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ढंक सके ना एक टुकड़ा लाज का भी यह बड़ा आकाश लेकर क्या करेंगे
Updated Fri, 05 Jan 2018 11:01 PM IST
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सादात। मातृ-पितृ संस्मृति सेवा संस्थान ट्रस्ट की ओर से शुक्रवार को भदौरा-मौधिया गांव में श्रद्धांजलि समारोह एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। वाराणसी के एडीएम प्रोटोकाल ओमप्रकाश चौबे उर्फ ओम धीरज के पिता संकठा चौबे की दसवीं पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने उन्हें पुष्पांजलि अर्पित किया।
संयोजक कवि ओम धीरज ने दो मुक्तक सुनाकर बच्चों को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने का आह्वान किया। उन्होंने कांपता एहसास लेकर क्या करेंगे, टूटता विश्वास लेकर क्या करेंगे, ढंक सके ना एक टुकड़ा लाज का भी, यह बड़ा आकाश लेकर क्या करेंगे, सुनाकर श्रोताओं की वाहवाही बटोरी। आकाशवाणी के कलाकार लालजी यादव उर्फ झगड़ू भइया ने आजकल बड़के से छोटका तनल ह भाई से भाई क रगड़ा फनल ह तथा हास्य कवि बृजेश पाण्डेय ने अब तो कहीं आने-जाने में डर लगता है अपनी परंपरा और त्यौहार मनाने में डर लगता है, सुनाकर समाज की वास्तविक स्थिति का चित्रण किया। डा. धर्मप्रकाश मिश्र ने अपनी रचनाओं के माध्यम से जहां श्रोताओं को गुदगुदाने का काम किया वहीं उन्हें समाज के प्रति चिंतनशील भी बनाया। डा. बहादुर अली मिनाई और संचालक शैलेंद्र सिंह ने भी अपनी चुनिंदा रचनाओं के माध्यम से लोगों पर छाप छोड़ने का काम किया। इस मौके पर एडवोकेट वीरेंद्र चौबे, एडवोकेट विजय प्रकाश चौबे, डा. ओमकार चौबे, नित्यानंद चौबे, अरविंद गुप्ता, विनोद चौबे, हरिहर यादव आदि उपस्थित थे। अध्यक्षता सेवानिवृत्त शिक्षक दधीच राय एवं आगंतुकों के प्रति आभार वीरेंद्र चौबे ने व्यक्त किया। इस अवसर ओमप्रकाश चौबे ने गरीबों एव असहायों को कंबल वितरित किया।
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संयोजक कवि ओम धीरज ने दो मुक्तक सुनाकर बच्चों को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने का आह्वान किया। उन्होंने कांपता एहसास लेकर क्या करेंगे, टूटता विश्वास लेकर क्या करेंगे, ढंक सके ना एक टुकड़ा लाज का भी, यह बड़ा आकाश लेकर क्या करेंगे, सुनाकर श्रोताओं की वाहवाही बटोरी। आकाशवाणी के कलाकार लालजी यादव उर्फ झगड़ू भइया ने आजकल बड़के से छोटका तनल ह भाई से भाई क रगड़ा फनल ह तथा हास्य कवि बृजेश पाण्डेय ने अब तो कहीं आने-जाने में डर लगता है अपनी परंपरा और त्यौहार मनाने में डर लगता है, सुनाकर समाज की वास्तविक स्थिति का चित्रण किया। डा. धर्मप्रकाश मिश्र ने अपनी रचनाओं के माध्यम से जहां श्रोताओं को गुदगुदाने का काम किया वहीं उन्हें समाज के प्रति चिंतनशील भी बनाया। डा. बहादुर अली मिनाई और संचालक शैलेंद्र सिंह ने भी अपनी चुनिंदा रचनाओं के माध्यम से लोगों पर छाप छोड़ने का काम किया। इस मौके पर एडवोकेट वीरेंद्र चौबे, एडवोकेट विजय प्रकाश चौबे, डा. ओमकार चौबे, नित्यानंद चौबे, अरविंद गुप्ता, विनोद चौबे, हरिहर यादव आदि उपस्थित थे। अध्यक्षता सेवानिवृत्त शिक्षक दधीच राय एवं आगंतुकों के प्रति आभार वीरेंद्र चौबे ने व्यक्त किया। इस अवसर ओमप्रकाश चौबे ने गरीबों एव असहायों को कंबल वितरित किया।
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