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जल संकट का कारण जनसंख्या वृद्धि

Mon, 01 Apr 2019 12:56 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 01 Apr 2019 12:56 AM IST
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जल संकट का कारण जनसंख्या वृद्धि
गाजीपुर। राजकीय महिला पीजी कॉलेज में उच्च शिक्षा विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा संपोषित जल: मानवता की अतृप्त प्यास, विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी रविवार को हुई। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि एवं राजस्थान के पूर्व वन संरक्षक अंबरीश चौबे ने जल संकट का कारण जनसंख्या वृद्धि को बताया।
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विषय प्रवर्तन करते हुए संयोजक डॉ. संतन कुमार राम ने जल की महत्ता, विशेषता एवं भावी चुनौतियों पर प्रकाश डाला। कहा कि पृथ्वी पर उपलब्ध मात्र एक प्रतिशत से भी कम जल हमारे लिए उपयोगी है। दो अरब से अधिक जनसंख्या पानी की कमी से जूझ रही है। एशिया में यह संकट ज्यादा विकराल है। यहां पर आबादी के अनुपात में जल संसाधन कम हैं। पृथ्वी के जल को दूषित करने में मानव का सबसे बड़ा योगदान है। भूगर्भ वैज्ञानिक डॉ. सत्येंद्र सिंह ने जल चक्र, जल उपलब्धता, वैश्विक स्थिति, मानसून आदि पर ज्ञानवर्धन किया। आनंद दीपायन ने प्रथम सत्र की अध्यक्षता करते हुए जल के सामाजिक एवं आर्थिक तथा मानवीय पहलुओं पर प्रकाश डाला। वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय आरा के डॉ. अखिलेंद्र तिवारी ने नगरों में पानी की चिंताजनक स्थिति तथा इसके निवारण के लिए संरक्षण, जागरूकता एवं नई तकनीकों के प्रयोग पर बल दिया। बीएचयू के प्रोफेसर सरफराज आलम ने दक्षिणी एशिया में जल नीति के माध्यम से नदियों के विस्तार, पानी के वितरण आदि की विस्तृत विवेचना की। डॉ. अकबरे-ए-आजम ने भूमिगत जल में आर्सेनिक द्वारा होने वाले प्रदूषण तथा उसके कारण मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव की चर्चा की।
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डॉ. विकास सिंह ने हड़प्पा सभ्यता में जल प्रबंधन, राघवेंद्र प्रताप सिंह ने प्राचीन ग्रंथों में जल चिंतन, सुश्री वंदना यादव ने जल जनित बीमारियों, डॉ दीप्ति सिंह ने जल एक आध्यात्मिक दृष्टि, डॉ. शंभू प्रसाद ने स्वास्थ्य के लिए जल का महत्व, अनिता कुमारी ने ऋग्वेद में जल का महत्व, उरूज फातमा ने सोनभद्र के विशेष संदर्भ में जल प्रदूषण आदि पर अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। संगोष्ठी के अंतिम सत्र की अध्यक्षता कर रहे डॉ. विवेक कुमार पांडेय ने समस्या के कारण एवं निवारण में मानव अस्तित्व का वर्णन किया। समापन सत्र की अध्यक्षता प्राचार्य प्रो. सविता भारद्वाज ने की। संगोष्ठी में कुल 30 से अधिक शोध पत्र पढ़े गए तथा 150 से अधिक विद्वानों ने पंजीकरण कराया। दर्शन शास्त्र के शोधार्थी राघवेंद्र प्रताप सिंह के प्राचीन ग्रंथों में जल चिंतन को सर्वश्रेष्ठ शोध पुरस्कार प्रदान किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. विकास सिंह, रिपोर्टर की भूमिका में मीडिया प्रभारी डॉ. शिव कुमार एवं डॉ. निरंजन कुमार यादव रहे। इस अवसर पर डॉ. एसकेएस पांडेय, डॉ. कौशल कुमार श्रीवास्तव, डॉ. शैलेंद्र कुमार यादव, मु इकलाख, डॉ. सारिका सिंह, डॉ. हरेंद्र यादव, डॉ. पूजा सिंह, डॉ. संगीता मौर्य, डॉ. शशिकला जायसवाल आदि उपस्थित रहीं।
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