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उर्स में उमड़े जायरीन
ब्यूरो अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Sun, 03 Jan 2016 10:07 PM IST
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यमुना किनारे स्थित हजरत शाह सूफी रहमतुउल्ला अलैह के 796 उर्स के दूसरे दिन यानी रविवार को अकीदतमंदों की भारी भीड़ उमड़ी। भीड़ इतनी थी कि चंद्रवार गेट रेलवे पुल से लेकर छोटी घटिया तक सुबह से शाम तक जाम लगा रहा।
करीब दो बजे सांसद अक्षय यादव, सपा जिलाध्यक्ष डा. दिलीप यादव, शिकोहाबाद विधायक ओमप्रकाश वर्मा, जिला पंचायत के भावी अध्यक्ष विजय प्रताप उर्फ छोटू, उर्स के प्रशासक मोहम्मद शमीम, एसडीएम सदर रवींद्र मादंड के साथ दरगाह शरीफ पर चादर चढ़ाने पहुंचे। एसडीएम सदर ने उनका पगड़ी पहनाकर स्वागत किया। मेला प्रशासक की ओर से इस्तकबाल किया गया। इस मौके पर पूर्व जिलाध्यक्ष रामसेवक यादव, राजकुमार राठौर, बंटू कठेरिया, शमशाद बाबा, योगेश गर्ग,नीतेश अग्रवाल जैन, आदर्श यादव धन्नू आदि मौजूद रहे।
गुंबद-ए-खजरा से हटती नहीं नजरें मेरी
काश मैं शहर-ए-मदीने का कबूतर होता...
शनिवार की देर रात को नातिया मुशायरे का आयोजन किया। मुशायरे का आगाज डा. शमीम अहमद खां और सूफी जमील अफगानी ने शमा जलाकर किया। निजामत इरफान साहिल ने की। मोहसिन अब्बास ने ‘गुंबद-ए-खजरा से हटती नहीं नजरें मेरी, काश मैं शहर-ए-मदीने का कबूतर होता।’ जीरो बांदवी ने ‘अब मदीना करीब है शायद, नीम में जायका खजूर का है।’ कलीम नूरी ने ‘जब भी नाम-ए-रसूल आया है, खुशबुओं ने भी सिर झुकाया है।’ असलम अदीब ने ‘ये आंखें गुंबद-ए-खजरा का फिर करें दीदार, फिर मुझे खाके मदीना नसीब हो जाए।’ अरमान वारसी ने कहा कि ‘जिससे मिले हुसैन, रसूल उसको मिल गए, जिसको रसूल मिल गए, उसको खुदा मिला।’ मंजर नवाब ने ‘अंधेरों में नहीं डरते ये दीवाने मुहम्मद के, सदा सच्चाई पर चलते है परवाने मोहम्मद के।’ आदि कलाम पेश किया। हादी जावेद, इरफान साहिल एवं हाफिज आदिल ने भी कलाम पेश किया। हाजी अरमान, डा. साबिर नियाजी, अनवर अमान, हसनैन वारसी, पैकार फीरोजाबादी ने कलामों को खूब सराहा। मुशायरे की कामयाबी के लिए मेला प्रशासक और मुशायरा संयोजक मेला प्रशासक शमीम अहमद सभी का शुक्रिया अदा किया। मुशायरे में अहमद मंजर, मुश्ताक अहमद, मुसद्दक हुसैन आदि मौजूद रहे।
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संस्थाओं ने लगाए कैंप
दरगाह शरीफ पर आने वाले जायरीनों की सुविधा के लिए कई संस्थाओं ने कैंप लगाए। अंजुमन इत्तेहादुल अकवाम एवं मेला प्रशासक की ओर से खोया-पाया शिविर लगाया गया। असलम भोला, मुसद्दक आदि द्वारा खोए बच्चों की सूचनाओं को एकत्रित किया जा रहा था।
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करीब दो बजे सांसद अक्षय यादव, सपा जिलाध्यक्ष डा. दिलीप यादव, शिकोहाबाद विधायक ओमप्रकाश वर्मा, जिला पंचायत के भावी अध्यक्ष विजय प्रताप उर्फ छोटू, उर्स के प्रशासक मोहम्मद शमीम, एसडीएम सदर रवींद्र मादंड के साथ दरगाह शरीफ पर चादर चढ़ाने पहुंचे। एसडीएम सदर ने उनका पगड़ी पहनाकर स्वागत किया। मेला प्रशासक की ओर से इस्तकबाल किया गया। इस मौके पर पूर्व जिलाध्यक्ष रामसेवक यादव, राजकुमार राठौर, बंटू कठेरिया, शमशाद बाबा, योगेश गर्ग,नीतेश अग्रवाल जैन, आदर्श यादव धन्नू आदि मौजूद रहे।
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गुंबद-ए-खजरा से हटती नहीं नजरें मेरी
काश मैं शहर-ए-मदीने का कबूतर होता...
शनिवार की देर रात को नातिया मुशायरे का आयोजन किया। मुशायरे का आगाज डा. शमीम अहमद खां और सूफी जमील अफगानी ने शमा जलाकर किया। निजामत इरफान साहिल ने की। मोहसिन अब्बास ने ‘गुंबद-ए-खजरा से हटती नहीं नजरें मेरी, काश मैं शहर-ए-मदीने का कबूतर होता।’ जीरो बांदवी ने ‘अब मदीना करीब है शायद, नीम में जायका खजूर का है।’ कलीम नूरी ने ‘जब भी नाम-ए-रसूल आया है, खुशबुओं ने भी सिर झुकाया है।’ असलम अदीब ने ‘ये आंखें गुंबद-ए-खजरा का फिर करें दीदार, फिर मुझे खाके मदीना नसीब हो जाए।’ अरमान वारसी ने कहा कि ‘जिससे मिले हुसैन, रसूल उसको मिल गए, जिसको रसूल मिल गए, उसको खुदा मिला।’ मंजर नवाब ने ‘अंधेरों में नहीं डरते ये दीवाने मुहम्मद के, सदा सच्चाई पर चलते है परवाने मोहम्मद के।’ आदि कलाम पेश किया। हादी जावेद, इरफान साहिल एवं हाफिज आदिल ने भी कलाम पेश किया। हाजी अरमान, डा. साबिर नियाजी, अनवर अमान, हसनैन वारसी, पैकार फीरोजाबादी ने कलामों को खूब सराहा। मुशायरे की कामयाबी के लिए मेला प्रशासक और मुशायरा संयोजक मेला प्रशासक शमीम अहमद सभी का शुक्रिया अदा किया। मुशायरे में अहमद मंजर, मुश्ताक अहमद, मुसद्दक हुसैन आदि मौजूद रहे।
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संस्थाओं ने लगाए कैंप
दरगाह शरीफ पर आने वाले जायरीनों की सुविधा के लिए कई संस्थाओं ने कैंप लगाए। अंजुमन इत्तेहादुल अकवाम एवं मेला प्रशासक की ओर से खोया-पाया शिविर लगाया गया। असलम भोला, मुसद्दक आदि द्वारा खोए बच्चों की सूचनाओं को एकत्रित किया जा रहा था।