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Firozabad News: मेडिकल कॉलेज में दो ऑक्सीजन प्लांट, फिर भी खरीदे जा रहे सिलिंडर
Wed, 31 Jul 2024 12:55 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Wed, 31 Jul 2024 12:55 AM IST
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फिरोजाबाद। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में दो ऑक्सीजन प्लांट हैं। लाखों रुपये खर्च करके ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना कराई थी। इसमें लिक्विड ऑक्सीजन (एलएमओ) प्लांट एक साल में मरीजों के काम नहीं आ सका। क्योंकि सभी वार्डाें में पाइप लाइन नहीं बिछाई गई है और न ही कनेक्शन दिया गया है। मरीजों को ऑक्सीजन सिलिंडर के सहारे दी जा रही है। हर माह औसतन 450 से 500 सिलिंडर में ऑक्सीजन गैस खरीदी जा रही है।
मेडिकल कॉलेज में मरीजों की संख्या ढाई से तीन गुनी हो गई है। हर दिन सड़क दुर्घटना सहित अन्य बीमारी से पीड़ित मरीज गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचते हैं। इन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत होती है। कोरोना काल में लगे एक प्लांट से सिर्फ सौ शैय्या अस्पताल में ही ऑक्सीजन दी जाती है। जबकि लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट को स्थापित हुए करीब एक साल हो गए। लेकिन, यह प्लांट मरीज को एक सांस नहीं दे सका है। बल्कि खुद वेंटिलेटर पर पड़ा है। दो प्लांट होने के बाद भी प्रबंधन की ओर से बाहर से ऑक्सीजन गैस की जंबो सिलिंडर की मदद ली जाती है। इसके लिए मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही है। विभिन्न वार्डो में भर्ती मरीजों को ऑक्सीजन गैस की आपूर्ति के लिए रोजाना लगभग 20 से 25 जंबो सिलिंडर की खरीदी की जा रही है।
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जहां जरूरी, वहां कनेक्शन नहीं
अस्पताल में कई ऐसे वार्ड हैं, जहां प्लांट से सीधे वार्ड में ऑक्सीजन गैस आपूर्ति की जरूरत है, लेकिन यहां पर आपूर्ति करने के बजाए सिलिंडर से ही काम चलाया जा रहा है। इसमें अस्पताल की डायलिसिस यूनिट, आइसोलेशन, आपातकालीन वार्ड सहित अन्य वार्ड शामिल हैं। डायलिसिसि यूनिट में 15 बिस्तर लगाए गए हैं। 30 दिन सभी बिस्तर फुल रहती है। जबकि कई मरीजों को आईसीयू से डायलिसिस के लिए यूनिट वार्ड में लाया जाता है। इस दौरान ऑक्सीजन गैस सपोर्ट के लिए सिलिंडर का उपयोग किया जाता है। लेकिन इसे बाजारू सिलिंडर से दिया जा रहा है।
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सिलिंडर रीफिल की भी व्यवस्था नहीं
करोड़ों रुपये के पीएम केयर से ऑक्सीजन गैस प्लांट तैयार किए गए हैं, लेकिन न तो वार्डों तक भी पाइप लाइन नहीं बिछाई गई है और न ही खाली सिलिंडर को रीफिल करने के लिए आवश्यक उपकरण नहीं हैं।
-अब सभी वार्डों में ऑक्सीजन सप्लाई देने के लिए पाइप लाइन बिछ़ाने का कार्य शुरू हो गया है। यह पाइपलाइन प्लांट से वार्डों को जोड़ेगी। कार्य तेज प्रगति से चल रहा है। जल्द ही इसका लाभ मरीजों को मिलना शुरू हो जाएगा।
डाॅ. नवीन जैन, सीएमएस मेडिकल कॉलेज
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मेडिकल कॉलेज में मरीजों की संख्या ढाई से तीन गुनी हो गई है। हर दिन सड़क दुर्घटना सहित अन्य बीमारी से पीड़ित मरीज गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचते हैं। इन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत होती है। कोरोना काल में लगे एक प्लांट से सिर्फ सौ शैय्या अस्पताल में ही ऑक्सीजन दी जाती है। जबकि लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट को स्थापित हुए करीब एक साल हो गए। लेकिन, यह प्लांट मरीज को एक सांस नहीं दे सका है। बल्कि खुद वेंटिलेटर पर पड़ा है। दो प्लांट होने के बाद भी प्रबंधन की ओर से बाहर से ऑक्सीजन गैस की जंबो सिलिंडर की मदद ली जाती है। इसके लिए मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही है। विभिन्न वार्डो में भर्ती मरीजों को ऑक्सीजन गैस की आपूर्ति के लिए रोजाना लगभग 20 से 25 जंबो सिलिंडर की खरीदी की जा रही है।
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जहां जरूरी, वहां कनेक्शन नहीं
अस्पताल में कई ऐसे वार्ड हैं, जहां प्लांट से सीधे वार्ड में ऑक्सीजन गैस आपूर्ति की जरूरत है, लेकिन यहां पर आपूर्ति करने के बजाए सिलिंडर से ही काम चलाया जा रहा है। इसमें अस्पताल की डायलिसिस यूनिट, आइसोलेशन, आपातकालीन वार्ड सहित अन्य वार्ड शामिल हैं। डायलिसिसि यूनिट में 15 बिस्तर लगाए गए हैं। 30 दिन सभी बिस्तर फुल रहती है। जबकि कई मरीजों को आईसीयू से डायलिसिस के लिए यूनिट वार्ड में लाया जाता है। इस दौरान ऑक्सीजन गैस सपोर्ट के लिए सिलिंडर का उपयोग किया जाता है। लेकिन इसे बाजारू सिलिंडर से दिया जा रहा है।
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सिलिंडर रीफिल की भी व्यवस्था नहीं
करोड़ों रुपये के पीएम केयर से ऑक्सीजन गैस प्लांट तैयार किए गए हैं, लेकिन न तो वार्डों तक भी पाइप लाइन नहीं बिछाई गई है और न ही खाली सिलिंडर को रीफिल करने के लिए आवश्यक उपकरण नहीं हैं।
-अब सभी वार्डों में ऑक्सीजन सप्लाई देने के लिए पाइप लाइन बिछ़ाने का कार्य शुरू हो गया है। यह पाइपलाइन प्लांट से वार्डों को जोड़ेगी। कार्य तेज प्रगति से चल रहा है। जल्द ही इसका लाभ मरीजों को मिलना शुरू हो जाएगा।
डाॅ. नवीन जैन, सीएमएस मेडिकल कॉलेज