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बदलते मौसम में बढ़ रही मरीजों की संख्या
अमर उजाला ब्यूरो फीरोजाबाद
Updated Wed, 20 Jul 2016 11:04 PM IST
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बदलते मौसम में बढ़ रही मरीजों की संख्या
- फोटो : अमर उजाला
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बरसात के मौसम में बीमारियाें ने दस्तक दे दी है। उमस से लोग परेशान हैं। बारिश के बाद हुई तेज धूप के कारण तमाम बीमारियां पैदा हो रही हैं। सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों रोगियों की लंबी-लंबी लाइनें लगी हैं।
बारिश के बाद एक दम तेज धूप निकलने से मौसम में उमस पैदा हो गई। तमाम तरह की बीमारियां जन्म लेने लगती हैं। बच्चे, बड़े, बुजुर्ग सभी बीमारियों के चपेट में आ रहे हैं। बच्चे हो या बड़े को मलेरिया, टाइफाइड, हैजा, डायरिया जैसी बीमारियां अपनी चपेट में ले रही हैं। आंखों में इंफेक्शन के मरीज भी बढ़ गए हैं। इन बीमारियों का असर सबसे ज्यादा छोटे बच्चों पर पड़ता है। सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में आठ सौ से एक हजार होती थी, वर्तमान में जिनकी संख्या पंद्रह सौ ऊपर पहुंच गई है। सिर्फ चर्म रोग के साढे़ तीन सौ मरीज आ रहे हैं, जिनमें प्रिकलीहीट के मरीज सर्वाधिक हैं। यदि मौसम परिवर्तन को देखकर सावधानियां बरती जाए, तो इन बीमारियों से बचा जा सकता है। बाल रोग विशेषज्ञ कक्ष के बाहर भी मरीजों की कतारें दिखी। करीब 250 मरीज देखे गए।
क्या कहते हैं चिकित्सक
सरकारी अस्पताल के चिकित्सक डॉ अजय अग्रवाल का कहना है बीमारियों का असर सबसे अधिक बच्चों पर पड़ता है। इस समय फास्ट फूड का सेवन शरीर के लिए नुकसानदायक है। ऐसे खान पान पर अंकुश लगायें। हरी सब्जियों का उपयोग करें। चिकित्सक की सलाह से छोटी-मोटी बीमारियों के लिए घर में दवाएं रखे।
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चर्मरोग विशेषज्ञ डा. आरए सुधाकर का कहना है कि उमस के कारण आने वाले पसीने से सबसे ज्यादा मरीज चर्म रोग के हो रहे हैं। फुंसी, फोड़े, इंफेक्शन, दाद के मरीज ज्यादा बढ़ गए हैं। स्वच्छ पानी का सेवन अधिक करें। त्वचा संबंधित बीमारी होने पर चिकित्सक से परामर्श लें।
क्या ना करें
प्रतिदिन कपडे़ साफ सुथरे पहनें।
बर्तनों, गड्ढे में बरसात का पानी न जमा होने दें।
कूलर का पानी भी नियमित बदलते रहें।
बाहरी खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें।
कटे फलों का सेवन न करें।
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बारिश के बाद एक दम तेज धूप निकलने से मौसम में उमस पैदा हो गई। तमाम तरह की बीमारियां जन्म लेने लगती हैं। बच्चे, बड़े, बुजुर्ग सभी बीमारियों के चपेट में आ रहे हैं। बच्चे हो या बड़े को मलेरिया, टाइफाइड, हैजा, डायरिया जैसी बीमारियां अपनी चपेट में ले रही हैं। आंखों में इंफेक्शन के मरीज भी बढ़ गए हैं। इन बीमारियों का असर सबसे ज्यादा छोटे बच्चों पर पड़ता है। सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में आठ सौ से एक हजार होती थी, वर्तमान में जिनकी संख्या पंद्रह सौ ऊपर पहुंच गई है। सिर्फ चर्म रोग के साढे़ तीन सौ मरीज आ रहे हैं, जिनमें प्रिकलीहीट के मरीज सर्वाधिक हैं। यदि मौसम परिवर्तन को देखकर सावधानियां बरती जाए, तो इन बीमारियों से बचा जा सकता है। बाल रोग विशेषज्ञ कक्ष के बाहर भी मरीजों की कतारें दिखी। करीब 250 मरीज देखे गए।
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क्या कहते हैं चिकित्सक
सरकारी अस्पताल के चिकित्सक डॉ अजय अग्रवाल का कहना है बीमारियों का असर सबसे अधिक बच्चों पर पड़ता है। इस समय फास्ट फूड का सेवन शरीर के लिए नुकसानदायक है। ऐसे खान पान पर अंकुश लगायें। हरी सब्जियों का उपयोग करें। चिकित्सक की सलाह से छोटी-मोटी बीमारियों के लिए घर में दवाएं रखे।
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चर्मरोग विशेषज्ञ डा. आरए सुधाकर का कहना है कि उमस के कारण आने वाले पसीने से सबसे ज्यादा मरीज चर्म रोग के हो रहे हैं। फुंसी, फोड़े, इंफेक्शन, दाद के मरीज ज्यादा बढ़ गए हैं। स्वच्छ पानी का सेवन अधिक करें। त्वचा संबंधित बीमारी होने पर चिकित्सक से परामर्श लें।
क्या ना करें
प्रतिदिन कपडे़ साफ सुथरे पहनें।
बर्तनों, गड्ढे में बरसात का पानी न जमा होने दें।
कूलर का पानी भी नियमित बदलते रहें।
बाहरी खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें।
कटे फलों का सेवन न करें।