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राम में विश्वास हो तो दूर हो जाती है संसाररूपी बाधाएं
Updated Tue, 09 Jan 2018 11:13 PM IST
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गहमर। स्थानीय गांव के यूनियन बैंक के पास नौवें और आखिरी दिन भी संगीतमय श्रीराम कथा ज्ञानयज्ञ जारी रहा। इस मौके पर प्रवचन करते हुए कथा वाचक संध्या देवी कहा कि रावण जैसे अहंकारी को मारकर भगवान श्रीराम ने संदेश दिया कि दुनिया में चाहे कोई कितना भी बड़ा एवं बलशाली क्यों न हो, अहंकार उसका सर्वनाश कर देता है। राम राज्य का वर्णन करते हुए कहा कि यदि राम में विश्वास हो तो संसाररूपी सारी बाधाएं दूर हो जाती हैं।
सुंदर कांड के नामकरण की चर्चा करते हुए कहा की इस कांड का नाम इसलिए पड़ा, क्योंकि इसमें हनुमान जी, रामजी और सीताजी की सुंदर कथा का वर्णन किया गया है। इस कांड में 8 बार सुंदर शब्द का प्रयोग किया गया है। अंगद-रावण संवाद की कथा सुनाते हुए कहा की पूरे रावण की सेना उनके पैर को नहीं डिगा सकी और उन्होंने भगवान राम पर विश्वास को स्थापित किया। लक्ष्मण को वाण लगने की कथा सुनाते हुए कहा कि जब हनुमान जी संजीवनी बूटी लेकर लौट रहे थे तो रामजी की इच्छा से हनुमान जी ने अयोध्या की माटी माथे पर लगाने और वहा का हालचाल लेने के लिए भरत जी के वाण के माध्यम से अयोध्या भेजा था। हनुमान जी को इस बात का अभिमान रहा कि वे संजीवनी बूटी ला रहे है न ही वे अयोध्या वालों का प्रताप दिखना चाहते थे। इधर हनुमान जी की प्रतीक्षा में व्याकुल हो रहे रामजी को हनुमान जी के पहुंचने पर संतोष हुआ। लक्ष्मण की मूर्छा दूर हुई और राम-रावण युद्ध हुआ। रामजी ने विभीषण के कहने पर एक साथ 30 वाण छोड़े और रावण की नाभि, समस्त सिर और सभी भुजाएं काट दिए, जो मंदोदरी के सामने गिरी। रावण पर राम की विजय हुई।
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सुंदर कांड के नामकरण की चर्चा करते हुए कहा की इस कांड का नाम इसलिए पड़ा, क्योंकि इसमें हनुमान जी, रामजी और सीताजी की सुंदर कथा का वर्णन किया गया है। इस कांड में 8 बार सुंदर शब्द का प्रयोग किया गया है। अंगद-रावण संवाद की कथा सुनाते हुए कहा की पूरे रावण की सेना उनके पैर को नहीं डिगा सकी और उन्होंने भगवान राम पर विश्वास को स्थापित किया। लक्ष्मण को वाण लगने की कथा सुनाते हुए कहा कि जब हनुमान जी संजीवनी बूटी लेकर लौट रहे थे तो रामजी की इच्छा से हनुमान जी ने अयोध्या की माटी माथे पर लगाने और वहा का हालचाल लेने के लिए भरत जी के वाण के माध्यम से अयोध्या भेजा था। हनुमान जी को इस बात का अभिमान रहा कि वे संजीवनी बूटी ला रहे है न ही वे अयोध्या वालों का प्रताप दिखना चाहते थे। इधर हनुमान जी की प्रतीक्षा में व्याकुल हो रहे रामजी को हनुमान जी के पहुंचने पर संतोष हुआ। लक्ष्मण की मूर्छा दूर हुई और राम-रावण युद्ध हुआ। रामजी ने विभीषण के कहने पर एक साथ 30 वाण छोड़े और रावण की नाभि, समस्त सिर और सभी भुजाएं काट दिए, जो मंदोदरी के सामने गिरी। रावण पर राम की विजय हुई।
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