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Firozabad News: आज के श्रवणकुमार..... दो भाइयों ने इस अंदाज में माता-पिता को कराया गंगा स्नान, देखने वाले हो गए गदगद
Sat, 19 Jul 2025 11:29 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Sat, 19 Jul 2025 11:29 PM IST
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टूंडला में एटारोड से माता पिता को लेकर गुजरते श्रवण कुमार दो भाई संवाद
टूंडला। श्रवण कुमार बने दो भाई शनिवार शाम टूंडला एटारोड पर दिखाई दिए। जो करीब 110 किमी दूर सोरों गंगाघाट से कांवड़ व कंधों खींचकर पालकी के रूप में लौट रहे थे।
आगरा के थाना एत्मादपुर अंतर्गत मोहल्ला सतौली बघेल निवासी सोमेशपाल और आकाशपाल माता-पिता को ही भगवान का दर्जा देते हुए सेवा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि सावन के महीने में वे भगवान शिव की आराधना तो करते हैं, उनसे पहले अपने माता-पिता को पूजा करते हैं। इस बार उन्होंने माता-पिता की गंगा जाने की इच्छा पर सोरों गंगाघाट न सिर्फ उन्हें ले जाने का मन बनाया, अपितु उन्हें गंगा स्नान के बाद अपने कंधों पर लाने का प्रण किया। वे माता कमलेशदेवी व पिता हाकिम सिंह को गंगाजी सोरों ले गए।
गुरुपूर्णिमा पर गंगा स्नान के बाद माता-पिता को कांवड़ के रूप में बैठाकर वहां से रवाना हुए। करीब 50 किमी कांवड़ यात्रा के रूप में एटा तक लेकर आए। यहां माता-पिता को कांवड़ के रूप में बैठे हुए पेरशानी होने पर उनकी इच्छा पर पहिये वाली पालकी पर खींचकर लेकर आ रहे हैं। उन्होंने बेटों को संदेश देते हुए कहा कि माता-पिता से बढ़कर कोई नहीं है। इसलिए बेटों का फर्ज है कि उनकी अपने प्राणों से भी बढ़कर सेवा करें। उन्हें किसी भी हालात में वृद्धाश्रम न छोड़े।
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आगरा के थाना एत्मादपुर अंतर्गत मोहल्ला सतौली बघेल निवासी सोमेशपाल और आकाशपाल माता-पिता को ही भगवान का दर्जा देते हुए सेवा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि सावन के महीने में वे भगवान शिव की आराधना तो करते हैं, उनसे पहले अपने माता-पिता को पूजा करते हैं। इस बार उन्होंने माता-पिता की गंगा जाने की इच्छा पर सोरों गंगाघाट न सिर्फ उन्हें ले जाने का मन बनाया, अपितु उन्हें गंगा स्नान के बाद अपने कंधों पर लाने का प्रण किया। वे माता कमलेशदेवी व पिता हाकिम सिंह को गंगाजी सोरों ले गए।
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गुरुपूर्णिमा पर गंगा स्नान के बाद माता-पिता को कांवड़ के रूप में बैठाकर वहां से रवाना हुए। करीब 50 किमी कांवड़ यात्रा के रूप में एटा तक लेकर आए। यहां माता-पिता को कांवड़ के रूप में बैठे हुए पेरशानी होने पर उनकी इच्छा पर पहिये वाली पालकी पर खींचकर लेकर आ रहे हैं। उन्होंने बेटों को संदेश देते हुए कहा कि माता-पिता से बढ़कर कोई नहीं है। इसलिए बेटों का फर्ज है कि उनकी अपने प्राणों से भी बढ़कर सेवा करें। उन्हें किसी भी हालात में वृद्धाश्रम न छोड़े।
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