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शरीर में कंपन न करें नजरअंदाज, यह है पार्किंसंस का लक्षण
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विश्व पार्किंसंस दिवस आज
शरीर में कंपन न करें नजरअंदाज, यह है पार्किंसंस का लक्षण
बुजुर्गों को अधिक होती है यह बीमारी, शहर में भी हैं इसके मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। सोमवार को विश्व पार्किंसंस दिवस है। हर साल 11 अप्रैल को यह दिवस मनाया जाता है। दरअसल यह एक बीमारी है। इसके कारण चलने-फिरने की गति धीमी पड़ जाती है। मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं और शरीर में कंपन की समस्या हो जाती है। विशेषज्ञ कहते हैं कि यह बीमारी अक्सर किसी एक हाथ में कंपन के साथ शुरू होती है।
चिकित्सक के अनुसार यह बीमारी पुरुष और महिला दोनों को हो सकती है। यह बीमारी बुजुर्गों को अधिक प्रभावित करती है। इसकी शुरुआत धीरे-धीरे होती है यानी पता भी नहीं चलता कि इसके लक्षण कब दिखने शुरू हुए। कई हफ्तों या महीनों के बाद जब लक्षणों की तीव्रता बढ़ जाती है, तब बीमारी का अहसास होता है।
यह बीमारी तब होती है जब मस्तिष्क के एक क्षेत्र में तंत्रिका कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं। आमतौर पर ये न्यूरॉन्स डोपामाइन नामक एक महत्वपूर्ण मस्तिष्क रसायन का उत्पादन करते हैं, लेकिन जब ये न्यूरॉन्स मर जाते हैं या क्षीण हो जाते हैं, तो वे कम डोपामाइन का उत्पादन करते हैं, जो पार्किंसंस रोग का कारण बनता है। इसमें कंपन होना प्रारंभिक लक्षण है। इस रोग को दवा से कंट्रोल किया जा सकता है, मगर पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता। हर माह 30 नए मरीज ओपीडी में आ जाते हैं।
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डॉ. निमित गुप्ता, न्यूरोसर्जन (सेवार्थ संस्थान ट्रॉमा सेंटर)
गैस से भी बढ़ जाती है रोग की संभावना
गैस गीजर के संपर्क में आने से यह रोग बढ़ जाता है। वहीं, औद्योगिक गैस भी शरीर में प्रवेश करती हैं तो लोग इस बीमारी का शिकार हो जाते हैं। धीरे-धीरे याददाश्त कमजोर होना शुरू हो जाती है।
यह हैं लक्षण
इस बीमारी के चार मुख्य लक्षण हैं : हाथ, बांह, पैर, जबड़े या सिर में कंपन। अंगों की कठोरता। अंगों की गतिविधियों का धीमा हो जाना। शरीर का संतुलन बिगड़ जाना यानी चलने-फिरने में कठिनाई होना।
केस नंबर एक
सुहागनगर निवासी सुभाषचंद्र शर्मा (60) को हाथ कंपकंपाने की परेशानी हो गई थी। इससे चलने-फिरने में दिक्कत हो गई। चिकित्सक को दिखाने पर दवाएं दीं तो आराम मिल गया।
केस नंबर दो
छिंगामल का बाग निवासी हरीमोहन बाबू अग्रवाल (65) को चलने फिरने में दिक्कत है। इसकी शुरुआत बोलते में हकलाहट और हाथ कंपकंपाने के साथ शुरू हुई। दवा लेते हैं तो आराम मिल जाता है। दवा बंद करने पर फिर से परेशानी बढ़ जाती है।
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शरीर में कंपन न करें नजरअंदाज, यह है पार्किंसंस का लक्षण
बुजुर्गों को अधिक होती है यह बीमारी, शहर में भी हैं इसके मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। सोमवार को विश्व पार्किंसंस दिवस है। हर साल 11 अप्रैल को यह दिवस मनाया जाता है। दरअसल यह एक बीमारी है। इसके कारण चलने-फिरने की गति धीमी पड़ जाती है। मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं और शरीर में कंपन की समस्या हो जाती है। विशेषज्ञ कहते हैं कि यह बीमारी अक्सर किसी एक हाथ में कंपन के साथ शुरू होती है।
चिकित्सक के अनुसार यह बीमारी पुरुष और महिला दोनों को हो सकती है। यह बीमारी बुजुर्गों को अधिक प्रभावित करती है। इसकी शुरुआत धीरे-धीरे होती है यानी पता भी नहीं चलता कि इसके लक्षण कब दिखने शुरू हुए। कई हफ्तों या महीनों के बाद जब लक्षणों की तीव्रता बढ़ जाती है, तब बीमारी का अहसास होता है।
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यह बीमारी तब होती है जब मस्तिष्क के एक क्षेत्र में तंत्रिका कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं। आमतौर पर ये न्यूरॉन्स डोपामाइन नामक एक महत्वपूर्ण मस्तिष्क रसायन का उत्पादन करते हैं, लेकिन जब ये न्यूरॉन्स मर जाते हैं या क्षीण हो जाते हैं, तो वे कम डोपामाइन का उत्पादन करते हैं, जो पार्किंसंस रोग का कारण बनता है। इसमें कंपन होना प्रारंभिक लक्षण है। इस रोग को दवा से कंट्रोल किया जा सकता है, मगर पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता। हर माह 30 नए मरीज ओपीडी में आ जाते हैं।
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डॉ. निमित गुप्ता, न्यूरोसर्जन (सेवार्थ संस्थान ट्रॉमा सेंटर)
गैस से भी बढ़ जाती है रोग की संभावना
गैस गीजर के संपर्क में आने से यह रोग बढ़ जाता है। वहीं, औद्योगिक गैस भी शरीर में प्रवेश करती हैं तो लोग इस बीमारी का शिकार हो जाते हैं। धीरे-धीरे याददाश्त कमजोर होना शुरू हो जाती है।
यह हैं लक्षण
इस बीमारी के चार मुख्य लक्षण हैं : हाथ, बांह, पैर, जबड़े या सिर में कंपन। अंगों की कठोरता। अंगों की गतिविधियों का धीमा हो जाना। शरीर का संतुलन बिगड़ जाना यानी चलने-फिरने में कठिनाई होना।
केस नंबर एक
सुहागनगर निवासी सुभाषचंद्र शर्मा (60) को हाथ कंपकंपाने की परेशानी हो गई थी। इससे चलने-फिरने में दिक्कत हो गई। चिकित्सक को दिखाने पर दवाएं दीं तो आराम मिल गया।
केस नंबर दो
छिंगामल का बाग निवासी हरीमोहन बाबू अग्रवाल (65) को चलने फिरने में दिक्कत है। इसकी शुरुआत बोलते में हकलाहट और हाथ कंपकंपाने के साथ शुरू हुई। दवा लेते हैं तो आराम मिल जाता है। दवा बंद करने पर फिर से परेशानी बढ़ जाती है।