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कांच की भट्ठी में राख हो रहे श्रमिकों के अधिकार 

Sat, 30 Apr 2016 11:27 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फीरोजाबाद
ब्यूरो, अमर उजाला फीरोजाबाद Updated Sat, 30 Apr 2016 11:27 PM IST
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The rights of workers in the glass furnace ash
श्रमिकों के अधिकारों का लगातार हनन हो रहा है
 सुहागनगरी में कांच उद्योग श्रमिकों के जीवन यापन का महज एक माध्यम है। जलते हुए कांच को मुंह से फूंककर कांच को आकार देने वाले कारीगरों का यहां शोषण बढ़ता जा रहा है। फैक्ट्रियों की आग में श्रम कानून राख हो रहे हैं। तमाम प्रयासों के बाद भी कारखानों में श्रमिकों का शोषण रुकने का नाम नहीं ले रहा है। श्रमिकों से 10 घंटे तक कार्य कराया जा रहा है। 
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श्रम कानून को धता बताकर सेवायोजक व ठेकेदार मनमानी कर रहे हैं। वहीं श्रमिक संगठन भी राजनैतिक रोटियां सेक रहे हैं। आंदोलन के नाम पर श्रमिकों को लामबंद करते हैं, बाद में फैैक्ट्री मालिक से समझौता कर उन्हें आश्वासन देकर काम पर लगा देते हैं। 
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यह हकीकत मजदूर दिवस पर फीरोजाबाद के कांच उद्योग के श्रमिकों की दशा, श्रमिकों का हाल और दर्द बयां करती है। कांच के काम में सिद्धहस्त श्रमिक किसी कारीगर से कम नहीं है। मुंह से फूंककर कांच को तरह-तरह के आकार देने वाले माउथ ब्लोइंग इंडस्ट्री में कारीगर कांच के विभिन्न उत्पाद तैयार करते हैं। पीढ़ी दर पीढ़ी के अनुभव से इतने परिपक्व कि वे पिघले कांच पर फूंक मारकर कांच को मनचाही आकृति में ढाल देते हैं। 
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 सुहागनगरी में संचालित लगभग 200 चूड़ी एवं ग्लास के कारखानों में ढाई से तीन लाख श्रमिक दिन-रात अपना पसीना बहा रहे हैं। श्रमिकों को शासन द्वारा निर्धारित 1900 रुपये प्रति सैकड़ा तोड़ा से मजदूरी नहीं दी जा रही है। श्रमिकों की कारखानों में 12 नंबर रजिस्टर पर हाजिरी हो रही है और न वेतन स्लिप मिल रही। यही नहीं श्रम कानून को धता बताकर कारखानों में श्रमिकों से 10 घंटे तक कार्य कराया जा रहा है। सेवायोजक व ठेकेदार मनमानी से बाज नहीं आ रहे हैं। 

आटोमैटिक मशीनों ने छीना मजदूरों का रोजगार 
फीरोजाबाद में ग्लासवेयर इंडस्ट्री चार हिस्सों में बंटी हुई है। बैंगल इंडस्ट्री, माउथ ब्लोइंग इंडस्ट्री, आईएस बॉटल मैन्युफैक्चरिंग और प्रेस ग्लास। इसमें बैंगल और माउथ ब्लोइंग इंडस्ट्री में ही मजदूरों की महती आवश्यकता है। जबकि प्रेस ग्लास में हाथ के साथ-साथ मशीन का काम भी है। वहीं आईएस बॉटल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट पूरी तरह से आटोमेटेड है। 


चेहरा चमकाने आते श्रमिक संगठन 
फीरोजाबाद। श्रमिकों के हित की बात करने वाले श्रमिक संगठन महज चेहरा चमकाने में विश्वास रखते हैं। मजदूर दिवस पर ऊंचे मचों से बड़े भाषण देकर मजदूरों के हमदर्द होने की बात करते हैं मगर यह महज एक दिन का ही रहता है शेष 364 दिन शहर के श्रमिक उन्हीं कांच की भट्ठियों में उबलते हैं। उनके अधिकारों की बात तो दूर उन्हें मेहनत का सही फल भी नहीं मिलता। 

श्रमिकों की ये हैं मांगें  
- श्रमिकों के नाम फार्म नं. 12 में अंकित किए जाए, प्रतिदिन हाजिरी रजिस्टर पर दर्ज की जाए।
- श्रमिकों को हाजिरी कार्ड व परिचय पत्र प्रदान किए जाएं
- महंगाई को देखते हुए सभी श्रेणी के श्रमिकों को सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम वेतन का भुगतान किया जाए
- श्रमिकाें को मासिक वेतन स्लिप दिलाई जाए, वेतन में प्रति दर्जन 18 प्रतिशत की वृद्धि की जाए
- श्रमिकाें को ईएसआईसी का सदस्यता कार्ड प्रदान किया जाए
- श्रमिकाें को कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की स्लिप कोड नंबर प्रदान किया जाए
- श्रमिकों को राष्ट्रीय त्योहार व राष्ट्रीय पर्वों पर सवेतन अवकाश दिया जाए।
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