...तो थोड़ी प्यास घटाओ!

Ghaziabad Updated Sun, 13 May 2012 12:00 PM IST
505 एमएलडी पानी की शहर को जरूरत
400 एमएलडी पानी उपलब्ध कराता है नगर निगम
950 एमएलडी पानी कीजनपद को जरूरत
720 एमएलडी पानी ही है उपलब्ध

एक तो गर्मी के तेवर और उस पर बिजली-पानी का सितम। दिनचर्या ऐसी हो गई है कि न दिन को चैन मिलता है और न रात को आराम। नतीजा घर में पति-पत्नी के बीच खिटपिट और कार्यालय में मूड डिस्टर्ब। गर्मी इतनी बढ़ गई है कि जरा-जरा सी बात पर लोग आपा खोने लगे हैं। यदि किसी तरह सबकुछ ठीक रहा तो ट्रैफिक टेंशन। परेशानी इतनी ही नहीं है आजकल धूल भरी आंधी भी लोगों का जीना दुश्वार कर रही है। लब्बोलुआब यह है कि बिजली-पानी और बैरन गर्मी ने लोगों को त्रस्त कर रखा है।


गाजियाबाद । कविनगर ब्लॉक-सी के रहने वाले रौनक त्यागी (नाम परिवर्तित) ने सुबह उठते ही अपने छह साल के बेटे को थप्पड़ रसीद कर दिया। बीवी ने रोका तो चिल्ला पड़े। बेटे की गलती इतनी भर थी कि पिता के दो बार कहने के बावजूद वह बिस्तर से नहीं उठा। ये किस्सा सिर्फ एक रौनक का नहीं बल्कि रोज कुछ ऐसा ही होने लगा है। शांत स्वभाव के लोग भी चिड़चिड़े हो चले हैं। सारी हाय हाय गर्मी ने मचा रखी है। रात भर बिजली नहीं रही। नींद पूरी नहीं हुई और भोर चिड़चिड़ाहट लेकर आई। बेवजह और जरा सी बात पर आपा खो रहा है। घरों का माहौल बदलता जा रहा है। बिजली के हालात ये है कि रात भर रहती नहीं, सुबह चार बजे आती है। इंसान दो घंटे की नींद भी नहीं ले पाता कि सुबह छह बजे बिजली फिर चली जाती है। तबतक उठने और दफ्तर जाने की तैयारी करने वक्त आ जाता है। दिन भर का काम और फिर शाम को घर लौटे तो भी बिजली नहीं। झल्लाहट परिवार पर ही उतरती है। महिलाओं की हालात पुरुषाें से कहीं बुरी है। रातभर का जागरण और फिर सुबह से काम में जुट जाना। दिन में भी नींद नसीब नहीं होती। नतीजा तुनकमिजाजी से शुरू होकर झल्लाहट में तब्दील होता जाता है।


जज साहब! पानी दिलवाइये

गाजियाबाद। सोचा नहीं था ऐसा भी दिन आएगा। कोई पानी के लिए भी अदालत का दरवाजा खटखटाएगा। मगर अफसोस! लापरवाह सरकारी मशीनरी वह दिन दिखाकर ही मानी।
नगर निगम से शिकायतें करके हारे गाजियाबाद के वाशिंदों ने पानी के लिए अदालत जाने का मन बनाया है। उससे पहले एक आखिरी मौके के तौर पर नगर विकास मंत्री को पत्र लिखकर दो साल का अल्टीमेटम दिया है। महानगर की पेयजल किल्लत किसी से छुपी नहीं है। जल निगम और नगर निगम जिले की मांग पूरी करने में हाथ खड़े कर चुके हैं। अव्वल तो निगम का पानी पीने लायक ही नहीं है और कोई पीता भी है तो सीधे अस्पताल पहुंच जाता है। फेल होते नमूने इसकी नजीर हैं।
हमको तो गंगाजल मांगता ः निगम के फेल होते नमूनों से परेशान लोग सिर्फ गंगाजल की मांग करते हैं। महानगर की ज्यादातर कालोनियां मांग कर रही हैं कि उन्हें गंगाजल उपलब्ध कराया जाए।


आजम को लिखा पत्र
कविनगर रेजीडेंट्स फेडरेशन ने नगर विकास मंत्री आजम खां को पत्र लिखकर इस समस्या के समाधान भी सुझाए हैं। अध्यक्ष हंसराज सिंघल ने बताया कि पानी उपलब्ध कराने के लिए निकाय, प्रशासन और शासन को 26 जनवरी 2014 तक का अंतिम समय दिया है। साथ ही चेतावनी भी दी है कि यदि हल नहीं निकला तो कोर्ट से गुहार लगाएंगे।
बन रही है योजना
शासन से जल्द ही कई योजनाएं और मिलने वाली हैं। 2021 की जनसंख्या को ध्यान में रखकर योजनाएं बन रही हैं। पानी की परेशानी नहीं रहेगी।
बाबूलाल, जीएम जलकल

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