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जन औषधि केंद्र पर आम जनता को नहीं मिल रही सुविधाएं

Sat, 23 Feb 2019 11:34 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 23 Feb 2019 11:34 PM IST
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जन औषधि केंद्र पर आम जनता को नहीं मिल रही सुविधाएं
गाजीपुर। आम जनता को सस्ती दवा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जनपद में कुल चार भारतीय जन औषधि केंद्र खोला गया है। लेकिन इसका लाभ मरीजों को नहीं मिल रहा है। आलम यह है कि चिकित्सक बाहर (निजी कंपनियों की दवाएं) की दवाएं लिखने से बाज नहीं आ रहे हैं। जिससे 70 फीसदी दावएं उपलब्ध रहने के बाद भी मरीज और तीमारदार अन्यत्र जाकर दवाएं ले रहे हैँ।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रिम प्रोजेक्ट में शामिल जन औषधि केंद्र पर जेनरिक दवाओं को उपलब्ध कराया गया है। स्वास्थ्य महकमे का दावा है कि यहां कुल 250 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं। 60 से 70 फीसदी दवाएं मरीजों को यहां मिलती है। स्वास्थ्य महकमे की माने तो यह ब्रांडेड कंपनियों की दवाओं से 60 फीसदी कम दाम में मिलती है। आम जनता के लिए जन औषधि केंद्र काफी मददगार साबित हो रहा है। लेकिन जिला एवं महिला अस्पताल के ज्यादातर चिकित्सक मरीजों को मिलने वाली इस सुविधा को तार-तार कर रहे हैँ। डाक्टर की लिखी पर्ची लेकर जब मरीज जन औषधि केंद्र पर पहुंचता है, तो उसे दावा नहीं मिलती। क्योंकि चिकित्सक जन औषधि केंद्र की दवाओं को बेहतर न बताकर बाहर की दवाएं लेने को कहता है। आलम यह है कि चिकित्सक की पर्ची पर लिखी दवाओं को नेट की मदद से साल्ट देखकर अगर दे दी जाती है, तो उसे चिकित्सक द्वारा वापस करा दिया जाता है। जन औषधि केंद्र के प्रभारी काशीनाथ वर्मा ने बताया कि प्रत्येक जन औषधि केंद्र पर रोजना 5000 रुपये की दवा बिकती है। अगर चिकित्सक ईमानदारी से पर्ची लिखने लगे तो यह बिक्री दो से तीन गुना बढ़ सकती है। देखा जाए तो सरकार के लाभ प्रयास के बाद भी मरीजों का शोषण रूकने का नाम नहीं ले रहा है।
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-जंगीपुर ब्लाक के मानपुर निवासी सुुुधीर कुशवाहा ने कहा कि औषधि केंद्र पर नाममात्र की दवाएं उपलब्ध रहती हैं। उसे भी चिकित्सक नहीं लिखते। कुछ चिकित्सकों की पर्ची पर ही जेनरिक दवाएं लिखी जाती हैं, जो जन औषधि केंद्र पर मिलती है।
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-आरीपुर निवासी दिनेश राजभर ने बताया कि शासन के निर्देश के बावजूद चिकित्सकों में कोई सुधार नहीं हुआ है। आलम यह है कि निजी प्रेक्टिस से लेकर बाहर की दवाएं लिखना उनके आदत में शामिल हैं। लाख सर्तकता के बाद भी मरीजों का शोषण होता रहता है।
-मरदह ब्लाक के केलई गांव निवासी प्रेम चंद ने बताया कि मरीज को लेकर जाने के बाद जब हम डाक्टर से जन औषधि केंद्र की दवा लिखने को कहते हैँ, तो जवाब होता है कि वह दवा काम नहीं करती। अगर ठीक होना है तो बाहर की अच्छी दवा खाओ।

-केलई निवासी प्रमोद राजभर ने बताया कि हमे चिकित्सक द्वारा लिखी पर्ची पर जन औषधि केंद्र से दवाएं मिली हैं और हम सरकार की इस पहल की प्रशंसा करते हैं।
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इनसेट..
-अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डा. आरके सिन्हा ने कहा कि जन औषधि केंद्र पर सभी तरह की दवाएं उपलब्ध हैं। इनकी समय-समय पर जांच-पड़ताल भी की जा रही है। मरीजों को कम दाम पर बेहतर उपचार के लिए यहां से दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
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