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जितने भी गरीब वो सब खड़े हैं कतार में..
अमर उजाला ब्यूराे फीराेजाबाद
Updated Thu, 22 Dec 2016 12:26 AM IST
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दरगाह हजरत हमीदउद्दीन शाह सूफी रह. उल्ला अलैह का 797वां तीन दिवसीय उर्स में कुलशरीफ की रस्म के बाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूराे
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दरगाह हजरत हमीदउद्दीन शाह सूफी रह. उल्ला अलैह का 797वां तीन दिवसीय उर्स में कुलशरीफ की रस्म के बाद बुधवार को मुशायरा कराया।
यमुना किनारे स्थित दरगाह शरीफ पर आयोजित मुशायरे की सदारत मेला प्रशासक अब्दुल लतीफ ने की। कमेटी अध्यक्ष मोहम्मद शमीम अहमद खां ने मुशायरे की शमां रोशन की। मुख्य अतिथि तहसीलदार सदर लालता प्रसाद तिवारी थे। कलीम नूरी एवं हाफिज अरशद ने शाने रसूल की शान में रचनाएं पेश कीं। हाफिज उस्मान ने कहा कि याद रखते हो मेरी खताएं, मगर तुम बफाएं हमारी भूल जाते हो क्यूं। कलीम नूरी ने पढ़ा अमीर तो हवेलियों में थे मगन-मगन रहे, थे जितने भी गरीब वो सब खड़े हैं कतार में..। सालिम सुजा ने कहा कि कांच के बुत सभी परेशां है,मेरे हाथों में संग आ गया है। मुशायरा के संयोजक असलम अदीब ने कहा कि सोने की जब भी तैयारी होती है, ख्वाब हमारे होते हैं नीद हमारी होती है। बांदा से आए जीरो बांदवी,हास्य व्यंग के ही शायर मंजर नबाव,हादी जावेद,हाजी ऐजाज ने पढ़ते हुए कहा कि हंसी एक कहानी हो तुम, मेरे दिल की रानी हो तुम। मुशायरा देररात्रि तक चला। मेले की व्यवस्थाओं को मुसद्दक हुसैन, मुश्ताक अहमद अंबर, गुफरान अहमद, मंजर अहमद, मोहम्मद साबिर, मोहम्मद असलम, सुखदेव यादव, संजय,पवन, मोहम्मद साबिर एवं एसओ बसई मोहम्मदपुर मुहम्मद नईम संभाले हुए थे। संचालन इरफान साहिल ने किया। संयोजक असलम अदीव थे।
यमुना किनारे स्थित दरगाह शरीफ पर आयोजित मुशायरे की सदारत मेला प्रशासक अब्दुल लतीफ ने की। कमेटी अध्यक्ष मोहम्मद शमीम अहमद खां ने मुशायरे की शमां रोशन की। मुख्य अतिथि तहसीलदार सदर लालता प्रसाद तिवारी थे। कलीम नूरी एवं हाफिज अरशद ने शाने रसूल की शान में रचनाएं पेश कीं। हाफिज उस्मान ने कहा कि याद रखते हो मेरी खताएं, मगर तुम बफाएं हमारी भूल जाते हो क्यूं। कलीम नूरी ने पढ़ा अमीर तो हवेलियों में थे मगन-मगन रहे, थे जितने भी गरीब वो सब खड़े हैं कतार में..। सालिम सुजा ने कहा कि कांच के बुत सभी परेशां है,मेरे हाथों में संग आ गया है। मुशायरा के संयोजक असलम अदीब ने कहा कि सोने की जब भी तैयारी होती है, ख्वाब हमारे होते हैं नीद हमारी होती है। बांदा से आए जीरो बांदवी,हास्य व्यंग के ही शायर मंजर नबाव,हादी जावेद,हाजी ऐजाज ने पढ़ते हुए कहा कि हंसी एक कहानी हो तुम, मेरे दिल की रानी हो तुम। मुशायरा देररात्रि तक चला। मेले की व्यवस्थाओं को मुसद्दक हुसैन, मुश्ताक अहमद अंबर, गुफरान अहमद, मंजर अहमद, मोहम्मद साबिर, मोहम्मद असलम, सुखदेव यादव, संजय,पवन, मोहम्मद साबिर एवं एसओ बसई मोहम्मदपुर मुहम्मद नईम संभाले हुए थे। संचालन इरफान साहिल ने किया। संयोजक असलम अदीव थे।