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जीवन की हर व्यथा मिट जाती है कथा सुनने से
Updated Fri, 05 Jan 2018 10:57 PM IST
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गहमर। स्थानीय गांव के यूनियन बैंक के पीछे सूबेदार चंद्रमा सिंह के अहाते में नौ दिवसीय संगीत मय श्रीराम कथा आयोजित है। पांचवें दिन राम विवाह प्रसंग पर प्रवचन हुआ। रामकथा वाचक संध्या देवी ने कहा कि कथा सुनने से जीवन की हर व्यथा मिट जाती है। राम विवाह एक आदर्श विवाह है।
कथा वाचक संध्या देबी नेे कहा कि राजा जनक ने अपनी बेटी के लिए स्वयंवर रचाया। उन्होंने एक प्रतिज्ञा रखी कि जो शिव पिनाक का खंडन करेगा वह सीता से नाता जोड़ेगा। उस धनुष को तोड़ने के लिए कई राजा एवं राजकुमार पहुंचे लेकिन सभी विफल रहे। ऐसे में राजा जनक ने सभा में कहा कि आज धरती वीरों से विहीन हो गई है, सभी अपने घर जाएं। इसके बाद लक्ष्मण को क्रोध आया और उन्होंने कहा कि अगर श्रीराम की आज्ञा हो तो धनुष क्या, पूरे ब्रह्मांड को गेंद की तरह उठा लूं। स्वामी ने कहा कि धनुष अहंकार का प्रतीक है एवं राम ज्ञान का प्रतीक। जब अहंकारी व्यक्ति को ज्ञान का स्पर्श होता है तब अहंकार का नाश हो जाता है। श्रीराम में वह अहंकार नहीं था और उन्होंने धुनष उठाया और उनका विवाह सीता से हुआ। राम विवाह की मनोहर झांकी प्रस्तुत की गई। इस मौके पर रामजी तिवारी, उमेश बाबा, कझ्ैलाशी, अवधेश चौबे, हरि मुनि, ओमप्रकाश, सुधीर सिंह, वाल्मिकी सिंह, राजकिशोर मिश्रा, दीपचंद्र मद्धेशिया, राकेश गुप्ता, रोहित गुप्ता, सुरेश जायसवाल, किशन मिश्रा, शुभम मिश्रा, साधू गुप्ता आदि उपस्थित थे।
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कथा वाचक संध्या देबी नेे कहा कि राजा जनक ने अपनी बेटी के लिए स्वयंवर रचाया। उन्होंने एक प्रतिज्ञा रखी कि जो शिव पिनाक का खंडन करेगा वह सीता से नाता जोड़ेगा। उस धनुष को तोड़ने के लिए कई राजा एवं राजकुमार पहुंचे लेकिन सभी विफल रहे। ऐसे में राजा जनक ने सभा में कहा कि आज धरती वीरों से विहीन हो गई है, सभी अपने घर जाएं। इसके बाद लक्ष्मण को क्रोध आया और उन्होंने कहा कि अगर श्रीराम की आज्ञा हो तो धनुष क्या, पूरे ब्रह्मांड को गेंद की तरह उठा लूं। स्वामी ने कहा कि धनुष अहंकार का प्रतीक है एवं राम ज्ञान का प्रतीक। जब अहंकारी व्यक्ति को ज्ञान का स्पर्श होता है तब अहंकार का नाश हो जाता है। श्रीराम में वह अहंकार नहीं था और उन्होंने धुनष उठाया और उनका विवाह सीता से हुआ। राम विवाह की मनोहर झांकी प्रस्तुत की गई। इस मौके पर रामजी तिवारी, उमेश बाबा, कझ्ैलाशी, अवधेश चौबे, हरि मुनि, ओमप्रकाश, सुधीर सिंह, वाल्मिकी सिंह, राजकिशोर मिश्रा, दीपचंद्र मद्धेशिया, राकेश गुप्ता, रोहित गुप्ता, सुरेश जायसवाल, किशन मिश्रा, शुभम मिश्रा, साधू गुप्ता आदि उपस्थित थे।
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