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शिमला मिर्च की फसल में लगे रोग को देखने पहुंची टीम
Amar Ujala
Updated Sat, 01 Oct 2016 01:22 AM IST
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शिमला मिर्च की फसल में लगे रोग को देखने पहुंची टीम
- फोटो : Amar Ujala
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डीएचओ,कृषि रक्षाधिकारी ने किसानों के साथ देखी मिर्च की फसल
गढ़ी हंसराम,गढ़ी ऐबरन के किसानों को फसल बचाव के दिए सुझाव
नारखी क्षेत्र में शिमला मिर्च की फसल में लगे गलन रोग की रोकथाम के लिए डीएम राजेश प्रकाश के निर्देश पर डीएचओ एवं कृषि रक्षाधिकारी यतेंद्र सिंह पूरी टीम के साथ गांव में पहुंचे। उन्होंने गढ़ी हंसराम एवं गढ़ी ऐबरन में मिर्च की फसल को करीब से ही देखा। फसल में सुधार को किसानों को दवा का छिड़काव के सुझाव दिए।
नारखी क्षेत्र में उगाई जाने वाली शिमला मिर्च में गलन रोग लगने की खबर अमर उजाला ने ही प्रकाशित की थी। डीएम राजेश प्रकाश ने किसानों की वेदना को काफी गंभीरता से लिया। किसान की बर्बाद होती फसल को बचाने को डीडी कृषि प्रसार डीपी सिंह को निर्देश दिए कि गांव में टीम को भेजकर किसानों को सुझाव दिए जाएं। शुक्रवार को जिला उद्यान अधिकारी बलजीत सिंह एवं जिला कृषि रक्षाधिकारी यतेंद्र सिंह टीम के साथ नारखी क्षेत्र के गढ़ी हंसराम व गढ़ी ऐबरन में पहुंचे। उन्होंने शिमला मिर्च का उत्पादन करने वाले किसानों से भेंट की। इस दौरान खेत में जाकर फसल में लगे रोग की पड़ताल की। उन्होंने बताया कि मिर्च में गलन रोग लगने का बड़ा कारण फंगस होने के साथ वैक्टीरिया सक्रिय हो गए हैं। जिला उद्यान अधिकारी बलजीत सिंह ने कहा कि शिमला मिर्च में इस रोग के लगने का सबसे बड़ा कारण अभी तक मौसम में जितनी नरमी आनी चाहिए वह नहीं आई है। यही कारण है कि फसल में गलन का रोग लग रहा है। गढ़ी हंसराम के प्रधान राजेश प्रताप सिंह बूली,सतीश कुमार,गिरीश चंद्र के साथ ही काफी ग्रामीण मौजूद थे।
किसानों को यह दिए सुझाव
पौधे में गलन एवं सिकुड़ा के लिए
-एक किलोग्राम ट्राइकोडर्मा एवं पांच लीटर मट्ठा को रात्रि में घोल बनाकर रखें। सुबह छानकर सौ लीटर पानी में मिलाकर एक बीघा पक्के में छिड़काव कराएं।
-एक किलोग्राम थायोफिनेट मिथाइल तथा 90 प्रतिशत वाली स्टेप्टोसाइक्लीन 15 ग्राम 400 लीटर पानी में घोल बनाएं।
सफेद मक्खी एवं सिकुड़ा के लिए
-एक लीटर डायनेथोएट 400 लीटर पानी में मिलाकर एक हेक्टेयर में स्प्रे करें, या फिर मैंकोजेब व कार्बन्ज जिम एक किलोग्राम का प्रयोग कर सकते हैं।
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गढ़ी हंसराम,गढ़ी ऐबरन के किसानों को फसल बचाव के दिए सुझाव
नारखी क्षेत्र में शिमला मिर्च की फसल में लगे गलन रोग की रोकथाम के लिए डीएम राजेश प्रकाश के निर्देश पर डीएचओ एवं कृषि रक्षाधिकारी यतेंद्र सिंह पूरी टीम के साथ गांव में पहुंचे। उन्होंने गढ़ी हंसराम एवं गढ़ी ऐबरन में मिर्च की फसल को करीब से ही देखा। फसल में सुधार को किसानों को दवा का छिड़काव के सुझाव दिए।
नारखी क्षेत्र में उगाई जाने वाली शिमला मिर्च में गलन रोग लगने की खबर अमर उजाला ने ही प्रकाशित की थी। डीएम राजेश प्रकाश ने किसानों की वेदना को काफी गंभीरता से लिया। किसान की बर्बाद होती फसल को बचाने को डीडी कृषि प्रसार डीपी सिंह को निर्देश दिए कि गांव में टीम को भेजकर किसानों को सुझाव दिए जाएं। शुक्रवार को जिला उद्यान अधिकारी बलजीत सिंह एवं जिला कृषि रक्षाधिकारी यतेंद्र सिंह टीम के साथ नारखी क्षेत्र के गढ़ी हंसराम व गढ़ी ऐबरन में पहुंचे। उन्होंने शिमला मिर्च का उत्पादन करने वाले किसानों से भेंट की। इस दौरान खेत में जाकर फसल में लगे रोग की पड़ताल की। उन्होंने बताया कि मिर्च में गलन रोग लगने का बड़ा कारण फंगस होने के साथ वैक्टीरिया सक्रिय हो गए हैं। जिला उद्यान अधिकारी बलजीत सिंह ने कहा कि शिमला मिर्च में इस रोग के लगने का सबसे बड़ा कारण अभी तक मौसम में जितनी नरमी आनी चाहिए वह नहीं आई है। यही कारण है कि फसल में गलन का रोग लग रहा है। गढ़ी हंसराम के प्रधान राजेश प्रताप सिंह बूली,सतीश कुमार,गिरीश चंद्र के साथ ही काफी ग्रामीण मौजूद थे।
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किसानों को यह दिए सुझाव
पौधे में गलन एवं सिकुड़ा के लिए
-एक किलोग्राम ट्राइकोडर्मा एवं पांच लीटर मट्ठा को रात्रि में घोल बनाकर रखें। सुबह छानकर सौ लीटर पानी में मिलाकर एक बीघा पक्के में छिड़काव कराएं।
-एक किलोग्राम थायोफिनेट मिथाइल तथा 90 प्रतिशत वाली स्टेप्टोसाइक्लीन 15 ग्राम 400 लीटर पानी में घोल बनाएं।
सफेद मक्खी एवं सिकुड़ा के लिए
-एक लीटर डायनेथोएट 400 लीटर पानी में मिलाकर एक हेक्टेयर में स्प्रे करें, या फिर मैंकोजेब व कार्बन्ज जिम एक किलोग्राम का प्रयोग कर सकते हैं।