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रेजगारी जमा करने में बैंकों की मनमानी से लोग परेशान
amar ujala
Updated Mon, 27 Feb 2017 11:58 PM IST
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सिक्के।
- फोटो : amar ujala
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बैंकों की ओर से रेजगारी(सिक्कों) को जमा करने से इंकार करने से व्यापारी परेशान हो गए हैं। उन्होंने ग्राहकों से सिक्के लेना बंद कर दिया। वहीं, कई प्राइवेट बैंकों ने सिक्के जमा करने पर शुल्क वसूलना भी शुरू कर दिया।
नोटबंदी के दौरान बैंकों के द्वारा बड़ी मात्रा में बाजार में ही पांच, दस, दो एवं एक के सिक्कों को दिया था। एक, एक और दो-दो हजार तक की रेजगारी (सिक्के) की थैली थमाई गई थीं। अब सामान्य हालात होने के बाद बाजार में आई रेजगारी व सिक्के फिर से मुसीबत बन गए। सरकारी हो या प्राइवेट बैंक व्यापारी तबके की ओर से पांच, दस हजार की रेजगारी ले जाने पर जमा करने से इंकार कर देते हैं। व्यापारियों का तर्क है आखिर इसको दो घंटे तक कौन गिनेगा। प्राइवेट बैंकों ने रेजगारी (सिक्कों) को लेना बंद कर दिया। वहीं, व्यापारियों ने भी ग्राहकों से सिक्के लेना बंद कर दिया। सबसे ज्यादा दिक्कत गरीब तबके के लोगों को हो रही है। नगला पचिया निवासी राकेश यादव का कहना है 1030 रुपया की रेजगारी जमा कराने पर प्राइवेट बैंक ने 145 रुपया हैंडलिंग चार्ज एकाउंट से काट लिया है।
व्यापारी बोले
व्यापारी आलोक मित्तल ने बताया कि बैंकों की रेजगारी(सिक्कों)को जमा नहीं करने के कारण दिक्कत बढ़ी है। बैंक द्वारा जमा नहीं करने से कारण सभी की दिक्कत बढ़ी है। जिला प्रशासन को हल निकालना चाहिए। वहीं, परचून विक्रेता मुरली उर्फ पिंटू ने कहा कि रेजगारी (सिक्के) दुकानदारों के नहीं लिए जाने के कारण सबसे ज्यादा गरीब तबके को परेशानी होती है। बैंकों की ये मनमानी रुकनी चाहिए।
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कोई बैंक रेजगारी(सिक्का) लेने से इंकार नहीं कर सकता। न ही कोई बैंक सिक्का जमा कराने के लिए कोई चार्ज लें। यदि किसी बैंक शाखा की शिकायत मिलती है तो उसकी जांच कराके कार्रवाई की जाएगी। बाजार में व्यापारी सिक्का लें।
सुरेंद्र कुमार
लीड बैंक प्रबंधक फिरोजाबाद।
नोटबंदी के दौरान बैंकों के द्वारा बड़ी मात्रा में बाजार में ही पांच, दस, दो एवं एक के सिक्कों को दिया था। एक, एक और दो-दो हजार तक की रेजगारी (सिक्के) की थैली थमाई गई थीं। अब सामान्य हालात होने के बाद बाजार में आई रेजगारी व सिक्के फिर से मुसीबत बन गए। सरकारी हो या प्राइवेट बैंक व्यापारी तबके की ओर से पांच, दस हजार की रेजगारी ले जाने पर जमा करने से इंकार कर देते हैं। व्यापारियों का तर्क है आखिर इसको दो घंटे तक कौन गिनेगा। प्राइवेट बैंकों ने रेजगारी (सिक्कों) को लेना बंद कर दिया। वहीं, व्यापारियों ने भी ग्राहकों से सिक्के लेना बंद कर दिया। सबसे ज्यादा दिक्कत गरीब तबके के लोगों को हो रही है। नगला पचिया निवासी राकेश यादव का कहना है 1030 रुपया की रेजगारी जमा कराने पर प्राइवेट बैंक ने 145 रुपया हैंडलिंग चार्ज एकाउंट से काट लिया है।
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व्यापारी बोले
व्यापारी आलोक मित्तल ने बताया कि बैंकों की रेजगारी(सिक्कों)को जमा नहीं करने के कारण दिक्कत बढ़ी है। बैंक द्वारा जमा नहीं करने से कारण सभी की दिक्कत बढ़ी है। जिला प्रशासन को हल निकालना चाहिए। वहीं, परचून विक्रेता मुरली उर्फ पिंटू ने कहा कि रेजगारी (सिक्के) दुकानदारों के नहीं लिए जाने के कारण सबसे ज्यादा गरीब तबके को परेशानी होती है। बैंकों की ये मनमानी रुकनी चाहिए।
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कोई बैंक रेजगारी(सिक्का) लेने से इंकार नहीं कर सकता। न ही कोई बैंक सिक्का जमा कराने के लिए कोई चार्ज लें। यदि किसी बैंक शाखा की शिकायत मिलती है तो उसकी जांच कराके कार्रवाई की जाएगी। बाजार में व्यापारी सिक्का लें।
सुरेंद्र कुमार
लीड बैंक प्रबंधक फिरोजाबाद।