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विभिन्न विषयों पर ग्रामीणों को किया जागरुक
Updated Fri, 23 Jun 2017 11:43 PM IST
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गाजीपुर। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद गाजीपुर द्वारा सामाजिक अनुभूति-2017 के तहत समाज जीवन का प्रत्यक्ष अनुभव चलो गांव की ओर कार्यक्रम विगत 15 जून से चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत पांच-पांच कार्यकर्ताओं की सात टोलियां गांव-गांव में जाकर ग्रामीण संस्कृति, सभ्यता एवं रीति-रिवाजों का प्रत्यक्ष अनुभव करते हुए ग्रामीणों को स्वच्छता, वृक्षारोपण, महिला सशक्तिकरण, दहेज, बाल विवाह, भ्रूण हत्या, जल संरक्षण आदि विषयों पर जागरूक किया।
जिला सह संयोजक अनुराग त्रिपाठी ने बताया कि विद्यार्थी परिषद की टोली ने गांव का प्रत्यक्ष अनुभव करते हुए वहां के जीनव मूल्य परिस्थितियों, कठिनाइयों एवं समस्याओं को समझा। देखा कि आज भी गांव विकास से कोसों दूर है। शहरों की अपेक्षा गांवों के लोग अभी भी सड़क, पानी, बिजली, अस्पताल, स्वच्छता, शिक्षा, मकान एवं गरीबी से जूझ रहे हैं। एक तरफ जहां शहरों में विकासशीलता दिख रही है। वहीं गांवों में विकास दूर-दूर तक दिखाई नहीं दे रहा है। आज भी हमारे देश में ऐसे बच्चे हैं, जो पढ़ने की उम्र में काम करने को मजबूर हैं। बहुत से परिवार गरीबी, दहेज प्रथा, बेरोजगारी से पीड़ित हैं। संसाधनों के अभाव में गांव के लोगों का जीवन व्यतीत हो रहा है, जबकि गांव के ही लोग भारतीय संस्कृति, सभ्यता, रीति-रिवाजों को संजोए हुए हैं। यह देखकर स्पष्ट अनुभव हो रहा है कि हमारा देश ग्रामीण और शहरी दो भागों में बंटा हुआ है। बताया कि अनुभूति के दौरान कार्यकर्ताओं ने जिले के मरदह, जंगीपुर, मुहम्मदाबाद, सदर सहित जमानिया ब्लाक के 68 गांवों में संपर्क किया।
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जिला सह संयोजक अनुराग त्रिपाठी ने बताया कि विद्यार्थी परिषद की टोली ने गांव का प्रत्यक्ष अनुभव करते हुए वहां के जीनव मूल्य परिस्थितियों, कठिनाइयों एवं समस्याओं को समझा। देखा कि आज भी गांव विकास से कोसों दूर है। शहरों की अपेक्षा गांवों के लोग अभी भी सड़क, पानी, बिजली, अस्पताल, स्वच्छता, शिक्षा, मकान एवं गरीबी से जूझ रहे हैं। एक तरफ जहां शहरों में विकासशीलता दिख रही है। वहीं गांवों में विकास दूर-दूर तक दिखाई नहीं दे रहा है। आज भी हमारे देश में ऐसे बच्चे हैं, जो पढ़ने की उम्र में काम करने को मजबूर हैं। बहुत से परिवार गरीबी, दहेज प्रथा, बेरोजगारी से पीड़ित हैं। संसाधनों के अभाव में गांव के लोगों का जीवन व्यतीत हो रहा है, जबकि गांव के ही लोग भारतीय संस्कृति, सभ्यता, रीति-रिवाजों को संजोए हुए हैं। यह देखकर स्पष्ट अनुभव हो रहा है कि हमारा देश ग्रामीण और शहरी दो भागों में बंटा हुआ है। बताया कि अनुभूति के दौरान कार्यकर्ताओं ने जिले के मरदह, जंगीपुर, मुहम्मदाबाद, सदर सहित जमानिया ब्लाक के 68 गांवों में संपर्क किया।
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