{"_id":"61e31a79e68e7953ed7949d4","slug":"voting-will-not-take-place-on-promises-people-s-representatives-will-have-to-work-firozabad-news-agr5213788175","type":"story","status":"publish","title_hn":"वादों पर न होगा मतदान, जनप्रतिनिधियों को करना पड़ेगा काम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वादों पर न होगा मतदान, जनप्रतिनिधियों को करना पड़ेगा काम
विज्ञापन
वादों पर न होगा मतदान, जनप्रतिनिधियों को करना पड़ेगा काम
फिरोजाबाद। सुहागनगरी के नाम से विख्यात फिरोजाबाद सदर सीट की खुद की पहचान है। इस सीट से सबसे ज्यादा चार बार विधानसभा जाने का मौका रघुवर दयाल वर्मा को मिला था। इस सीट का प्रतिनिधित्व पांच बार मुस्लिम प्रत्याशियों ने भी किया है। विधानसभा क्षेत्र में ओबीसी व मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अच्छी खासी है। पिछले चार चुनावों की बात करें तो दो बार भाजपा, एक बार बसपा, एक बार सपा ने जीत दर्ज की है। शहर के प्रबुद्ध वर्ग के लोगों का कहना है कि अब वादों पर मतदान नहीं होगा। जनप्रतिनिधियों को सड़क पर उतरकर काम करना पड़ेगा।
फिरोजाबाद सदर सीट पर पहली बार 1957 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जगन्नाथ लहरी ने जीत हासिल की थी। इसके बाद 1962 के चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के भगवान दास जीते। वर्ष 1967 व 1969 में निर्दलीय प्रत्याशी राजाराम ने जीत दर्ज की। वर्ष 1974 में मुस्लिम लीग से मोहम्मद अयूब ने लोगों का विश्वास जीता। वर्ष 1977 में जनता पार्टी के रघुवर दयाल वर्मा ने जीत दर्ज की। वर्ष 1980 में कांग्रेस पार्टी से गुलाब नबी जीते। वर्ष 1985 में रघुवर दयाल वर्मा ने जनता पार्टी व 1989 में जनता दल के टिकट पर जीत दर्ज की। इस सीट पर भाजपा को पहली जीत वर्ष 1991 में राम किशन ददाजू के रूप में मिली। लेकिन दो वर्ष बाद सरकार गिरने पर दोबारा चुनाव हुए। वर्ष 1993 में सपा के शेख नसीरुद्दीन, वर्ष 1996 में सोशल एक्शन पार्टी से रघुवर दयाल वर्मा ने चौथी बार विधानसभा जाने का मौका मिला। पिछले चार चुनाव की बात करें तो वर्ष 2002 में सपा से अजीम भाई, वर्ष 2007 में बसपा से शेख नसीरुद्दीन ने जीत हासिल की। वहीं वर्ष 2012 व 2017 में भाजपा प्रत्याशी के रूप में मनीष असीजा विधानसभा पहुंचे।
2012 और 2017 के चुनावी आंकड़े
2012 में मनीष असीजा सदर सीट पर चुनाव जीतकर पहली बार विधायक बने। उन्होंने समाजवादी पार्टी के अजीम भाई को चुनाव में शिकस्त दी थी। मनीष असीजा को 74,878 और अजीम को 72,863 वोट मिले थे। वहीं वर्ष 2017 में मनीष असीजा ने दूसरी बार जीत दर्ज की। उन्हें 1,02,654 वोट मिले। दूसरे नंबर पर सपा प्रत्याशी अजीम भाई को 60,927 वोट ही मिले।
विज्ञापन
सीट का जातिगत समीकरण
मुस्लिम- 1.25 लाख
वैश्य- 80 हजार
ब्राह्मण- 35 हजार
शंखवार- 40 हजार
राठौर- 35 हजार
जाटव- 32 हजार
यादव- 20 हजार
कुशवाहा, प्रजापति, सविता- 30 हजार
अन्य जाति- 25 हजार
( सभी आंकड़े अनुमानित है)
................
फिरोजाबाद सीट के कुल मतदाता- 4,20,771
पुरुष मतदाता- 2, 26,181
महिला मतदाता- 1,94,543
थर्ड जेंडर- 47
................
बातचीत........
समस्याओं की लंबी फेहरिस्त
आज भी रेलवे स्टेशन पर प्रमुख गाड़ियों का ठहराव नहीं है। बस स्टैंड का अपना डिपो तक नहीं है। बस के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। सीवर लाइन में 200 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी अभी तक शुरू नहीं हो सकी है। -अनूप चंद्र जैन, वरिष्ठ अधिवक्ता
स्वास्थ्य सेवा में और हो सुधार
शहर की बढ़ी आबादी के हिसाब से पार्कों की व्यवस्था और होनी चाहिए। स्वास्थ्य सेवाओं में और सुधार की जरूरत है। हालांकि मेडिकल कॉलेज बनने से राहत मिली है। कुछ व्यवस्थाएं सुधरी हैं। -रामस्नेही लाल शर्मा, यायावार, शिक्षाविद्
नहीं होती सुनवाई
सरकारी विभागों में भी आमजन की सुनवाई नहीं होती। इस तरफ जनप्रतिनिधियों को ध्यान देना चाहिए। आज तक किसी भी जनप्रतिनिधि ने जाम की समस्या से निजात नहीं दिलाई है। इसके लिए प्लान बने। -बीएस गुप्ता, व्यापारी नेता
विकास कार्य कराए
10 सालों में सबसे बड़ा काम मेडिकल कॉलेज की स्थापना, डायलिसिस की सुविधा दिलाना, सिटी स्कैन मशीन, खुद का ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट लगवाने के साथ शहर के विकास के लिए यमुना में एसपीएस का निर्माण कराना, नालों में टेपिंग कराना, 204 करोड़ से एसटीपी का निर्माण, जेड़ाझाल से पानी लाकर खारे पानी की समस्या का समाधान कराया। जरौली से मक्खनपुर तक नया बाईपास चार सौ करोड़ की लागत से बनाया। तीन फुट ओवरब्रिज भी बनवाए गए। जाम की समस्या से लोगों को निजात मिले इसके लिए काम चल रहा है। -मनीष असीजा, सदर विधायक
विज्ञापन
फिरोजाबाद। सुहागनगरी के नाम से विख्यात फिरोजाबाद सदर सीट की खुद की पहचान है। इस सीट से सबसे ज्यादा चार बार विधानसभा जाने का मौका रघुवर दयाल वर्मा को मिला था। इस सीट का प्रतिनिधित्व पांच बार मुस्लिम प्रत्याशियों ने भी किया है। विधानसभा क्षेत्र में ओबीसी व मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अच्छी खासी है। पिछले चार चुनावों की बात करें तो दो बार भाजपा, एक बार बसपा, एक बार सपा ने जीत दर्ज की है। शहर के प्रबुद्ध वर्ग के लोगों का कहना है कि अब वादों पर मतदान नहीं होगा। जनप्रतिनिधियों को सड़क पर उतरकर काम करना पड़ेगा।
फिरोजाबाद सदर सीट पर पहली बार 1957 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जगन्नाथ लहरी ने जीत हासिल की थी। इसके बाद 1962 के चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के भगवान दास जीते। वर्ष 1967 व 1969 में निर्दलीय प्रत्याशी राजाराम ने जीत दर्ज की। वर्ष 1974 में मुस्लिम लीग से मोहम्मद अयूब ने लोगों का विश्वास जीता। वर्ष 1977 में जनता पार्टी के रघुवर दयाल वर्मा ने जीत दर्ज की। वर्ष 1980 में कांग्रेस पार्टी से गुलाब नबी जीते। वर्ष 1985 में रघुवर दयाल वर्मा ने जनता पार्टी व 1989 में जनता दल के टिकट पर जीत दर्ज की। इस सीट पर भाजपा को पहली जीत वर्ष 1991 में राम किशन ददाजू के रूप में मिली। लेकिन दो वर्ष बाद सरकार गिरने पर दोबारा चुनाव हुए। वर्ष 1993 में सपा के शेख नसीरुद्दीन, वर्ष 1996 में सोशल एक्शन पार्टी से रघुवर दयाल वर्मा ने चौथी बार विधानसभा जाने का मौका मिला। पिछले चार चुनाव की बात करें तो वर्ष 2002 में सपा से अजीम भाई, वर्ष 2007 में बसपा से शेख नसीरुद्दीन ने जीत हासिल की। वहीं वर्ष 2012 व 2017 में भाजपा प्रत्याशी के रूप में मनीष असीजा विधानसभा पहुंचे।
विज्ञापन
2012 और 2017 के चुनावी आंकड़े
2012 में मनीष असीजा सदर सीट पर चुनाव जीतकर पहली बार विधायक बने। उन्होंने समाजवादी पार्टी के अजीम भाई को चुनाव में शिकस्त दी थी। मनीष असीजा को 74,878 और अजीम को 72,863 वोट मिले थे। वहीं वर्ष 2017 में मनीष असीजा ने दूसरी बार जीत दर्ज की। उन्हें 1,02,654 वोट मिले। दूसरे नंबर पर सपा प्रत्याशी अजीम भाई को 60,927 वोट ही मिले।
विज्ञापन
सीट का जातिगत समीकरण
मुस्लिम- 1.25 लाख
वैश्य- 80 हजार
ब्राह्मण- 35 हजार
शंखवार- 40 हजार
राठौर- 35 हजार
जाटव- 32 हजार
यादव- 20 हजार
कुशवाहा, प्रजापति, सविता- 30 हजार
अन्य जाति- 25 हजार
( सभी आंकड़े अनुमानित है)
................
फिरोजाबाद सीट के कुल मतदाता- 4,20,771
पुरुष मतदाता- 2, 26,181
महिला मतदाता- 1,94,543
थर्ड जेंडर- 47
................
बातचीत........
समस्याओं की लंबी फेहरिस्त
आज भी रेलवे स्टेशन पर प्रमुख गाड़ियों का ठहराव नहीं है। बस स्टैंड का अपना डिपो तक नहीं है। बस के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। सीवर लाइन में 200 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी अभी तक शुरू नहीं हो सकी है। -अनूप चंद्र जैन, वरिष्ठ अधिवक्ता
स्वास्थ्य सेवा में और हो सुधार
शहर की बढ़ी आबादी के हिसाब से पार्कों की व्यवस्था और होनी चाहिए। स्वास्थ्य सेवाओं में और सुधार की जरूरत है। हालांकि मेडिकल कॉलेज बनने से राहत मिली है। कुछ व्यवस्थाएं सुधरी हैं। -रामस्नेही लाल शर्मा, यायावार, शिक्षाविद्
नहीं होती सुनवाई
सरकारी विभागों में भी आमजन की सुनवाई नहीं होती। इस तरफ जनप्रतिनिधियों को ध्यान देना चाहिए। आज तक किसी भी जनप्रतिनिधि ने जाम की समस्या से निजात नहीं दिलाई है। इसके लिए प्लान बने। -बीएस गुप्ता, व्यापारी नेता
विकास कार्य कराए
10 सालों में सबसे बड़ा काम मेडिकल कॉलेज की स्थापना, डायलिसिस की सुविधा दिलाना, सिटी स्कैन मशीन, खुद का ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट लगवाने के साथ शहर के विकास के लिए यमुना में एसपीएस का निर्माण कराना, नालों में टेपिंग कराना, 204 करोड़ से एसटीपी का निर्माण, जेड़ाझाल से पानी लाकर खारे पानी की समस्या का समाधान कराया। जरौली से मक्खनपुर तक नया बाईपास चार सौ करोड़ की लागत से बनाया। तीन फुट ओवरब्रिज भी बनवाए गए। जाम की समस्या से लोगों को निजात मिले इसके लिए काम चल रहा है। -मनीष असीजा, सदर विधायक