{"_id":"59690b904f1c1b8c6a8b4657","slug":"181500056464-ghazipur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकों की कमी और दवाओं का टोटा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकों की कमी और दवाओं का टोटा
Updated Fri, 14 Jul 2017 11:58 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुहम्मदाबाद। मौसम में बदलाव के चलते क्षेत्र में मौसम जनित बीमारियां तेजी से पांव फैला रही हैं। कभी वर्षा तो कभी तेज धूप निकलने से लोग बीमार पड़ रहे हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मुहम्मदाबाद में चिकित्सकों की कमी एवं दवाओं का टोटा बना हुआ है। इसके चलते प्राइवेट नर्सिंग होम संचालकों एवं झोलाछाप डाक्टरों की चांदी कट रही है।
मौसम जनित बीमारियों के फैलने से सरकारी अस्पताल में मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। अस्पताल में डाक्टरों की कमी, बीमारियों से संबंधित दवाओं के अभाव तथा राजकीय महिला चिकित्सालय में किसी महिला डाक्टर की नियुक्ति न होने से अधिकांश मरीजों को झोलाछाप डाक्टरों एवं अवैध रूप से चल रहे प्राइवेट हास्पिटलों में अपना इलाज कराना पड़ रहा है। प्राइवेट अस्पतालों के डाक्टर मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए उनका शोषण करने में लगे हैं। क्षेत्र में लगातार नीम हकीम की संख्या बढ़ती जा रही है। किसी दूसरे जनपद में कार्यरत डाक्टर के नाम पर प्राइवेट हास्पिटल खोलकर कुछ लोग भोले भाले ग्रामीणों का आर्थिक दोहन करने में लगे हैं। इन अस्पतालों में अप्रशिक्षित हाथों द्वारा आपरेशन किए जाने से ग्रामीण महिलाओं की जान हमेशा खतरे में पड़ जाती है। क्षेत्र में कार्यरत आशा बहुएं कमीशन के लालच में गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए इन्हीं हास्पिटलों मे लाकर भर्ती करा देती हैं जिन्हें डाक्टर गंभीर रोग बताकर तत्काल आपरेशन कर देता है। स्वास्थ्य विभाग की छापेमारी की सूचना भी इन नीम हकीमों को पहले से पता चल जाती है। काफी हो-हल्ला होने पर प्राथमिकी दर्ज कराकर स्वास्थ्य विभाग अपना पल्ला झाड़ लेता है।
विज्ञापन
मौसम जनित बीमारियों के फैलने से सरकारी अस्पताल में मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। अस्पताल में डाक्टरों की कमी, बीमारियों से संबंधित दवाओं के अभाव तथा राजकीय महिला चिकित्सालय में किसी महिला डाक्टर की नियुक्ति न होने से अधिकांश मरीजों को झोलाछाप डाक्टरों एवं अवैध रूप से चल रहे प्राइवेट हास्पिटलों में अपना इलाज कराना पड़ रहा है। प्राइवेट अस्पतालों के डाक्टर मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए उनका शोषण करने में लगे हैं। क्षेत्र में लगातार नीम हकीम की संख्या बढ़ती जा रही है। किसी दूसरे जनपद में कार्यरत डाक्टर के नाम पर प्राइवेट हास्पिटल खोलकर कुछ लोग भोले भाले ग्रामीणों का आर्थिक दोहन करने में लगे हैं। इन अस्पतालों में अप्रशिक्षित हाथों द्वारा आपरेशन किए जाने से ग्रामीण महिलाओं की जान हमेशा खतरे में पड़ जाती है। क्षेत्र में कार्यरत आशा बहुएं कमीशन के लालच में गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए इन्हीं हास्पिटलों मे लाकर भर्ती करा देती हैं जिन्हें डाक्टर गंभीर रोग बताकर तत्काल आपरेशन कर देता है। स्वास्थ्य विभाग की छापेमारी की सूचना भी इन नीम हकीमों को पहले से पता चल जाती है। काफी हो-हल्ला होने पर प्राथमिकी दर्ज कराकर स्वास्थ्य विभाग अपना पल्ला झाड़ लेता है।
विज्ञापन