फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ghazipur News ›   भारतीय संस्कृति के प्रतिनिधि हैं भगवान श्रीराम - कुलपति प्रो. गिरीशचंद

भारतीय संस्कृति के प्रतिनिधि हैं भगवान श्रीराम - कुलपति प्रो. गिरीशचंद

Thu, 07 Sep 2017 12:31 AM IST
Updated Thu, 07 Sep 2017 12:31 AM IST
विज्ञापन
भारतीय संस्कृति के प्रतिनिधि हैं भगवान श्रीराम - कुलपति प्रो. गिरीशचंद
जखनिया। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. गिरीशचंद त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय दर्शन वसुधैव कुटुंबकम का भाव सिखाता है। एक तरफ जहां दुनिया के सभी धर्म जियो और जीने दो के सूत्र पर कार्य करते हैं, वहीं एक हिंदू धर्म ही ऐसा है जो सर्वे भवंतु सुखिन: पर विश्वास रखता है। हम महिलाओं को बराबरी का स्थान ही नहीं देते बल्कि उन्हें अपने समाज में सर्वोच्च स्थान प्रदान करते हैं। यह बातें उन्होंने सिद्धपीठ हथियाराम मठ पर दो माह से लगातार चल रहे चातुर्मास महायज्ञ के पूर्णाहुति समापन समारोह में बुधवार को कही।
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण ताकतवर लोग करते हैं और ताकतवर का निर्माण अच्छे शिक्षण संस्थान एवं गुरुकुल ही कर सकते हैं। हमारे ताकतवर कहने का तात्पर्य चरित्रवान, धैर्यवान, शीलवान एवं गुणवान व्यक्तित्व से है। उन्होंने कहा कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय राष्ट्र का संकल्प है। सौ वर्ष पहले अंग्रेजों के शासन में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना की नींव रखी। हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था का दुर्भाग्य है कि आजादी के सात दशक बाद भी आज हमारे युवा अपने को पिछड़ा घोषित कराने में लगे हुए हैं, जबकि समूचा विश्व आगे बढ़ने की इच्छा में है। कहा कि भारतीय संस्कृति के प्रतिनिधि हैं भगवान श्रीराम। जिन्होंने सीता के सम्मान की रक्षा के लिए पैदल हिंद महासागर पार कर दिया। सिद्धपीठ से जुड़ी महामंडलेश्वर माता योगेश्वरी यति ने भ्रूण हत्या पर प्रहार करते हुए कहा कि गर्भस्थ शिशु शिव या शिवा का स्वरूप है। भ्रूण हत्या से व्यक्ति का विनाश निश्चित है। आधुनिकता का मतलब नग्नता नहीं और महिला सशक्तिकरण का मतलब विद्रोह नहीं।
विज्ञापन

महामंडलेश्वर मोहनानन्द यति महाराज ने कहा कि ज्ञान-विज्ञान भारत की ही देन है। महामंडलेश्वर स्वामी सोमेश्वर यति महाराज ने कहा कि जन्म-जन्म के पुण्य कर्मों के उदय से मानव शरीर प्राप्त होता है। गाय, गीता और गंगा की सेवा ही मोक्ष का प्रमुख साधन है। महामंडलेश्वर परेशनंद यति महाराज ने कहा की संपूर्ण जगत ईश्वर की रचना है। अध्यक्षता कर रहे अखिल भारतीय गौ-सेवा प्रमुख एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह सेवा प्रमुख अजीत महापात्रा ने कहा कि हम सभी में देवताओं का वास है। सिद्धपीठ के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर भवानीनन्दन महाराज ने आगन्तुकों का आभार प्रकट करते हुए ब्रह्मलीन गुरु महामंडलेश्वर स्वामी बालकृष्ण यति को श्रद्धांजलि अर्पित की। देर शाम तक लोगों ने भंडारा में प्रसाद ग्रहण किया। महंत बालकृष्ण यति कन्या महाविद्यालय की छात्राओं ने गीता पाठ किया। स्वस्तिवाचन आचार्य मनीष एवं आचार्य शंभू पाठक ने किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed