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मुसीबतों से लड़कर जलाया उम्मीद का चिराग
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Thu, 14 May 2015 11:17 PM IST
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जिंदगी की डगर पर मुश्किलों के कांटों को चुनकर दो बेटियों ने परिवार को उम्मीद की नई किरण दिखाई। हर बार नई चुनौती को एक परीक्षा के रूप में स्वीकारा। अंधेरा छा जाने को था लेकिन कामनी और काजल ने जिद ठानी थी उजाला करने की। उनकी मेहनत और लगन का ही परिणाम है कि परिवार में खुशियों के दीपक रोशनी कर रहे हैं।
कहते हैं मां-बाप का सहारा तो बेटा है। बेटियां तो पराया धन है। जो कुछ दिनों बाद अपने घर में जाकर उसको चमन बनाएंगी। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में यह पंक्तियां झूठी साबित हो रही हैं। बेटियां परिवार के लिए ढाल बन रही हैं। महावीर नगर निवासी कामनी शर्मा और काजल शर्मा छोटी सी उम्र में औरों के लिए भी प्रेरणादायी बन गई हैं। कामनी के पिता राकेश शर्मा का स्वास्थ्य खराब होने के कारण उन्हें ड्राइवर की नौकरी छोड़नी पड़ी। अब परिवार पर आर्थिक संकट गहराने लगा। घर चलाने और पिता की दवा के इंतजाम के लिए भी आर्थिक तंगी महसूस होने लगी। तब कामनी के भाई अनिकेत शर्मा ने 15 साल की उम्र से चूड़ी का काम संभालना शुरू किया। परिवार की आर्थिक स्थिति थोड़ी पटरी पर आ ही रही थी, अनिकेत सड़क हादसे का शिकार बन गया।
घर का चिराग बुझने से एक बार फिर संकट के बादल घुमड़ने लगे। ऐसी विषम परिस्थितियों में कामनी और काजल ने हौसला जोड़ा और परिवार की खातिर मेहनत करने की ठानी। कामनी अब राजकीय प्रशिक्षण केंद्र शिकोहाबाद में ब्यूटीशियन का प्रशिक्षण दे रही हैं। इससे मिलने वाले वेतन से घर का खर्चा चल रहा है। वहीं, छोटी बहन काजल, महावीर नगर स्थित गायत्री भवन में डांस का प्रशिक्षण दे रही हैं। उनके जुझारूपन का परिणाम है कि परिवार एक बार फिर हंसने खिल-खिलाने लगा है।
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हिम्मत का साथ कभी नहीं छोड़ा
बीए में पढ़ रही कामनी शर्मा का कहना है कि मुसीबतें कितनी भी आएं, हिम्मत कभी नहीं हारनी चाहिए। जीवन में सफलता उनको मिलती है, जो मेहनत करते हैं। मेहनत करने वालों की हार नहीं होती।
कामनी शर्मा का मानना है कि जब भी मौका मिले तो कुछ नया सीखना चाहिए। ताकि विषम परिस्थितियों में हुनर का प्रयोग कर सकें। उनका कहना है कि संघर्ष के बाद अच्छे दिन देखने को जरूर मिलते हैं।
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कहते हैं मां-बाप का सहारा तो बेटा है। बेटियां तो पराया धन है। जो कुछ दिनों बाद अपने घर में जाकर उसको चमन बनाएंगी। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में यह पंक्तियां झूठी साबित हो रही हैं। बेटियां परिवार के लिए ढाल बन रही हैं। महावीर नगर निवासी कामनी शर्मा और काजल शर्मा छोटी सी उम्र में औरों के लिए भी प्रेरणादायी बन गई हैं। कामनी के पिता राकेश शर्मा का स्वास्थ्य खराब होने के कारण उन्हें ड्राइवर की नौकरी छोड़नी पड़ी। अब परिवार पर आर्थिक संकट गहराने लगा। घर चलाने और पिता की दवा के इंतजाम के लिए भी आर्थिक तंगी महसूस होने लगी। तब कामनी के भाई अनिकेत शर्मा ने 15 साल की उम्र से चूड़ी का काम संभालना शुरू किया। परिवार की आर्थिक स्थिति थोड़ी पटरी पर आ ही रही थी, अनिकेत सड़क हादसे का शिकार बन गया।
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घर का चिराग बुझने से एक बार फिर संकट के बादल घुमड़ने लगे। ऐसी विषम परिस्थितियों में कामनी और काजल ने हौसला जोड़ा और परिवार की खातिर मेहनत करने की ठानी। कामनी अब राजकीय प्रशिक्षण केंद्र शिकोहाबाद में ब्यूटीशियन का प्रशिक्षण दे रही हैं। इससे मिलने वाले वेतन से घर का खर्चा चल रहा है। वहीं, छोटी बहन काजल, महावीर नगर स्थित गायत्री भवन में डांस का प्रशिक्षण दे रही हैं। उनके जुझारूपन का परिणाम है कि परिवार एक बार फिर हंसने खिल-खिलाने लगा है।
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हिम्मत का साथ कभी नहीं छोड़ा
बीए में पढ़ रही कामनी शर्मा का कहना है कि मुसीबतें कितनी भी आएं, हिम्मत कभी नहीं हारनी चाहिए। जीवन में सफलता उनको मिलती है, जो मेहनत करते हैं। मेहनत करने वालों की हार नहीं होती।
कामनी शर्मा का मानना है कि जब भी मौका मिले तो कुछ नया सीखना चाहिए। ताकि विषम परिस्थितियों में हुनर का प्रयोग कर सकें। उनका कहना है कि संघर्ष के बाद अच्छे दिन देखने को जरूर मिलते हैं।