज जिले के कोने-कोने से उपचार के लिए सीधे जिला अस्पताल पहुंचते हैं। लेकिन यहां उन्हें निराशा हाथ लग रही है। सर्जरी वाले मरीज पिछले एक महीने से अस्पताल का चक्कर काटते-काटते थक गए हैं। स्वास्थ्य महकमे की स्थिति बेपटरी होने से अब लोग जिला अस्पताल की तरफ रुख तक करना उचित नहीं समझ रहे हैं। वजह जिला अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ, सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ जैसे कई पद काफी दिनों से खाली चल रहे हैं। इनके यहां से चले जाने के बाद रिक्त पद पर अब तक शासन की ओर से किसी दूसरे चिकित्सक की तैनाती नहीं की गई है। वर्तमान में दो ही फिजिशियन पूरा जिला अस्पताल चला रहे हैं। जबकि एक माह से जनरल सर्जन विहीन जिला अस्पताल में आए मरीजों को प्राथमिक उपचार कराकर अन्य जनपदों के लिए रेफर कर दिया जा रहा है।
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक डॉक्टरों के 26 पद सृजित हैं। जिसमें से 18 चिकित्सक तैनात हैं, लेकिन इसकी जमीनी हकीकत कुछ अलग है। यहां दवा की भी खास व्यवस्था नहीं है। सिर्फ जनरल बीमारियों की दवाई भंडार में उपलब्ध है। जबकि एंटीबायोटिक सहित गंभीर रोगों की दवाईयां उपलब्ध न होने से मरीजों को महंगे दामों पर निजी मेडिकल स्टोरों से दवा लेनी पड़ रही है। अगर जिले के ब्लाकों पर स्थित सीएचसी और पीएचसी पर नजर डाली जाए तो यहां भी चिकित्सकों की कमी लोगों के लिए मुसिबत बनी हुई है। शासन के लाख निर्देश के बाद भी जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पटरी पर नहीं आ रही है। सर्दी के मौसम में अस्पताल के वार्डो में भर्ती महिला और पुरुष मरीज ठठुरने को बाध्य है। अस्पताल प्रशासन की ओर से उन्हें कंबल तक मुहैया नहीं कराया जा रहा है। भर्ती मरीजों के परिजनों को घर से ही कंबल ले आना पड़ता है।
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आर्थिक रूप से कमजोर मरीज जिले के कोने-कोने से उपचार के लिए सीधे जिला अस्पताल पहुंचते हैं। लेकिन यहां उन्हें निराशा हाथ लग रही है। सर्जरी वाले मरीज पिछले एक महीने से अस्पताल का चक्कर काटते-काटते थक गए हैं। स्वास्थ्य महकमे की स्थिति बेपटरी होने से अब लोग जिला अस्पताल की तरफ रुख तक करना उचित नहीं समझ रहे हैं। वजह जिला अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ, सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ जैसे कई पद काफी दिनों से खाली चल रहे हैं। इनके यहां से चले जाने के बाद रिक्त पद पर अब तक शासन की ओर से किसी दूसरे चिकित्सक की तैनाती नहीं की गई है। वर्तमान में दो ही फिजिशियन पूरा जिला अस्पताल चला रहे हैं। जबकि एक माह से जनरल सर्जन विहीन जिला अस्पताल में आए मरीजों को प्राथमिक उपचार कराकर अन्य जनपदों के लिए रेफर कर दिया जा रहा है।
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विभागीय आंकड़ों के मुताबिक डॉक्टरों के 26 पद सृजित हैं। जिसमें से 18 चिकित्सक तैनात हैं, लेकिन इसकी जमीनी हकीकत कुछ अलग है। यहां दवा की भी खास व्यवस्था नहीं है। सिर्फ जनरल बीमारियों की दवाई भंडार में उपलब्ध है। जबकि एंटीबायोटिक सहित गंभीर रोगों की दवाईयां उपलब्ध न होने से मरीजों को महंगे दामों पर निजी मेडिकल स्टोरों से दवा लेनी पड़ रही है। अगर जिले के ब्लाकों पर स्थित सीएचसी और पीएचसी पर नजर डाली जाए तो यहां भी चिकित्सकों की कमी लोगों के लिए मुसिबत बनी हुई है। शासन के लाख निर्देश के बाद भी जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पटरी पर नहीं आ रही है। सर्दी के मौसम में अस्पताल के वार्डो में भर्ती महिला और पुरुष मरीज ठठुरने को बाध्य है। अस्पताल प्रशासन की ओर से उन्हें कंबल तक मुहैया नहीं कराया जा रहा है। भर्ती मरीजों के परिजनों को घर से ही कंबल ले आना पड़ता है।
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