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Firozabad News: 13 साल पुराने केस में दो आरोपी बरी
Sun, 12 Oct 2025 07:19 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Sun, 12 Oct 2025 07:19 PM IST
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सांकेतिक
- मालखाना रजिस्टर गायब, नमूना मुहर पेश नहीं, कोर्ट ने संदेह का लाभ देकर किया दोषमुक्त
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। पुलिस के अधूरे होमवर्क के कारण एडीजे कोर्ट से एनडीपीएस एक्ट के 13 साल पुराने मुकदमे में दो आरोपी संदेह का लाभ पाकर बरी हो गए। कोर्ट ने अपने निर्णय में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।
मामला 22 जून 2012 का है। दक्षिण थाना में तैनात रहे एसआई राकेश कुमार ने सोमवीर निवासी राठौर नगर आसफाबाद, रसूलपुर और उमेश निवासी नई बस्ती खंजापुर, रसूलपुर को गंदे नाले के पास से तमंचे और चरस के साथ गिरफ्तार दिखाया। दोनों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। ट्रायल में कोर्ट ने पाया कि मादक पदार्थ की बरामदगी दिखाने के बावजूद पुलिस ने थाने का मालखाना रजिस्टर पेश नहीं किया। अभियुक्तों को पकड़ने गए पुलिस बल के सदस्यों की जनरल डायरी (जीडी) रवानगी भी कोर्ट में पेश नहीं की। पुलिस ने दावा किया था कि मौके पर ही चरस को सील करके नमूना मुहर तैयार किया गया, लेकिन यह नमूना मुहर भी पेश नहीं की गई। चरस कथित तौर पर अभियुक्तों के पेंट की जेब से बरामद हुई थी। कोर्ट ने पाया कि पुलिस ने अनिवार्य धारा 50 एनडीपीएस एक्ट के तहत अभियुक्तों को यह वैधानिक अधिकार नहीं बताया कि वे राजपत्रित अधिकारी या मजिस्ट्रेट के सामने तलाशी दे सकते हैं। घटना स्थल गंदे नाले की पुलिया के पास, मालवीय नगर, जो कि एक आवासीय क्षेत्र है, वहां से भी कोई स्वतंत्र साक्षी पेश नहीं किए गए।
न्यायालय ने इन गंभीर चूक को देखते हुए माना कि आरोपी सोमवीर और उमेश पर लगाए गए आरोपों को पुलिस साबित करने में विफल रही है। साक्ष्यों व गवाही के अभाव में कोर्ट ने दोनों को बरी कर दिया।
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फिरोजाबाद। पुलिस के अधूरे होमवर्क के कारण एडीजे कोर्ट से एनडीपीएस एक्ट के 13 साल पुराने मुकदमे में दो आरोपी संदेह का लाभ पाकर बरी हो गए। कोर्ट ने अपने निर्णय में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।
मामला 22 जून 2012 का है। दक्षिण थाना में तैनात रहे एसआई राकेश कुमार ने सोमवीर निवासी राठौर नगर आसफाबाद, रसूलपुर और उमेश निवासी नई बस्ती खंजापुर, रसूलपुर को गंदे नाले के पास से तमंचे और चरस के साथ गिरफ्तार दिखाया। दोनों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। ट्रायल में कोर्ट ने पाया कि मादक पदार्थ की बरामदगी दिखाने के बावजूद पुलिस ने थाने का मालखाना रजिस्टर पेश नहीं किया। अभियुक्तों को पकड़ने गए पुलिस बल के सदस्यों की जनरल डायरी (जीडी) रवानगी भी कोर्ट में पेश नहीं की। पुलिस ने दावा किया था कि मौके पर ही चरस को सील करके नमूना मुहर तैयार किया गया, लेकिन यह नमूना मुहर भी पेश नहीं की गई। चरस कथित तौर पर अभियुक्तों के पेंट की जेब से बरामद हुई थी। कोर्ट ने पाया कि पुलिस ने अनिवार्य धारा 50 एनडीपीएस एक्ट के तहत अभियुक्तों को यह वैधानिक अधिकार नहीं बताया कि वे राजपत्रित अधिकारी या मजिस्ट्रेट के सामने तलाशी दे सकते हैं। घटना स्थल गंदे नाले की पुलिया के पास, मालवीय नगर, जो कि एक आवासीय क्षेत्र है, वहां से भी कोई स्वतंत्र साक्षी पेश नहीं किए गए।
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न्यायालय ने इन गंभीर चूक को देखते हुए माना कि आरोपी सोमवीर और उमेश पर लगाए गए आरोपों को पुलिस साबित करने में विफल रही है। साक्ष्यों व गवाही के अभाव में कोर्ट ने दोनों को बरी कर दिया।
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