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कटान:चार बिस्वा भूमि गंगा में हुई समाहित
Updated Sat, 29 Jul 2017 11:34 PM IST
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करंडा (गाजीपुर)। क्षेत्र के सोकनी, बड़हरिया और रफीपुर में कटान का क्रम धीमा जरूर है लेकिन पूरी तरह से थम नहीं रहा है। शुक्रवार की रात शुरू हुआ कटान का क्रम शनिवार को भी जारी रहा। इस दौरान सोकनी और बड़हरिया में करीब चार बिस्वा कृषि योग्य भूमि कटकर गंगा में समाहित हो गई। कटान का सिलसिला न थमने की वजह से कटान पीड़ितों का दर्द बढ़ता जा रहा है। बीस दिनों में करीब 50 बीघा भूमि कटान की भेंट चढ़ चुकी है।
करंडा क्षेत्र के कई तटवर्ती इलाकों में कटान का कहर कोई नई बात नहीं है। वर्षों से लोग कटान का दंश झेल रहे हैं। कटान की वजह से पुरैना गांव का अस्तित्व करीब-करीब समाप्त हो गया है। अब वर्षों से सोकनी, बड़हरिया और रफीपुर में कटान हो रहा है। हर वर्ष कृषि योग्य भूमि कटकर गंगा में गिर रही है। इस वर्ष भी बारिश के मौसम में गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी होते ही कटान का सिलसिला भी जारी हो गया है। शुक्रवार की देर शाम से कटान का क्रम शुरू हो गया, जो शनिवार को भी जारी रहा। इस दौरान सोकनी और बड़हरिया के राजनारायण यादव, ओमप्रकाश यादव, छेदी यादव, आजाद यादव, कपिलदेव यादव, बसगीत यादव, शिवगोविंद यादव, सुदामा यादव, सुखराम यादव, अंबिका यादव, शोभू यादव, कंचन यादव, बहादुर यादव, रामपूजन सिंह, शिवपूजन सिंह और पंचदेव सिंह की लगभग चार बिस्वा भूमि कटकर गंगा में समाहित हो गई। कटान का कहर न थमने से कटान पीड़ितों की चिंता बढ़ती जा रही है। वह इस बात से परेशान हैं कि अगर किसी तरह से कटान होता रहा तो इस वर्ष भी काफी मात्रा में उनकी कृषि योग्य भूमि गंगा की भेंट चढ़ जाएगी और उनका काफी नुकसान हो जाएगा। बड़हरिया और रफीपुर गांव के लोग इस बात से परेशान हैं कि अगर गंगा इसी तरह से भूमि को काटते हुए आगे बढ़ती रही तो उनके मकान भी गंगा में समाहित हो जाएंगे।
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करंडा क्षेत्र के कई तटवर्ती इलाकों में कटान का कहर कोई नई बात नहीं है। वर्षों से लोग कटान का दंश झेल रहे हैं। कटान की वजह से पुरैना गांव का अस्तित्व करीब-करीब समाप्त हो गया है। अब वर्षों से सोकनी, बड़हरिया और रफीपुर में कटान हो रहा है। हर वर्ष कृषि योग्य भूमि कटकर गंगा में गिर रही है। इस वर्ष भी बारिश के मौसम में गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी होते ही कटान का सिलसिला भी जारी हो गया है। शुक्रवार की देर शाम से कटान का क्रम शुरू हो गया, जो शनिवार को भी जारी रहा। इस दौरान सोकनी और बड़हरिया के राजनारायण यादव, ओमप्रकाश यादव, छेदी यादव, आजाद यादव, कपिलदेव यादव, बसगीत यादव, शिवगोविंद यादव, सुदामा यादव, सुखराम यादव, अंबिका यादव, शोभू यादव, कंचन यादव, बहादुर यादव, रामपूजन सिंह, शिवपूजन सिंह और पंचदेव सिंह की लगभग चार बिस्वा भूमि कटकर गंगा में समाहित हो गई। कटान का कहर न थमने से कटान पीड़ितों की चिंता बढ़ती जा रही है। वह इस बात से परेशान हैं कि अगर किसी तरह से कटान होता रहा तो इस वर्ष भी काफी मात्रा में उनकी कृषि योग्य भूमि गंगा की भेंट चढ़ जाएगी और उनका काफी नुकसान हो जाएगा। बड़हरिया और रफीपुर गांव के लोग इस बात से परेशान हैं कि अगर गंगा इसी तरह से भूमि को काटते हुए आगे बढ़ती रही तो उनके मकान भी गंगा में समाहित हो जाएंगे।
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