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फिर टूटा ताड़ीघाट राजवाहा, डेढ़ सौ बीघा फसल जलमग्न
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सुहवल(गाजीपुर)। गुरुवार की देर रात ताड़ीघाट राजवाहा में क्षमता से अधिक पानी छोड़ दिया गया जिससे क्षेत्र के आधा दर्जन गांव के डेढ़ सौ बीघा खेत में लगी फसल जलमग्न हो गई। देर रात तेज धार के साथ पानी पहुंचने पर दलित बस्ती के पास पहले ओवरफ्लो होने लगा इसके बाद राजवाहा जगह-जगह से टूटने लगा। सुबह होते-होते बड़े भाग में पानी फैल गया। अभी दो दिन पहले अधियारा-बड़ौरा माइनर के ओवरफ्लो होने से सात गांवों की करीब पचास बीघा खेत में लगा पानी अभी तक निकल नहीं पाया है।
ताड़ीघाट राजवाहा करीब 21 किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। गुरुवार को इसमें अधिक मात्रा में पानी छोड़ दिया गया। देर रात सुहवल दलित बस्ती के पास राजवाहा ओवरफ्लो होने लगा। इधर पानी का दबाव बढ़ता गया जिससे जगह-जगह राजवाहा टूट गया। इसके चलते सुहवल, बड़ौरा, पटखौलिया, डेढ़गांवा सहित करीब आधा दर्जन गांवों के किसानों की आलू, गेहूं, चना, मटर, सरसों , मसूर आदि की करीब 150 बीघा की फसल पानी में डूब गई। किसानों को इसकी जानकारी सुबह हुई तो उनकी त्योरी चढ़ गई। विभाग के अधिकारियों को इसकी जानकारी देते हुए राजवाहा को तत्काल बंद करने की मांग की गई। पीड़ित किसान सुरेश पांडेय, भगवती प्रसाद तिवारी, मारकंडेय, नागेंद्र ओझा, जयश्री यादव, महंगू, रविशंकर तिवारी, शंकर यादव, ब्रम्हदेव, दुनिया यादव, अशोक महेश, भुल्लन, बलिराज, लल्लन राम आदि किसानों ने बताया कि सिंचाई विभाग की यह कोई पहली लापरवाही नहीं है। इसके पहले भी कई बार नहर टूटने, ओवरफ्लो होने की घटनाएं हो चुकी हैं। कहा कि फसलें डूब जाने से काफी नुकसान होता है लेकिन इस बाबत न तो प्रशासन गलती मानता है और न ही किसी को मुआवजा दिया जाता है। मालूम हो कि अभी हाल ही में दो दिन पहले क्षेत्र के सुगवलिया गांव के पास अधियारा-बड़ौरा माइनर में अधिक पानी छोड़ दिया गया। इससे वह ओवरफ्लो हो गई। सुगवलिया, सोनऊल, अन्हारीपुर, रमवल, खजुहा सहित सात गांवों के किसानों की करीब 50 बीघा की फसल जलमग्न हो गई। अभी भी पानी खेतों में से पूरी तरह से निकल नहीं पाया है। क्षेत्र के किसानों ने जिले प्रशासन को चेतावनी दी है कि फसलों के नुकसान के लिए मुआवजा दिया जाए नहीं तो आंदोलन किया जाएगा।
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ताड़ीघाट राजवाहा करीब 21 किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। गुरुवार को इसमें अधिक मात्रा में पानी छोड़ दिया गया। देर रात सुहवल दलित बस्ती के पास राजवाहा ओवरफ्लो होने लगा। इधर पानी का दबाव बढ़ता गया जिससे जगह-जगह राजवाहा टूट गया। इसके चलते सुहवल, बड़ौरा, पटखौलिया, डेढ़गांवा सहित करीब आधा दर्जन गांवों के किसानों की आलू, गेहूं, चना, मटर, सरसों , मसूर आदि की करीब 150 बीघा की फसल पानी में डूब गई। किसानों को इसकी जानकारी सुबह हुई तो उनकी त्योरी चढ़ गई। विभाग के अधिकारियों को इसकी जानकारी देते हुए राजवाहा को तत्काल बंद करने की मांग की गई। पीड़ित किसान सुरेश पांडेय, भगवती प्रसाद तिवारी, मारकंडेय, नागेंद्र ओझा, जयश्री यादव, महंगू, रविशंकर तिवारी, शंकर यादव, ब्रम्हदेव, दुनिया यादव, अशोक महेश, भुल्लन, बलिराज, लल्लन राम आदि किसानों ने बताया कि सिंचाई विभाग की यह कोई पहली लापरवाही नहीं है। इसके पहले भी कई बार नहर टूटने, ओवरफ्लो होने की घटनाएं हो चुकी हैं। कहा कि फसलें डूब जाने से काफी नुकसान होता है लेकिन इस बाबत न तो प्रशासन गलती मानता है और न ही किसी को मुआवजा दिया जाता है। मालूम हो कि अभी हाल ही में दो दिन पहले क्षेत्र के सुगवलिया गांव के पास अधियारा-बड़ौरा माइनर में अधिक पानी छोड़ दिया गया। इससे वह ओवरफ्लो हो गई। सुगवलिया, सोनऊल, अन्हारीपुर, रमवल, खजुहा सहित सात गांवों के किसानों की करीब 50 बीघा की फसल जलमग्न हो गई। अभी भी पानी खेतों में से पूरी तरह से निकल नहीं पाया है। क्षेत्र के किसानों ने जिले प्रशासन को चेतावनी दी है कि फसलों के नुकसान के लिए मुआवजा दिया जाए नहीं तो आंदोलन किया जाएगा।
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