{"_id":"3769cce11a1bf98113ca1a221f7e724a","slug":"the-committee-formed-to-investigate-ngt-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एनजीटी ने जांच के लिए बनाई कमेटी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एनजीटी ने जांच के लिए बनाई कमेटी
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Wed, 12 Aug 2015 10:55 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नई दिल्ली/फीरोजाबाद। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश के फीरोजाबाद जिले में ग्लास इंडस्ट्री और वायु गुणवत्ता की जांच के लिए कमेटी बनाई है। इस कमेटी में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी), केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और ताज ट्रेपिजियम जोन (टीटीजेड) के वरिष्ठ अधिकारी सदस्य होंगे। एनजीटी ने अपने आदेश में कहा है कि यदि वायु की गुणवत्ता जांच में किसी भी तरह का प्रदूषण पाया जाता है तो यूपीपीसीबी संबंधित ग्लास यूनिट के खिलाफ कड़ा कदम उठाएं।
बुधवार को जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोशल एक्शन फॉर फॉरेस्ट एंड एंवॉयरमेंट (सेफ) की याचिका पर मामले की सुनवाई की। पीठ ने कमेटी से संयुक्त जांच रिपोर्ट के आधार पर वायु प्रदूषण के कारण और सुधार के लिए सिफारिश भी देने को कहा है। सेफ ने अपनी याचिका में कहा था कि फीरोजाबाद में 60 ग्लास यूनिट यूपीपीसीबी की अनुमति के बगैर चल रही हैं। इस पर सुनवाई के दौरान यूपीपीसीबी की ओर से पेश काउंसिल ने कहा कि सभी 60 ग्लास यूनिट अनुमति के आधार पर चल रही हैं। ये सभी नेचुरल गैस का इस्तेमाल करती हैं। इनसे प्रदूषण नहीं होता। वहीं सेफ एनजीओ की ओर से एडवोकेट राहुल चौधरी ने कहा कि नेचुरल गैस से भी वायु प्रदूषण होता है इसके जरिये कई खतरनाक रसायनिक गैसें निकलती हैं।
कांच उद्योग को राहत
फीरोजाबाद। सेफ की याचिका के बाद एनजीटी की रडार पर आई फीरोजाबाद की 60 इकाइयों को फिलहाल राहत मिल गई है। सुनवाई के बाद इकाइयों को अनुमति के आधार चलना माना गया है, साथ ही प्रदूषण की जांच करने बात भी कही। इस फैसले से उद्यमियों ने राहत की सांस ली है। बताते चलें कि जिले में 400 पंजीकृत ग्लास उद्योग हैं जो विभिन्न तरह के ग्लास उत्पादों का निर्माण करते हैं। सोशल एक्शन फार फारेस्ट एंड एनवायरमेंट की याचिका में सुहागनगरी की 60 इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
विज्ञापन
प्रदूषण के वास्तविक कारणों का पता लगाने के निर्देश
एनजीटी ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि फीरोजाबाद में प्रदूषण बढ़ रहा है, पर्यावरण मंत्रालय यह बात कह चुका है। पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा जारी किए गए 11 जुलाई 2012 के पत्र का हवाला देते हुए आगरा कमिश्नर को प्रदूषण के कारक और एहतियाती कदम उठाए जाने की बात कही।
उद्यमियों ने मुख्यालय तक लगाई थी दौड़
एनजीटी ने जिन 60 इकाइयों की बात कही है, उसमें सात इकाइयां पूर्णतया बंद हो चुकी थीं। 28 इकाइयां प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुमति प्राप्त कर चुकी हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 17 इकाइयों को अनुमति न मिलने की बात कही थी। एनजीटी में सुनवाई को देखते हुए उद्यमी कई दिनों से लखनऊ में डेरा डाले हुए थे। इसमें 11 इकाइयों को सोमवार तथा शेष इकाइयों को मंगलवार को अनुमति प्राप्त हो गई। यह रिपोर्ट के आधार पर रिट खारिज हो गई।
विज्ञापन
बुधवार को जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोशल एक्शन फॉर फॉरेस्ट एंड एंवॉयरमेंट (सेफ) की याचिका पर मामले की सुनवाई की। पीठ ने कमेटी से संयुक्त जांच रिपोर्ट के आधार पर वायु प्रदूषण के कारण और सुधार के लिए सिफारिश भी देने को कहा है। सेफ ने अपनी याचिका में कहा था कि फीरोजाबाद में 60 ग्लास यूनिट यूपीपीसीबी की अनुमति के बगैर चल रही हैं। इस पर सुनवाई के दौरान यूपीपीसीबी की ओर से पेश काउंसिल ने कहा कि सभी 60 ग्लास यूनिट अनुमति के आधार पर चल रही हैं। ये सभी नेचुरल गैस का इस्तेमाल करती हैं। इनसे प्रदूषण नहीं होता। वहीं सेफ एनजीओ की ओर से एडवोकेट राहुल चौधरी ने कहा कि नेचुरल गैस से भी वायु प्रदूषण होता है इसके जरिये कई खतरनाक रसायनिक गैसें निकलती हैं।
विज्ञापन
कांच उद्योग को राहत
फीरोजाबाद। सेफ की याचिका के बाद एनजीटी की रडार पर आई फीरोजाबाद की 60 इकाइयों को फिलहाल राहत मिल गई है। सुनवाई के बाद इकाइयों को अनुमति के आधार चलना माना गया है, साथ ही प्रदूषण की जांच करने बात भी कही। इस फैसले से उद्यमियों ने राहत की सांस ली है। बताते चलें कि जिले में 400 पंजीकृत ग्लास उद्योग हैं जो विभिन्न तरह के ग्लास उत्पादों का निर्माण करते हैं। सोशल एक्शन फार फारेस्ट एंड एनवायरमेंट की याचिका में सुहागनगरी की 60 इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
विज्ञापन
प्रदूषण के वास्तविक कारणों का पता लगाने के निर्देश
एनजीटी ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि फीरोजाबाद में प्रदूषण बढ़ रहा है, पर्यावरण मंत्रालय यह बात कह चुका है। पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा जारी किए गए 11 जुलाई 2012 के पत्र का हवाला देते हुए आगरा कमिश्नर को प्रदूषण के कारक और एहतियाती कदम उठाए जाने की बात कही।
उद्यमियों ने मुख्यालय तक लगाई थी दौड़
एनजीटी ने जिन 60 इकाइयों की बात कही है, उसमें सात इकाइयां पूर्णतया बंद हो चुकी थीं। 28 इकाइयां प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुमति प्राप्त कर चुकी हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 17 इकाइयों को अनुमति न मिलने की बात कही थी। एनजीटी में सुनवाई को देखते हुए उद्यमी कई दिनों से लखनऊ में डेरा डाले हुए थे। इसमें 11 इकाइयों को सोमवार तथा शेष इकाइयों को मंगलवार को अनुमति प्राप्त हो गई। यह रिपोर्ट के आधार पर रिट खारिज हो गई।