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सैनिकों के गांव गहमर में गम और गुस्सा का माहौल
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सेवराई/दिलदारनगर। पुलवामा में सैनिकों पर हुए आत्मघाती हमले को लेकर एशिया के बड़े गांव में शुमार तथा सैन्य बाहुल्य गांव के रूप में विख्यात गहमर में जबरदस्त गम और गुस्से का माहौल है। यहां के प्राय: हर घर में फौजी हैं। वर्तमान में इस गांव के करीब पांच हजार जवान फौज में हैं। दस हजार अवकाश प्राप्त कर चुके हैं। देशभक्ति और सेवा का जज्बा गांव के बच्चे-बच्चे के रग-रग में बसा हुआ है। कई सैनिकों के घरों में आज चूल्हे नहीं जले। शुक्रवार को अमर उजाला की टीम जब इस गांव में पहुंची तो हमेशा चहल पहल रहने वाले इस गांव में गम की चादर तनी दिखी।
गहमर के भूतपूर्व सैनिक सेवा समिति के परिसर में शुक्रवार को जुटे सैनिकों ने शहीद जवानों की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रख कर श्रद्धांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने इस घटना को सबसे कायराना बताते हुए कहा कि अगर मौका मिले तो सिर्फ हम लोग ही बदला ले लेंगे। संयोजक पूर्व सैनिक रामकुमार सिंह ने कहा कि अब इस प्रकार की घटनाओं पर मौन नहीं रहना चाहिए। इन आतंकियों को इनकी भाषा में ही जवाब देना जरूरी हो गया है। अब सर्जिकल स्ट्राइक नहीं, घर में घुस के इनको ठोंकना पड़ेगा। शहीद हुए जवानों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए बल्कि देशहित में सोचते हुए इस हमले का मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए। वीरबहादुर सिंह ने कहा कि हम भले ही अवकाश प्राप्त कर चुके हैं लेकिन इस हमले से हमारा खून खौल रहा है। राजनीतिक हस्तियों को हम सैनिक यह संदेश देना चाहते हैं कि अब हमे वार्ता नहीं बदला चाहिए। सैनिकों के बलिदान को यूं ही व्यर्थ नहीं होने देना चाहिए। भूतपूर्व सैनिक सूबेदार अंगद सिंह ने आक्रोश व्यक्त करते हुए सरकार से कठोर कार्रवाई किए जाने की मांग की। इस मौके पर मौजूद मकसूदन सिंह, रणजीत सिंह, सूरजबली सिंह, रामचंद्र सिंह, मोहन सिंह, वंशीधर सिंह, शिवशंकर सिंह, विश्वनाथ सहिं आदि ने सरकार को आरपार की लड़ाई लड़ने का सुझाव दिया।
नौजवानों में भी है उबाल
दिलदारनगर/सेवराई। सैन्य बाहुल्य गांव गहमर के नौजवान रोजाना सुबह उठते ही देश सेवा के जज्बे को लेकर खाली स्थान, सड़कों तथा मैदान में फौज में भर्ती होने के लिए खुद को तैयार करने के लिए पहुंच जाते हैं। सेना में नौकरी का जज्बा लिए अभिषेक सिंह, पिंटू सिंह, मोहन सिंह, हरेराम सिंह, मन्नू सिंह आदि युवाओं में भी इस आतंकवादी हमले को लेकर जबरदस्त आक्रोश था। उन्होंने एक स्वर में कहा कि गहमर के युवक देश सेवा के लिए जन्म लेते हैं। देश सेवा ही हमारा धर्म और कर्म है। आतंकी हमले का बदला लेने के लिए हम सभी बेचैन हैं। कहा कि यह हमारी अस्मिता पर हमला है।
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गहमर के भूतपूर्व सैनिक सेवा समिति के परिसर में शुक्रवार को जुटे सैनिकों ने शहीद जवानों की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रख कर श्रद्धांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने इस घटना को सबसे कायराना बताते हुए कहा कि अगर मौका मिले तो सिर्फ हम लोग ही बदला ले लेंगे। संयोजक पूर्व सैनिक रामकुमार सिंह ने कहा कि अब इस प्रकार की घटनाओं पर मौन नहीं रहना चाहिए। इन आतंकियों को इनकी भाषा में ही जवाब देना जरूरी हो गया है। अब सर्जिकल स्ट्राइक नहीं, घर में घुस के इनको ठोंकना पड़ेगा। शहीद हुए जवानों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए बल्कि देशहित में सोचते हुए इस हमले का मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए। वीरबहादुर सिंह ने कहा कि हम भले ही अवकाश प्राप्त कर चुके हैं लेकिन इस हमले से हमारा खून खौल रहा है। राजनीतिक हस्तियों को हम सैनिक यह संदेश देना चाहते हैं कि अब हमे वार्ता नहीं बदला चाहिए। सैनिकों के बलिदान को यूं ही व्यर्थ नहीं होने देना चाहिए। भूतपूर्व सैनिक सूबेदार अंगद सिंह ने आक्रोश व्यक्त करते हुए सरकार से कठोर कार्रवाई किए जाने की मांग की। इस मौके पर मौजूद मकसूदन सिंह, रणजीत सिंह, सूरजबली सिंह, रामचंद्र सिंह, मोहन सिंह, वंशीधर सिंह, शिवशंकर सिंह, विश्वनाथ सहिं आदि ने सरकार को आरपार की लड़ाई लड़ने का सुझाव दिया।
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नौजवानों में भी है उबाल
दिलदारनगर/सेवराई। सैन्य बाहुल्य गांव गहमर के नौजवान रोजाना सुबह उठते ही देश सेवा के जज्बे को लेकर खाली स्थान, सड़कों तथा मैदान में फौज में भर्ती होने के लिए खुद को तैयार करने के लिए पहुंच जाते हैं। सेना में नौकरी का जज्बा लिए अभिषेक सिंह, पिंटू सिंह, मोहन सिंह, हरेराम सिंह, मन्नू सिंह आदि युवाओं में भी इस आतंकवादी हमले को लेकर जबरदस्त आक्रोश था। उन्होंने एक स्वर में कहा कि गहमर के युवक देश सेवा के लिए जन्म लेते हैं। देश सेवा ही हमारा धर्म और कर्म है। आतंकी हमले का बदला लेने के लिए हम सभी बेचैन हैं। कहा कि यह हमारी अस्मिता पर हमला है।
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