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विश्व साहित्य के सर्वश्रेष्ठ कवि थे तुलसी दास
Updated Mon, 31 Jul 2017 11:26 PM IST
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गाजीपुर। रामचरित उपाध्याय स्मृति संस्थान की ओर से रविंद्रपुरी स्थित वाणिज्य प्रतिष्ठान में रविवार को तुलसी जयंती मनाई गई। इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार डा. जितेंद्रनाथ पाठक ने कहा कि तुलसी दास हिंदी साहित्य के ही नहीं, विश्व साहित्य के सर्वश्रेष्ठ कवि थे। उन्होंने काव्य रूप, भाषा और शिल्प सभी क्षेत्रों में जो रचनात्मक सार्मथ दिखाया, वह आज तक कोई कवि नहीं दिखा सका।
अध्यक्षता कर रहे डा. अम्बिका प्रसाद पांडेय ने कहा कि उन्होंने हिंदू जनता के मन के अवसाद को दूर किया। कथाकार रामअवतार ने रामायण की दृढ़ परंपरा में रामचरित मानस को सवश्रेष्ठ रामायण बताते हुए कहा कि मनु स्मृति में धर्म के दस लक्षण बताए गए हैं। डा. समरबहादुर सिंह ने कहा कि भक्तिकाल भारतीय इतिहास का पहला सांस्कृतिक नवजागरण है। इसमें तुलसी की महत्वपूर्ण भूमिका थी। विद्याशंकर पांडेय ने तुलसी की लोकप्रियता, डा. रमाशंकर सिंह ने उनके पारिवारिक आर्दशों, त्रिभुवन सिंह ने तुलसी के दर्शन, कामेश्वर दुबे ने तुलसी की भाषा तथा सियारामशरण वर्मा ने तुलसी के सामाजिक आर्दशों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर डा. ओमप्रकाश श्रीवास्तव, दुर्गा तिवारी, प्रमोद राय, गोपाल गौरव ने विचार व्यक्त किया। संचालन डा. गजाधर शर्मा गंगेश ने किया।
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अध्यक्षता कर रहे डा. अम्बिका प्रसाद पांडेय ने कहा कि उन्होंने हिंदू जनता के मन के अवसाद को दूर किया। कथाकार रामअवतार ने रामायण की दृढ़ परंपरा में रामचरित मानस को सवश्रेष्ठ रामायण बताते हुए कहा कि मनु स्मृति में धर्म के दस लक्षण बताए गए हैं। डा. समरबहादुर सिंह ने कहा कि भक्तिकाल भारतीय इतिहास का पहला सांस्कृतिक नवजागरण है। इसमें तुलसी की महत्वपूर्ण भूमिका थी। विद्याशंकर पांडेय ने तुलसी की लोकप्रियता, डा. रमाशंकर सिंह ने उनके पारिवारिक आर्दशों, त्रिभुवन सिंह ने तुलसी के दर्शन, कामेश्वर दुबे ने तुलसी की भाषा तथा सियारामशरण वर्मा ने तुलसी के सामाजिक आर्दशों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर डा. ओमप्रकाश श्रीवास्तव, दुर्गा तिवारी, प्रमोद राय, गोपाल गौरव ने विचार व्यक्त किया। संचालन डा. गजाधर शर्मा गंगेश ने किया।
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