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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Firozabad News ›   The soldiers fired into custody, looking to resume now

हिरासत में लिए सिपाही छोड़े, अब फिर से शुरू की तलाश

Thu, 22 Dec 2016 12:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूराे फीराेजाबाद
अमर उजाला ब्यूराे फीराेजाबाद Updated Thu, 22 Dec 2016 12:06 AM IST
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दिल्ली के बिल्डर प्रमोद गुप्ता के कैश पर डाका डालने के आरोपी सिपाही राघवेंद्र भारत मिश्रा के खिलाफ अगर दो दिन पहले तहरीर मिल गई होती तो आज शायद दोनों जेल में होते। पुलिस ने शिकायत आते ही दोनों को हिरासत में ले लिया था। इंतजार सिर्फ इस बात का था कि फीरोजाबाद के सिरसागंज थाना में एफआईआर कब दर्ज होती है, एफआईआर के साथ ही दोनों की गिरफ्तारी की लिखापढ़ी होनी थी। लेकिन देरी के चलते आगरा पुलिस ने दोनों को छोड़ दिया। दोनों का तब से कुछ पता नहीं है। 
पुलिस सूत्रों ने बताया कि  उन्होंने मोबाइल स्विच आफ कर लिए हैं। जल्द ही पुलिस की टीमें उनके घर और रिश्तेदारी में दबिश देने के लिए जा सकती हैं। राघवेंद्र सिंह मैनपुरी के करहल का रहने वाला है। भारत मिश्रा एटा के अलीगंज का। बिल्डर का ड्राइवर सचिन इन्हें पहले से जानता है। पूरी घटना को साजिश के तहत अंजाम दिया गया। पुलिस सूत्रों का कहना है कि  सचिन ने ही सिपाहियों को कैश की जानकारी दी थी। यह भी बताया था कि वह फीरोजाबाद के सिरसागंज किस समय पहुंचेंगे, सिपाहियों को देखते ही उसने गाड़ी रुकवा दी थी। ड्राइवर अशोक ने वारदात के दौरान थोड़ा विरोध भी किया लेकिन सचिन चुप रहा। इसी से उस पर शक हो गया था।
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इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
सिरसागंज। सिरसागंज थाना पुलिस ने दिल्ली के व्यापारी की तहरीर पर दोनों सिपाहियों व व्यापारी के चालक सहित छह लोगों के खिलाफ 394 तथा 120 बी के तहत मुकदमा दर्ज किया है। कोतवाल सिरसागंज ब्रजवीर सिंह ने बताया कि आगरा पुलिस ने दोनों सिपाहियों को पकड़ने के बाद छोड़ दिया था। इसके बाद तहरीर भेजी है। मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। सिपाहियों सहित सभी आरोपियों की गिरफ्तारी को प्रयास किए जाएंगे।
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डकैती में तीन और पुलिसकर्मी तो नहीं
एफआईआर से आगरा ट्रैफिक पुलिस में हड़कंप
आगरा। डकैती की एफआईआर में छह आरोपी बनाए गए हैं। सिपाही राघवेंद्र, भारत, बिल्डर का ड्राइवर सचिन और तीन अज्ञात। सवाल यह उठ रहा है कि तीन अज्ञात कौन हैं, सचिन बिल्डर की कार में था। डाका डालने वाले पांच लोग ईडी का अफसर बनकर पहुंचे थे। दो सिपाहियों के नाम सचिन ने बता दिए। अब सवाल यह है कि कहीं अज्ञात आरोपी भी पुलिसकर्मी तो नहीं हैं।
इसे लेकर आगरा ट्रैफिक पुलिस में हड़कंप मचा है। कई पुलिसकर्मियों ने मीडिया के दफ्तरों में फोन करके पूछा कि रिपोर्ट में कौन-कौन नामजद कराए गए हैं। फरार सिपाहियों के बारे में भी पड़ताल की। बता दें, यहां की ट्रैफिक पुलिस वसूली के लिए बदनाम रही है।
कई पुलिसकर्मी वसूली करते कैमरे में कैद हो चुके हैं। सस्पेंड भी बड़ी संख्या में किए गए हैं। एक बार तो चार सिपाहियों के बीच एक ने तमंचे से फायर कर दिया था। घटना पिछले साल कलेक्ट्रेट तिराहे पर हुई थी। इसमें एक सिपाही घायल हुआ था लेकिन राज खुलने के डर से किसी ने भी जुबां नहीं खोली थी।


सचिन ने पूछताछ में उगला राज
ड्राइवर सचिन पर बिल्डर को शक हो गया था। सवाल था कि बदमाशों को कैश की जानकारी कैसे मिली। अशोक के साथ लूट हुई थी, इसलिए उस पर शक नहीं हुआ। बिल्डर ने इन दोनों के अलावा किसी और को जानकारी नहीं दी थी। पुलिस सूत्रों ने बताया कि जब सचिन से सख्ती से पूछताछ हुई तो उसने ही सिपाहियों के नाम बताए।
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