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‘योग जीवन जीने की कला है’
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Tue, 15 Dec 2015 07:14 PM IST
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एके महाविद्यालय में पतंजलि योग समिति के बैनर तले बीटीसी छात्रों को योग की जानकारी समिति जिलाध्यक्ष डा. पीएस राना ने दी। छात्र-छात्राओं को अष्टांग योग, यम-नियम आसन, प्राणायाम प्रत्याहार, धारणा, ध्यान समाधि की विस्तृत व्याख्या की।
पूरक, रेचक, कुंभक, कपाल भांति, भस्त्रिका, अनुलोम- विलोम, भ्रामरी, उज्जाई, ताड़ासन, मंडूकासन, वज्रासन, शीर्षासन, हलासन आदि प्राणायाम सिखाए। डा. पीसी राना ने छात्रों कों आचरण ठीक रखने और गुरुओं का सम्मान करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि योग जीवन जीने की चिकित्सा पद्धति है। योग को जीवन में धारण करें। योग के बिना जीवन अधूरा है। योग करने से सभी प्रकार के जटिल से जटिल रोग ठीक हो जाते हैं। योग करने से बुद्धि तेज होती हैं।
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पूरक, रेचक, कुंभक, कपाल भांति, भस्त्रिका, अनुलोम- विलोम, भ्रामरी, उज्जाई, ताड़ासन, मंडूकासन, वज्रासन, शीर्षासन, हलासन आदि प्राणायाम सिखाए। डा. पीसी राना ने छात्रों कों आचरण ठीक रखने और गुरुओं का सम्मान करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि योग जीवन जीने की चिकित्सा पद्धति है। योग को जीवन में धारण करें। योग के बिना जीवन अधूरा है। योग करने से सभी प्रकार के जटिल से जटिल रोग ठीक हो जाते हैं। योग करने से बुद्धि तेज होती हैं।
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