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डॉ. कामिल बुल्के सम्मान से नवाजे गए साहित्यकार रविनंदन
Updated Mon, 12 Nov 2018 11:37 PM IST
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जमानिया(गाजीपुर)। क्षेत्र के बरुइन गांव में जन्मे साहित्यकार रविनंदन सिंह को साहित्यिक संस्था समन्वय के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में फादर डॉ. कामिल बुल्के सम्मान से रविवार को इलाहाबाद में नवाजा गया। इससे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गयी।
साहित्यकार रविनंदन सिंह ने बताया कि यह सम्मान उन्हें पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी, हाइकोर्ट इलाहाबाद के न्यायमूर्ति अशोक कुमार, न्यायमूर्ति सुधीर नारायण तथा राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेंद्र प्रसाद द्वारा प्रदान किया गया। मालूम हो कि साहित्यकार रविनंदन को उनकी साहित्यिक रचना धर्मिता के लिए पूर्व में भी कई सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। इसमें उप्र. हिंदी संस्थान का आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी सम्मान, उप्र. हिंदी संस्थान का डा. धीरेंद्र वर्मा सम्मान, उप्र. हिंदी संस्थान का नरेश मेहता सम्मान, संचेतना का सर्वेश्वर दयाल सक्सेना सम्मान, साहित्य शिरोमणि सारस्वत सम्मान तथा अन्य महत्वपूर्ण संस्थाओं के सम्मान सम्मिलित हैं। श्री सिंह के अब तक चार कविता संग्रह, भाषा एवं आलोचना पर केंद्रित सात पुस्तकें, एक यात्रा संस्मरण तथा बारह संपादित संदर्भ-ग्रंथ प्रकाशित हो चुके हैं। वर्तमान में वह लोक सेवा आयोग में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के पद पर आसीन हैं तथा हिंदुस्तानी शोध त्रैमासिक पत्रिका का संपादन कर रहे हैं।
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साहित्यकार रविनंदन सिंह ने बताया कि यह सम्मान उन्हें पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी, हाइकोर्ट इलाहाबाद के न्यायमूर्ति अशोक कुमार, न्यायमूर्ति सुधीर नारायण तथा राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेंद्र प्रसाद द्वारा प्रदान किया गया। मालूम हो कि साहित्यकार रविनंदन को उनकी साहित्यिक रचना धर्मिता के लिए पूर्व में भी कई सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। इसमें उप्र. हिंदी संस्थान का आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी सम्मान, उप्र. हिंदी संस्थान का डा. धीरेंद्र वर्मा सम्मान, उप्र. हिंदी संस्थान का नरेश मेहता सम्मान, संचेतना का सर्वेश्वर दयाल सक्सेना सम्मान, साहित्य शिरोमणि सारस्वत सम्मान तथा अन्य महत्वपूर्ण संस्थाओं के सम्मान सम्मिलित हैं। श्री सिंह के अब तक चार कविता संग्रह, भाषा एवं आलोचना पर केंद्रित सात पुस्तकें, एक यात्रा संस्मरण तथा बारह संपादित संदर्भ-ग्रंथ प्रकाशित हो चुके हैं। वर्तमान में वह लोक सेवा आयोग में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के पद पर आसीन हैं तथा हिंदुस्तानी शोध त्रैमासिक पत्रिका का संपादन कर रहे हैं।
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