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सुहागनगरी के रणबांकुरों ने अंग्रेजों के खिलाफ फूंका था बिगुल

Tue, 10 Aug 2021 11:24 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Tue, 10 Aug 2021 11:24 PM IST
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The courtesans of Suhagnagari had blown the bugle against the British.
फोटो-
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सुहागनगरी के रणबांकुरों ने अंग्रेजों के खिलाफ फूंका था बिगुल
अंग्रेजी हुकूमतों की कालीचरन गुप्ता ने यातनाएं सहीं पर नहीं छोड़ी आंदोलन की राह
जुर्माना अदा नहीं करने के कारण चार माह अतिरिक्त जेल में रहने को विवश हुए थे
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ सुहागनगरी के रणबांकुरों ने अलग-अलग तरीकों से बिगुल फूंका था। आजादी के विरोध को देखते हुए अंग्रेजों ने भारतीय जांबाजों को तमाम यातनाएं भी दीं, मगर देश को आजाद कराने का जुनून सवार होने के कारण अंग्रेजों की यातनाएं उनके उत्साह को डिगा नहीं सकीं।
सुहागनगरी में आजादी की मशाल जगाने वालों की बात करें तो उनमें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कालीचरन गुप्ता का नाम प्रमुखता से गिना जाता है। अंग्रेजों के चंगुल से देश को आजाद कराने के लिए आंदोलन ही नहीं किया बल्कि कई बार जेल भी गए हालांकि वह इस दुनिया में नहीं है लेकिन यदि इतिहास के पन्नों को पलटें तो बताते हैं कि कालीचरन गुप्ता 18 मार्च 1941 को व्यक्तिगत सत्याग्रह करते जेल गए। आठ अप्रैल 1941 को उन्हें आठ माह की कैद व 50 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। जुर्माना न देने के कारण उन्हें चार माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ी। इतना ही नहीं वह भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 17 सितंबर 1942 को गिरफ्तार हुए और 19 फरवरी 1944 तक जेल में नजरबंद रहे थे। 1944 के बाद पुन: पकड़े गए तो 1946 तक जेल में कैद रहे। कालीचरन गुप्ता के पुत्र अधिवक्ता सुरेश चंद्र गुप्ता ने बताया कि उनके पिता आगरा सेंट्रल जेल में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ रहे थे। इसके अलावा उन्होंने फतेहगढ़ जेल में कई साल आजादी के आंदोलन के दौरान बिताए थे।
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...पर खुद की धेवती को नहीं दिला सके न्याय
स्वतंत्रता आंदोलन में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने वाले कालीचरन गुप्ता ने भले ही अंग्रेजों के छक्के छुड़ाएं हों लेकिन देश के आजाद होने के बाद अपनी ही धेवती पिंकी गुप्ता (16)के हत्यारों को पता नहीं लग सका। उनके पुत्र सुरेश चंद्र गुप्ता ने बताया 25 दिसंबर 2011 को घर से सामान लेने गई पिंकी गायब हो गई थी। 26 दिसंबर 2011 को उसका शव इंटरसिटी गाड़ी के डिब्बे में बोरे में बंद मिला था। धेवती को न्याय दिलाने को कालीचरन गुप्ता ने स्थानीय अफसरों से लेकर डीजीपी, तत्कालीन मुख्यमंत्री, केंद्र सरकार तक को पत्र लिखा था लेकिन पुलिस उनकी धेवती के हत्यारों को आज तक पता नहीं कर सकी। धेवती को इंसाफ दिलाने की लड़ाई लड़ते-लड़ते वह 2017 में दुनिया से विदा हो गए।
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