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फागिंग मशीन खरीदकर गांव में दवा का छिड़काव कराना होगा
Updated Thu, 27 Sep 2018 12:25 AM IST
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सुहवल(गाजीपुर)। ग्राम प्रधानों को अब फागिंग मशीन खरीद कर गांव में दवा का छिड़काव कराना ही पड़ेगा। वजह मच्छरों के प्रकोप से अगर गांव में कोई मलेरिया-डेंगू जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित मिला तो संबंधित प्रधान की खैर नहीं है। उसे मरीज को अस्पताल में भरती कराने के साथ ही उसका इलाज भी कराना होगा।
सरकार की ओर से ग्राम स्वच्छता समिति के खाते में प्रति वर्ष दस हजार रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई जाती है। धनराशि से गांव में स्वच्छता से संबंधित कार्य तो कराए जाते हैं लेकिन प्रधान की ओर से दवा का छिड़काव नहीं कराया जाता। इसके चलते प्राय: विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में संक्रामक बीमारियों के साथ ही मलेरिया एवं डेंगू जैसी बीमारियां पांव पसारती हैं। इन बीमारियों पर रोकथाम न लगने से कई बार लोगों की जान पर बन आती है। हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग इन संक्रामक बीमारियों से पीड़ित होते हैं। इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में साफ-सफाई की व्यवस्था को दुरुस्त बनाने एवं मच्छरों के प्रकोप से बचाने के लिए दवा के छिड़काव को गंभीरता से नहीं लिया जाता। जिले में इस वर्ष अब तक डेंगू का कोई मरीज नहीं पाया गया है। हालांकि बाहर से यहां आए चार-पांच मरीज जांच में चिन्हित किए गए हैं। जनवरी से अब तक मलेरिया के 20 मरीज पाए गए। मच्छर जनित गंभीर बीमारियों पर काबू पाने के लिए अब शासन ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। ग्राम स्वच्छता समिति के खाते में दस-दस हजार रुपये भेजने के साथ ही ग्राम प्रधानों को फागिंग मशीन और दवा खरीदने के सख्त निर्देश दिए हैं। यही नहीं एक मजदूर के सहारे दवा का छिड़काव भी कराने को कहा है। जिला मलेरिया अधिकारी को आदेश दिया गया है कि वह ग्राम प्रधानों से फागिंग मशीन के साथ दवा खरीदवा कर तत्काल प्रभाव से छिड़काव कराएं। डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया जैसी खतरनाक बीमारियां सामने आने के बाद संबंधित गांव के ग्राम प्रधान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अगर इसके बाद भी मरीज मिलते हैं तो उनके इलाज का खर्च खुद ग्राम प्रधान को उठाना होगा।
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सरकार की ओर से ग्राम स्वच्छता समिति के खाते में प्रति वर्ष दस हजार रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई जाती है। धनराशि से गांव में स्वच्छता से संबंधित कार्य तो कराए जाते हैं लेकिन प्रधान की ओर से दवा का छिड़काव नहीं कराया जाता। इसके चलते प्राय: विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में संक्रामक बीमारियों के साथ ही मलेरिया एवं डेंगू जैसी बीमारियां पांव पसारती हैं। इन बीमारियों पर रोकथाम न लगने से कई बार लोगों की जान पर बन आती है। हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग इन संक्रामक बीमारियों से पीड़ित होते हैं। इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में साफ-सफाई की व्यवस्था को दुरुस्त बनाने एवं मच्छरों के प्रकोप से बचाने के लिए दवा के छिड़काव को गंभीरता से नहीं लिया जाता। जिले में इस वर्ष अब तक डेंगू का कोई मरीज नहीं पाया गया है। हालांकि बाहर से यहां आए चार-पांच मरीज जांच में चिन्हित किए गए हैं। जनवरी से अब तक मलेरिया के 20 मरीज पाए गए। मच्छर जनित गंभीर बीमारियों पर काबू पाने के लिए अब शासन ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। ग्राम स्वच्छता समिति के खाते में दस-दस हजार रुपये भेजने के साथ ही ग्राम प्रधानों को फागिंग मशीन और दवा खरीदने के सख्त निर्देश दिए हैं। यही नहीं एक मजदूर के सहारे दवा का छिड़काव भी कराने को कहा है। जिला मलेरिया अधिकारी को आदेश दिया गया है कि वह ग्राम प्रधानों से फागिंग मशीन के साथ दवा खरीदवा कर तत्काल प्रभाव से छिड़काव कराएं। डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया जैसी खतरनाक बीमारियां सामने आने के बाद संबंधित गांव के ग्राम प्रधान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अगर इसके बाद भी मरीज मिलते हैं तो उनके इलाज का खर्च खुद ग्राम प्रधान को उठाना होगा।
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