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जिले में सूखे की संभावना बढ़ी
Updated Wed, 11 Jul 2018 11:08 PM IST
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गाजीपुर। जुलाई माह में गाजीपुर में बरसात न होने से किसान चिंतित नजर आ रहे हैं। चार जुलाई तक मात्र 4.1 मिमी वर्षा रिकार्ड की गई है, जो खेती के लिए न के बराबर है। इसके पहले जून महीने में भी बारिश 19.05 मिमी रिकार्ड की गई है। इस प्रकार की कम बारिश सूखे की ओर इशारा कर रही है। अगर इस हफ्ते तक बरसात नहीं हुई तो खरीफ की खेती तो चौपट हो जाएगी। इधर किसानों के खेतों पर पड़ रही दरारों से उनकी रात की नींदें उड़ गई हैं। प्रचंड गर्मी और तपिश ने खेतों में किसी भी फसल को हरा-भरा नहीं रहने दिया है।
पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष जून में बारिश का रिकार्ड बहुत कम रहा है। 2017 में 62.21 मिमी की बारिश से किसानों के चेहरे खिल गए थे। इसके बाद जुलाई में भी जमकर 90.87 मिमी बरसात हुई। इतनी अच्छी बारिश के बाद किसानों ने समय से खेती का काम संपन्न कर लिया था। इस बार जून और जुलाई दोनों महीनों ने किसानों को बारिश के मामले में धोखा दे दिया है। अभी भी मानसून की बेरुखी चल रही है। बादलों की लुकाछिपी का खेल चल रहा है। धान, अरहर, मक्का, बाजरा, उर्द, मूंग आदि की खेती में हो रही देरी किसानों को मरणासन्न कर दे रही है। खास बात यह है कि एक बार खराब खेती और पैदावार कम होने का असर आगे के दो वर्षों तक दिखता है। आर्थिक तंगहाली बनी रहती है। पिछले वर्ष धान की बेहतरीन उपज ने किसानों के हौसले बढ़ा दिए थे, लेकिन इस बार जिस तरह से सूखा चपेट कर रहा है किसान असहाय हो गए हैं। वैसे तो कृषि विभाग के पास धान समेत खरीफ की खेती के तीन लाख किसान रजिस्टर्ड हैं, लेकिन बाहर इनकी संख्या और भी अधिक है। सभी की जीविका कृषि के आय पर ही निर्भर है। अगर सूखा पड़ गया तो अधिकतर किसान सड़क पर आ जाएंगे।
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पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष जून में बारिश का रिकार्ड बहुत कम रहा है। 2017 में 62.21 मिमी की बारिश से किसानों के चेहरे खिल गए थे। इसके बाद जुलाई में भी जमकर 90.87 मिमी बरसात हुई। इतनी अच्छी बारिश के बाद किसानों ने समय से खेती का काम संपन्न कर लिया था। इस बार जून और जुलाई दोनों महीनों ने किसानों को बारिश के मामले में धोखा दे दिया है। अभी भी मानसून की बेरुखी चल रही है। बादलों की लुकाछिपी का खेल चल रहा है। धान, अरहर, मक्का, बाजरा, उर्द, मूंग आदि की खेती में हो रही देरी किसानों को मरणासन्न कर दे रही है। खास बात यह है कि एक बार खराब खेती और पैदावार कम होने का असर आगे के दो वर्षों तक दिखता है। आर्थिक तंगहाली बनी रहती है। पिछले वर्ष धान की बेहतरीन उपज ने किसानों के हौसले बढ़ा दिए थे, लेकिन इस बार जिस तरह से सूखा चपेट कर रहा है किसान असहाय हो गए हैं। वैसे तो कृषि विभाग के पास धान समेत खरीफ की खेती के तीन लाख किसान रजिस्टर्ड हैं, लेकिन बाहर इनकी संख्या और भी अधिक है। सभी की जीविका कृषि के आय पर ही निर्भर है। अगर सूखा पड़ गया तो अधिकतर किसान सड़क पर आ जाएंगे।
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