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43 घंटे बाद भी नहीं शुरू हुई बिजली आपूर्ति
Updated Mon, 31 Jul 2017 11:23 PM IST
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सुहवल (गाजीपुर)। जमानिया स्थित कसेरा पोखरा के पास शनिवार की देर शाम हाईटेंशन तार और खंभा टूट कर गिर गया। इस वजह से सुहवल, रेवतीपुर और ढढ़नी विद्युत उपकेंद्र से संबंधित सैकड़ों गांवों की बत्ती गुल हो गई। जिससे भीषण गर्मी में लोग परेशान रहे। बिजली न रहने से जलापूर्ति भी बाधित रही और लोग पानी के लिए भटकते रहे। रविवार को पूरे दिन लोग बिजली का इंतजार करते रहे। दूसरे दिन तीन बजे तक 44 घंटे बाद भी आपूर्ति सुचारू नहीं हो सकी है। इसे लेकर ग्रामीणों में विद्युत विभाग के प्रति गुस्सा देखने को मिला।
शनिवार की देर शाम लगभग सात बजे जमानिया कसेरा पोखरा के पास हाईंटेशन विद्युत तार टूट गया। इससे जमानिया 132 केवीए का विद्युत सब-स्टेशन से 33/11 विद्युत सब स्टेशन सुहवल, रेवतीपुर और ढढ़नी के तहत आने वाले सैंकडों गांवों की आपूर्ति ठप हो गई। लोगों ने सोचा था कि फाल्ट को दुरुस्त कर विभाग कुछ घंटे में आपूर्ति सुचारू करा देगा, लेकिन सोमवार की शाम तीन बजे तक 43 घंटा गुजरने के बाद भी लोगों को बिजली के दर्शन नहीं हो सके और भीषण गर्मी में लोग परेशान रहे। अनापूर्ति की वजह से एक तरफ जहां लोग तरह-तरह की दिक्कतों से परेशान रहे, वहीं पानी के लिए इधर-उधर की दौड़ लगाते रहे। बिजली पर आधारित कारोबार पूरी तरह से ठप रहा। बैंकों में भी काम-काज प्रभावित रहा। इसे लेकर उपभोक्ताओं में गहरी नाराजगी दिखी। लोगों का कहना था कि विभागीय अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। उनकी इसी लापरवाही का परिणाम है कि 44 घंटे बाद भी तार और खंभा को दुरुस्त नहीं किया जा सका। प्रदेश सरकार ने जिला मुख्यालय को 24, तहसील मुख्यालयों को 20 और ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटा बिजली आपूर्ति का फरमान जारी किया है, लेकिन जर्जर तार और उपकरण तथा फाल्ट को दुरुस्त कराने में अधिकारियों की लापरवाही की वजह से इस आदेश की धज्जियां उड़ रही हैं।
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शनिवार की देर शाम लगभग सात बजे जमानिया कसेरा पोखरा के पास हाईंटेशन विद्युत तार टूट गया। इससे जमानिया 132 केवीए का विद्युत सब-स्टेशन से 33/11 विद्युत सब स्टेशन सुहवल, रेवतीपुर और ढढ़नी के तहत आने वाले सैंकडों गांवों की आपूर्ति ठप हो गई। लोगों ने सोचा था कि फाल्ट को दुरुस्त कर विभाग कुछ घंटे में आपूर्ति सुचारू करा देगा, लेकिन सोमवार की शाम तीन बजे तक 43 घंटा गुजरने के बाद भी लोगों को बिजली के दर्शन नहीं हो सके और भीषण गर्मी में लोग परेशान रहे। अनापूर्ति की वजह से एक तरफ जहां लोग तरह-तरह की दिक्कतों से परेशान रहे, वहीं पानी के लिए इधर-उधर की दौड़ लगाते रहे। बिजली पर आधारित कारोबार पूरी तरह से ठप रहा। बैंकों में भी काम-काज प्रभावित रहा। इसे लेकर उपभोक्ताओं में गहरी नाराजगी दिखी। लोगों का कहना था कि विभागीय अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। उनकी इसी लापरवाही का परिणाम है कि 44 घंटे बाद भी तार और खंभा को दुरुस्त नहीं किया जा सका। प्रदेश सरकार ने जिला मुख्यालय को 24, तहसील मुख्यालयों को 20 और ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटा बिजली आपूर्ति का फरमान जारी किया है, लेकिन जर्जर तार और उपकरण तथा फाल्ट को दुरुस्त कराने में अधिकारियों की लापरवाही की वजह से इस आदेश की धज्जियां उड़ रही हैं।
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