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उत्तरी का किसान कर रहा कश्मीरी केसर की खेती
अमर उजाला ब्यूूराो
Updated Wed, 16 Mar 2016 01:35 AM IST
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बेबस हुए किसान
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क्षेत्र के उत्तरी गांव निवासी एक किसान ने जैविक खेती विधि से पहाड़ों पर ठंडे मौसम में होने वाली केसर को मैदानी क्षेत्र में उगाकर क्षेत्र में नया कीर्तिमान बनाया है।
उत्तरी गांव निवासी सीमांत किसान राजेश कुमार पुत्र बालकराम कुशवाहा ने कुछ माह पहले गांव के गंगा प्रसाद बाथम का 10 बिसवा खेत बटाई पर लिया था। वह जम्मू-कश्मीर से 10 हजार रुपये का केसर बीज लेकर आया। जिसको बताए गए वैज्ञानिक जैविक विधि से खेतों में बोया।
इसके बाद समय-समय पर जैविक खाद और अन्य संसाधनों का इस्तेमाल किया। अब उनकी केसर की फसल लगभग तैयार है। केसर की तीन वैरायटी वन, टू और थ्री ग्रेड होती हैं, जिनके दाम क्रमश: 1.25 लाख, 70 हजार और 50 हजार रुपये प्रति किलो तक है।
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राजेश ने खेत में खड़ी केसर की फसल की ग्रेडिंग कराने के लिए नमूना हैदराबाद भेजा, जो ग्रेड टू की पाई गई। वहीं, क्षेत्र के लिए केसर की खेती बिल्कुल नही पद्धति हैं इसलिए बड़ी संख्या में क्षेत्रीय लोग इसके खेती जानकारी ले रहे हैं। राजेश के अनुसार उसके खेत में प्रयोगशाला से आए आंकड़ों के अनुसार करीबन 4-5 किलो तक केसर उत्पादित होने की संभावना है। पारंपरिक खेती के सापेक्ष केसर उगाने पर करीब चार गुना अधिक लाभ उसे होगा।
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उत्तरी गांव निवासी सीमांत किसान राजेश कुमार पुत्र बालकराम कुशवाहा ने कुछ माह पहले गांव के गंगा प्रसाद बाथम का 10 बिसवा खेत बटाई पर लिया था। वह जम्मू-कश्मीर से 10 हजार रुपये का केसर बीज लेकर आया। जिसको बताए गए वैज्ञानिक जैविक विधि से खेतों में बोया।
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इसके बाद समय-समय पर जैविक खाद और अन्य संसाधनों का इस्तेमाल किया। अब उनकी केसर की फसल लगभग तैयार है। केसर की तीन वैरायटी वन, टू और थ्री ग्रेड होती हैं, जिनके दाम क्रमश: 1.25 लाख, 70 हजार और 50 हजार रुपये प्रति किलो तक है।
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राजेश ने खेत में खड़ी केसर की फसल की ग्रेडिंग कराने के लिए नमूना हैदराबाद भेजा, जो ग्रेड टू की पाई गई। वहीं, क्षेत्र के लिए केसर की खेती बिल्कुल नही पद्धति हैं इसलिए बड़ी संख्या में क्षेत्रीय लोग इसके खेती जानकारी ले रहे हैं। राजेश के अनुसार उसके खेत में प्रयोगशाला से आए आंकड़ों के अनुसार करीबन 4-5 किलो तक केसर उत्पादित होने की संभावना है। पारंपरिक खेती के सापेक्ष केसर उगाने पर करीब चार गुना अधिक लाभ उसे होगा।