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Firozabad News: धीरपुरा के दो जाबांज भाइयों ने अंग्रेजी सेना के छुड़ाए थे छक्के

Wed, 09 Aug 2023 11:47 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद Updated Wed, 09 Aug 2023 11:47 PM IST
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Two brave brothers of Dhirpura rescued sixes from the English army
फिरोजाबाद। स्वतंत्रता आंदोलन में यूं तो उस समय प्रत्येक व्यक्ति ने अपना योगदान दिया था, लेकिन कुछ लोगों ने आजादी की जंग में अंग्रेजों को लोहे के चने चबाने को मजबूर कर दिया था। इसमें नगला सिंघी क्षेत्र के धीरपुरा के दो जाबांज भाइयों ने अंग्रेजी सेना का छक्के छुड़ाने का काम किया था। उनके संघर्ष को भुलाया नहीं जा सकता है। नगला सिंघी क्षेत्र के गांव धीरपुरा के क्रांतिकारियों का नाम भले ही इतिहास के पन्नों में दर्ज न हुआ हो लेकिन पूरा गांव क्रांतिकारियों की गाथा सुनाते नहीं थकता है। धीरपुरा रियासत के क्रांतिकारी भाई महाराज सिंह यादव एवं सोबरन सिंह की वीरता की कहानी आज भी याद की जाती है। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन शुरू होने के बाद दोनों भाइयों ने आगरा किले पर झंडा फहराने की योजना गोपनीय ढंग से बनाई थी। इसके बाद दोनों भाई रात के अंधेरे का का लाभ आगरा यमुना किनारे तक पहुंचने के बाद अंग्रेजी सैनिकों से बचते हुए आगरा के किले में प्रवेश कर गए थे। ग्रामीणों ने बताया कि दोनों भाइयों ने दिन निकलते ही किले पर अंग्रेजी सरकार का झंडा उतारकर तिरंगा फहराने का काम किया था। तिरंगा लहराते ही अंग्रेजी सैनिक इनकी तरफ दौड़े तथा फायरिंग करनी शुरू कर दी थी।
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महाराज सिंह के पैर में गोली लगी, लेकिन इसके बाद भी वह कूदकर यमुना के सहारे बाहर निकल आए। वहां से इनके भाई सोबरन सिंह पीठ पर लादकर गांव पहुंचे। अंग्रेजी सेना इनकी तलाश में कई दिन तक जुटी रही। देश के आजाद होने के बाद गांव के क्रांतिकारियों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की पेंशन दी गई।
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नकटिया तोप से अंग्रेजी सेना पर दागे थे गोले
धीरपुरा गांव निवासी क्रांतिकारी धूरीलाल ने क्वीन विक्टोरिया की प्रतिमा पर जूतों की माला पहना दी थी। इसके बाद उन्होंने भागने की कोशिश की थी, लेकिन अंग्रेजी सेना ने उन्हें पकड़ लिया और उसके बाद उन्हें कई साल तक जेल काटनी पड़ी थी। धीरपुरा रियासत अंग्रेजी सरकार से पहले रियासत हुआ करती थी, जिसके राजा गोवर्धन सिंह थे। उनके रियासत के बेड़े में अष्टधातु की एक नकटिया तोप थी। महाराजा के वंशज धनंजय सिंह अब आगरा में रहते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के बाहर से गुजर रही अंंग्रेजी सेना की टुकड़ी ने गांव के बाहर खिन्नी के बाग में डेरा डाल लिया था। गांव में खबर फैली कि रात में क्रांतिकारियों की धरपकड़ होगी। इसकी जानकारी होने पर उनके दादा गोवर्धन सिंह ने नकटिया तोप से सेना पर गोले दागे, जिससे खलबली मच गई। तोप से हमले के बाद काफी संख्या में सेना के जवान पहुंच गए थे। क्रांतिकारी गांव छोड़कर भाग गए। तोप को गांव के कुंए में डालने का काम किया था, जिससे वह अंग्रेजी सेना के हाथ न लगने पाए। कहते हैं कि आज भी उक्त तोप इसी कुएं में पड़ी हुई है।
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