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Firozabad News: यमुना में दो फीट और बढ़ा पानी, फसलें डूबीं
Wed, 20 Aug 2025 07:06 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Wed, 20 Aug 2025 07:06 PM IST
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02, टूंडला में बाढ़ में डूबी बाजरा की फसल को नाव में रखकर लाते लोगसंवाद
मथुरा में बाढ़ के हालात से टूंडला के किसान चिंतित, कच्ची फसल काटकर पशुओं को खिलाने को मजबूर
संवाद न्यूज एजेंसी
टूंडला। यमुना नदी में लगातार बढ़ रहे जलस्तर से किसानों की चिंता बढ़ गई है, खासकर जब मथुरा में बाढ़ जैसे हालात हैं। बुधवार को यमुना का पानी करीब दो फीट और बढ़ गया, जिससे यमुना के खादर (नदी के किनारे की निचली ज़मीन) में खड़ी बाजरा और सब्ज़ियों की फ़सलें पानी में डूब गईं। अपनी फसलों को डूबता देख किसान उन्हें काटकर पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल करने को मजबूर हैं।
हथिनीकुंड बैराज और अन्य बैराजों से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण यमुना उफान पर है। तटीय गांवों के किसानों ने बताया कि रात भर में पानी का स्तर तेज़ी से बढ़ा है, जिससे उनकी सब्ज़ियां जैसे तोरई, लौकी, परमल, काशीफल और फसलें जैसे बाजरा, मक्का और ज्वार बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। कई किसानों के पंपसेट भी पानी में डूब गए हैं।
रुधऊ मुस्तकिल, नगला केसों, अनवारा, जटपुरा, रसूलाबाद, बालमपुर बजहेरा, ठार रामगढ़, नगला काले, कुतकपुर साहब, ग्वारई, नगला राजपति, नगला गाढ़े, नियामतपुर, ठार डेका और नगला मूसटा जैसे गाँवों के किसान सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं।
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किसानों का दर्द
मैंने 10 बीघा बाजरा और 8 बीघा धनिया के साथ अन्य फ़सलें लगाई थीं। फसल अच्छी थी, लेकिन बाढ़ से सब नष्ट हो गई। हमें प्रशासन से मुआवजे की उम्मीद है।
जोमदार सिंह, किसान, रसूलाबाद
मेरी 4 बीघा घनी, 3 बीघा तोरई और 8 बीघा बाजरा की फसलें पानी में बह गईं। इस साल फसल बहुत अच्छी थी, लेकिन अब सब खत्म हो गया।
बुद्ध सिंह, किसान, रसूलाबाद
टूंडला में अभी बाढ़ जैसे हालात नहीं
उपजिलाधिकारी अनुराधा सिंह ने बताया कि टूंडला क्षेत्र में अभी बाढ़ जैसे हालात नहीं हैं, लेकिन लेखपालों और प्रधानों को यमुना के बढ़ते जलस्तर पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, किसानों को नदी में नाव न डालने और पशुओं को यमुना से दूर रखने की सलाह दी गई है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
टूंडला। यमुना नदी में लगातार बढ़ रहे जलस्तर से किसानों की चिंता बढ़ गई है, खासकर जब मथुरा में बाढ़ जैसे हालात हैं। बुधवार को यमुना का पानी करीब दो फीट और बढ़ गया, जिससे यमुना के खादर (नदी के किनारे की निचली ज़मीन) में खड़ी बाजरा और सब्ज़ियों की फ़सलें पानी में डूब गईं। अपनी फसलों को डूबता देख किसान उन्हें काटकर पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल करने को मजबूर हैं।
हथिनीकुंड बैराज और अन्य बैराजों से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण यमुना उफान पर है। तटीय गांवों के किसानों ने बताया कि रात भर में पानी का स्तर तेज़ी से बढ़ा है, जिससे उनकी सब्ज़ियां जैसे तोरई, लौकी, परमल, काशीफल और फसलें जैसे बाजरा, मक्का और ज्वार बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। कई किसानों के पंपसेट भी पानी में डूब गए हैं।
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रुधऊ मुस्तकिल, नगला केसों, अनवारा, जटपुरा, रसूलाबाद, बालमपुर बजहेरा, ठार रामगढ़, नगला काले, कुतकपुर साहब, ग्वारई, नगला राजपति, नगला गाढ़े, नियामतपुर, ठार डेका और नगला मूसटा जैसे गाँवों के किसान सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं।
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किसानों का दर्द
मैंने 10 बीघा बाजरा और 8 बीघा धनिया के साथ अन्य फ़सलें लगाई थीं। फसल अच्छी थी, लेकिन बाढ़ से सब नष्ट हो गई। हमें प्रशासन से मुआवजे की उम्मीद है।
जोमदार सिंह, किसान, रसूलाबाद
मेरी 4 बीघा घनी, 3 बीघा तोरई और 8 बीघा बाजरा की फसलें पानी में बह गईं। इस साल फसल बहुत अच्छी थी, लेकिन अब सब खत्म हो गया।
बुद्ध सिंह, किसान, रसूलाबाद
टूंडला में अभी बाढ़ जैसे हालात नहीं
उपजिलाधिकारी अनुराधा सिंह ने बताया कि टूंडला क्षेत्र में अभी बाढ़ जैसे हालात नहीं हैं, लेकिन लेखपालों और प्रधानों को यमुना के बढ़ते जलस्तर पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, किसानों को नदी में नाव न डालने और पशुओं को यमुना से दूर रखने की सलाह दी गई है।