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गोवंश आश्रय केंद्र में बीस पशुओं की मौत
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कासिमाबाद(गाजीपुर)। पूर्वांचल सहकारी कताई मिल बड़ौरा में संचालित गोवंश आश्रय केंद्र में पशुओं की मौत का सिलसिला एक बार फिर से शुरू हो गया है। बेजुबानों की देख-रेख में बरती जाने वाली लापरवाही की वजह से रविवार और सोमवार को मिला कर 20 पशुओं ने चारा और दाना-पानी के अभाव में दम तोड़ दिया। डेढ़ माह में लगभग सौ से ऊपर पशुओं की मौत की घटना से आसपास के ग्रामीणों में संबंधित विभाग के प्रति आक्रोश गहराता जा रहा है।
पूर्वांचल सहकारी कताई मिल बड़ौरा में पांच सौ से ऊपर की संख्या में पशु रखे गए थे। पशुपालन विभाग की तरफ से अभी तक 468 पशुओं की टैगिंग भी की गई थी। वर्तमान समय में तीन सौ के लगभग ही पशु दिखाई दे रहे हैं। आसपास के ग्रामीणों ने बताया कि लगातार पशुओं की मौत हो रही है। इन पशुओं को खिलाने-पिलाने के लिए क्षेत्र के एक ग्राम प्रधान को जिम्मेदारी सौंपी गई है। शासन से प्रति पशु 30 रुपये दिए जा रहे हैं। इसके बाद भी पशुओं को खाने के लिए चारा और भूसा की व्यवस्था नहीं की जा रही है। भूख से तड़प-तड़प कर इस आश्रय केंद्र में डेढ़ माह के अंदर सौ से ऊपर पशुओं की मौत हो चुकी है। आसपास के लोगों के अनुसार रविवार को 10 और सोमवार को भी दस पशुओं ने दाना-पानी के अभाव में दम तोड़ दिया, जबकि वर्तमान में करीब एक दर्जन पशु दानी-पानी के अभाव में जमीन पर तड़प रहे हैं। इस आश्रय केंद्र में लगातार पशुओं के मरने का क्रम जारी रहने के बाद भी प्रशासन की कुंभकरणी नींद नहीं टूट रही है। अगर ऐसे ही चलता रहा तो एक-एक कर आश्रय केंद्र में मौजूद सभी पशुओं की मौत हो जाएगी। इस संबंध में उप जिलाधिकारी कासिमाबाद मंशाराम वर्मा ने बताया कि मेरे संज्ञान में पशुओं के मरने की बात नहीं थी। अगर ऐसा है तो खंड विकास अधिकारी से इसका स्पष्टीकरण मांग कर कार्रवाई की जाएगी।
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पूर्वांचल सहकारी कताई मिल बड़ौरा में पांच सौ से ऊपर की संख्या में पशु रखे गए थे। पशुपालन विभाग की तरफ से अभी तक 468 पशुओं की टैगिंग भी की गई थी। वर्तमान समय में तीन सौ के लगभग ही पशु दिखाई दे रहे हैं। आसपास के ग्रामीणों ने बताया कि लगातार पशुओं की मौत हो रही है। इन पशुओं को खिलाने-पिलाने के लिए क्षेत्र के एक ग्राम प्रधान को जिम्मेदारी सौंपी गई है। शासन से प्रति पशु 30 रुपये दिए जा रहे हैं। इसके बाद भी पशुओं को खाने के लिए चारा और भूसा की व्यवस्था नहीं की जा रही है। भूख से तड़प-तड़प कर इस आश्रय केंद्र में डेढ़ माह के अंदर सौ से ऊपर पशुओं की मौत हो चुकी है। आसपास के लोगों के अनुसार रविवार को 10 और सोमवार को भी दस पशुओं ने दाना-पानी के अभाव में दम तोड़ दिया, जबकि वर्तमान में करीब एक दर्जन पशु दानी-पानी के अभाव में जमीन पर तड़प रहे हैं। इस आश्रय केंद्र में लगातार पशुओं के मरने का क्रम जारी रहने के बाद भी प्रशासन की कुंभकरणी नींद नहीं टूट रही है। अगर ऐसे ही चलता रहा तो एक-एक कर आश्रय केंद्र में मौजूद सभी पशुओं की मौत हो जाएगी। इस संबंध में उप जिलाधिकारी कासिमाबाद मंशाराम वर्मा ने बताया कि मेरे संज्ञान में पशुओं के मरने की बात नहीं थी। अगर ऐसा है तो खंड विकास अधिकारी से इसका स्पष्टीकरण मांग कर कार्रवाई की जाएगी।
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