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शहर के निचले हिस्से में घुसा बाढ़ का पानी
Updated Thu, 06 Sep 2018 11:04 PM IST
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गाजीपुर। गंगा में बढ़ाव के चलते बुधवार की देर रात बाढ़ का पानी शहर के निचले हिस्से प्रवेश कर गया। गंगा नदी का यह पानी जिलाधिकारी आवास के पास बने बड़े नाले के माध्यम से शहर में प्रवेश करता है। गुरुवार की सुबह तक यहां सभी निचले हिस्सों में पानी भर गया था। हालांकि दोपहर बाद जलस्तर घटने लगा जिससे नदी और तबाही नहीं मचा सकी।
गंगा के पानी में कई दिनों से लगातार हो रहे बढ़ाव से शहर के सभी घाटों पर पानी चढ़ता जा रहा था। शहर का ददरीघाट पूरी तरह से जहां डूब गया है, वहीं अन्य घाटों का भी यही हाल है। कई घाटों पर मात्र उपर की एक- दो सीढ़ियां ही दिखाई दे रही हैं। इसी प्रकार सिकंदरपुर घाट, कलक्टर घाट, महादेवा घाट पर भी पानी ही पानी दिख रहा है। शहर के बीचों-बीच साई मंदिर के पास घाट पर दिनभर लोग नजारा ले रहे हैं। यहां से गंगा काफी दूर तक दिखाई देती हैं। युवक-युवतियां सेल्फी भी बना रहे हैं। नगर के निचले हिस्से में कई रिहायशी मकान बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। जिससे लोगों को घर से बाहर निकलने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
कठवामोड़ संवाददाता के अनुसार बेसो नदी के पुल के नीचे बनाई गई सड़क डूब गई, जिससे गमनागमन करने वालों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। पुलिया का एक भाग भी धंस गया है। यहां पहले से ही भारी वाहनों के प्रवेश वर्जित था। अब पानी भर जाने से नीचे की सड़क से भी वाहनों को रोक दिया जा रहा है, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी हो रही है। गंगा, गोमती और कर्मनाशा नदियों में अब तक बढ़ाव के चलते चहुओर बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है। देखा जाए तो जिले में कुल नौ नदियां बहती है। यहां की कुल सात में से छह तहसीलों में बाढ़ का असर बना रहता है। संवेदनशील समय में किसी भी प्रकार से बाढ़ ड्यूटी में लगे कर्मचारियों की छुट्टियों को रद्द कर दिया गया है। जिलाधिकारी की ओर से दिए गए आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि इस दौरान न तो कोई अधिकारी, कर्मचारी अवकाश लेगा और न ही अवकाश पर रहेगा। लेखपाल, कानूनगो समेत तहसील स्तर के सभी अधिकारी कर्मचारी, बाढ़ शरणालयों, राहत कार्यो आदि कार्यो को सभी जिम्मेदारी से निभाएं।
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गंगा के पानी में कई दिनों से लगातार हो रहे बढ़ाव से शहर के सभी घाटों पर पानी चढ़ता जा रहा था। शहर का ददरीघाट पूरी तरह से जहां डूब गया है, वहीं अन्य घाटों का भी यही हाल है। कई घाटों पर मात्र उपर की एक- दो सीढ़ियां ही दिखाई दे रही हैं। इसी प्रकार सिकंदरपुर घाट, कलक्टर घाट, महादेवा घाट पर भी पानी ही पानी दिख रहा है। शहर के बीचों-बीच साई मंदिर के पास घाट पर दिनभर लोग नजारा ले रहे हैं। यहां से गंगा काफी दूर तक दिखाई देती हैं। युवक-युवतियां सेल्फी भी बना रहे हैं। नगर के निचले हिस्से में कई रिहायशी मकान बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। जिससे लोगों को घर से बाहर निकलने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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कठवामोड़ संवाददाता के अनुसार बेसो नदी के पुल के नीचे बनाई गई सड़क डूब गई, जिससे गमनागमन करने वालों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। पुलिया का एक भाग भी धंस गया है। यहां पहले से ही भारी वाहनों के प्रवेश वर्जित था। अब पानी भर जाने से नीचे की सड़क से भी वाहनों को रोक दिया जा रहा है, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी हो रही है। गंगा, गोमती और कर्मनाशा नदियों में अब तक बढ़ाव के चलते चहुओर बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है। देखा जाए तो जिले में कुल नौ नदियां बहती है। यहां की कुल सात में से छह तहसीलों में बाढ़ का असर बना रहता है। संवेदनशील समय में किसी भी प्रकार से बाढ़ ड्यूटी में लगे कर्मचारियों की छुट्टियों को रद्द कर दिया गया है। जिलाधिकारी की ओर से दिए गए आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि इस दौरान न तो कोई अधिकारी, कर्मचारी अवकाश लेगा और न ही अवकाश पर रहेगा। लेखपाल, कानूनगो समेत तहसील स्तर के सभी अधिकारी कर्मचारी, बाढ़ शरणालयों, राहत कार्यो आदि कार्यो को सभी जिम्मेदारी से निभाएं।
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