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पहले से तैयार थी किसानों के दिल की बात
Amar ujala
Updated Sun, 02 Oct 2016 01:03 AM IST
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पहले से तैयार थी किसानों के दिल की बात
- फोटो : Amar ujala
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पीके टीम ने की थी पूरी तैयारी, शक भी नहीं छोड़ी गुंजाइश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात का जवाब कांग्रेस किसानों के दिल की बात से देने की कोशिश कर रही थी। खाट सभा में किसानों के साथ जो संवाद हुआ उससे लगा कि पहले ही सारी स्क्रिप्ट तैयार कर ली गई थी। किसानों की बात में दम था और मुद्दे भी सही थे लेकिन अंदाज पार्टीगत था।
राहुल गांधी खाट से उठे तो संचालन कर रहे कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष राज बब्बर ने सबसे पहले संवाद के लिए मौढा गांव के किसान शैलेंद्र शर्मा का नाम पुकारा। उसके बाद जसराना खेरिया के किसान रवींद्र सिंह, नगला गुलाल के राजेश कुमार, हुसैनपुर गांव के जितेंद्र प्रताप सिंह और नगला गोला के हरिभान सिंह ने राहुल गांधी से सीधा संवाद किया। दरअसल यह पहले से तय था कि खाट सभा में राहुल गांधी से कौन-कौन किसान संवाद करेंगे। इसके लिए पीके टीम ने बारीकी के साथ तैयारी की थी। बताया तो यहां तक जा रहा है उन्हें टीम पीके टीम ने ट्रेनिंग दी थी। संवाद करने वाले किसानों के नामों की एक सूची राजबब्बर के हाथ में थी वहीं दूसरी सूची राहुल गांधी के पास थी।
यूं तो खाटों पर तमाम गांवों से आए किसान मौजूद थे लेकिन खामोश बैठे थे। राहुल एक टीचर की भांति हाथ में माइक लेकर मंच पर चारों ओर राउंड ले रहे थे लेकिन उन्होंने भीड़ में दिखाई दे रहे अन्य किसानों से सवाल करने का रिस्क नहीं लिया। उन्हीं के साथ संवाद किया जिनके नाम राजबब्बर ने पुकारे। शाम ढलने के साथ अंधेरा घिर रहा था, संवाद कर राहुल मंच से जाने लगे तो कुछ किसान भड़क भी गए और बोले, हमें भी कुछ कहना था, हमारी तो सुनी ही नहीं। तैश में आए एक किसान राजाबाबू (जाफरगढ़ी) को पीके की टीम और कांग्रेस नेताओं ने जैसे-तैसे संभाला।
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मौढ़ा के किसान शैलेंद्र शुक्ला ने उद्योगपतियों का कर्जा माफ करने की बात आंकड़ों के साथ कही तो राहुल ने उनके आंकड़े में सुधार करते हुए कहा कि दस हजार करोड़ नहीं बल्कि एक लाख दस हजार करोड़ का कर्ज 15 उद्योगपतियों माफ किया गया है, यह राहुल अपने हर भाषण में कह हर जगह कह रहे हैं। इससे लोगों को लगा कि संवाद का सच क्या है। एक बार तो मंच से राजबब्बर को भी बात को टर्न करने का इशारा करना पड़ा। रवींद्र सिंह खेरिया ने मात्र चार घंटे बिजली मिलने का मुद्दा उठाया तो नगला गुलाल के राजेश कुमार ने भूमि अधिग्रहण के मुआवजे में भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि यह सजा उन्हें इस लिए मिली क्योंकि लोकसभा चुनाव में राजबब्बर जीते थे और डिंपल यादव हार गई थी। राहुल गांधी ने बब्बर की ओर मुखातिब होते हुए कहा कि राजबब्बर जी इस मामले में आप क्या मदद कर सकते हैं। इस पर राजबब्बर ने कहा कि कांग्रेस इन किसानों की लड़ाई लड़ेगी और कांग्रेस जब कोई वादा करती तो वह वचन नहीं संकल्प बन जाता है। जितेंद्र प्रताप सिंह ने नारखी पचोखरा के खस्ताहाल मार्ग की बात कहते हुए कहा कि हाथरस ब्रांच नहर में तीस साल से पानी नहीं आया है।
शहीद बबलू के बहाने मोदी पर राहुल ने साधा निशाना
भारतीय सेना के सर्जिकल आपरेशन का तो राहुल गांधी ने कोई जिक्र नहीं किया लेकिन एक शहीद के परिवार की वेदना को उठा कर राहुल गांधी ने सर्जिकल आपरेशन से पूरी दुनिया में चमक रही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि की सर्जरी जरूर करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि खाट सभा में राहुल गांधी ने कहा कि आज सुबह उनसे शहीद बबलू के परिवार ने संपर्क किया। उन्होंने बताया कि केंद्र की सरकार की तरफ से शहीद के परिवार को जो लाभ देना चाहिए वह अभी तक नहीं मिला है। अब शहीद के परिवार को उनका हक मिल जाना चाहिए। जिस परिवार के बेटे ने देश के लिए प्राण दे दिए उस परिवार को सरकारी मदद से वंचित रखना अच्छी बात नहीं। देश में और भी शहीदों के ऐेसे परिवार होंगे जिन्हे मदद नहीं मिली। उनको भी मदद मिलनी चाहिए।
भीड़ न देख उखड़ा राहुल का मूड
टूंडला की खाट सभा में वह करीब पौने दो घंटे देर से पहुंचे थे। यहां से उन्हे गांधी पार्क की सभा में आने की जल्दी थी। टटू़ंडला से फीरोजाबाद तक रोड शो की तैयारी थी। मीरा चौराहे पर एक जगह कांग्रेस नेता सतीश अग्रवाल नेताजी ने राहुल गांधी का स्वागत किया तब यहां कुछ देर के लिए यहां काफिला रूक गया। शाम करीब सात बजे राहुल गांधी सभा स्थल गांधी पार्क पहुंचे तो यहां उनके कद के अनुसार भीड़ नहीं थी। जबकि गांधी पार्क का मैदान सभाओं की दृष्टि से काफी छोटा माना जाता है। महिलाओं के बैठने के लिए डाली गयी कुर्सियां खाली पडी थी। भीड़ न देख राहुल का मूड खराब हो गया। वह अधिक कुछ नहीं बोले। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर यहां से सांसद रहे हैं और कार्यकर्ताओं के लगातार संपर्क में रहे हैं इस लिए उन्हें उम्मीद थी कि गांधी पार्क की सभा में भीड़ होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कांग्रेस महानगर अध्यक्ष गुलाम जिलानी ने मायूसी के साथ कहा आज पर्व का दिन था, अग्रसेन शोभायात्रा भी निकल रही थी। हमने मेहनत को खूब की थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात का जवाब कांग्रेस किसानों के दिल की बात से देने की कोशिश कर रही थी। खाट सभा में किसानों के साथ जो संवाद हुआ उससे लगा कि पहले ही सारी स्क्रिप्ट तैयार कर ली गई थी। किसानों की बात में दम था और मुद्दे भी सही थे लेकिन अंदाज पार्टीगत था।
राहुल गांधी खाट से उठे तो संचालन कर रहे कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष राज बब्बर ने सबसे पहले संवाद के लिए मौढा गांव के किसान शैलेंद्र शर्मा का नाम पुकारा। उसके बाद जसराना खेरिया के किसान रवींद्र सिंह, नगला गुलाल के राजेश कुमार, हुसैनपुर गांव के जितेंद्र प्रताप सिंह और नगला गोला के हरिभान सिंह ने राहुल गांधी से सीधा संवाद किया। दरअसल यह पहले से तय था कि खाट सभा में राहुल गांधी से कौन-कौन किसान संवाद करेंगे। इसके लिए पीके टीम ने बारीकी के साथ तैयारी की थी। बताया तो यहां तक जा रहा है उन्हें टीम पीके टीम ने ट्रेनिंग दी थी। संवाद करने वाले किसानों के नामों की एक सूची राजबब्बर के हाथ में थी वहीं दूसरी सूची राहुल गांधी के पास थी।
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यूं तो खाटों पर तमाम गांवों से आए किसान मौजूद थे लेकिन खामोश बैठे थे। राहुल एक टीचर की भांति हाथ में माइक लेकर मंच पर चारों ओर राउंड ले रहे थे लेकिन उन्होंने भीड़ में दिखाई दे रहे अन्य किसानों से सवाल करने का रिस्क नहीं लिया। उन्हीं के साथ संवाद किया जिनके नाम राजबब्बर ने पुकारे। शाम ढलने के साथ अंधेरा घिर रहा था, संवाद कर राहुल मंच से जाने लगे तो कुछ किसान भड़क भी गए और बोले, हमें भी कुछ कहना था, हमारी तो सुनी ही नहीं। तैश में आए एक किसान राजाबाबू (जाफरगढ़ी) को पीके की टीम और कांग्रेस नेताओं ने जैसे-तैसे संभाला।
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मौढ़ा के किसान शैलेंद्र शुक्ला ने उद्योगपतियों का कर्जा माफ करने की बात आंकड़ों के साथ कही तो राहुल ने उनके आंकड़े में सुधार करते हुए कहा कि दस हजार करोड़ नहीं बल्कि एक लाख दस हजार करोड़ का कर्ज 15 उद्योगपतियों माफ किया गया है, यह राहुल अपने हर भाषण में कह हर जगह कह रहे हैं। इससे लोगों को लगा कि संवाद का सच क्या है। एक बार तो मंच से राजबब्बर को भी बात को टर्न करने का इशारा करना पड़ा। रवींद्र सिंह खेरिया ने मात्र चार घंटे बिजली मिलने का मुद्दा उठाया तो नगला गुलाल के राजेश कुमार ने भूमि अधिग्रहण के मुआवजे में भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि यह सजा उन्हें इस लिए मिली क्योंकि लोकसभा चुनाव में राजबब्बर जीते थे और डिंपल यादव हार गई थी। राहुल गांधी ने बब्बर की ओर मुखातिब होते हुए कहा कि राजबब्बर जी इस मामले में आप क्या मदद कर सकते हैं। इस पर राजबब्बर ने कहा कि कांग्रेस इन किसानों की लड़ाई लड़ेगी और कांग्रेस जब कोई वादा करती तो वह वचन नहीं संकल्प बन जाता है। जितेंद्र प्रताप सिंह ने नारखी पचोखरा के खस्ताहाल मार्ग की बात कहते हुए कहा कि हाथरस ब्रांच नहर में तीस साल से पानी नहीं आया है।
शहीद बबलू के बहाने मोदी पर राहुल ने साधा निशाना
भारतीय सेना के सर्जिकल आपरेशन का तो राहुल गांधी ने कोई जिक्र नहीं किया लेकिन एक शहीद के परिवार की वेदना को उठा कर राहुल गांधी ने सर्जिकल आपरेशन से पूरी दुनिया में चमक रही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि की सर्जरी जरूर करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि खाट सभा में राहुल गांधी ने कहा कि आज सुबह उनसे शहीद बबलू के परिवार ने संपर्क किया। उन्होंने बताया कि केंद्र की सरकार की तरफ से शहीद के परिवार को जो लाभ देना चाहिए वह अभी तक नहीं मिला है। अब शहीद के परिवार को उनका हक मिल जाना चाहिए। जिस परिवार के बेटे ने देश के लिए प्राण दे दिए उस परिवार को सरकारी मदद से वंचित रखना अच्छी बात नहीं। देश में और भी शहीदों के ऐेसे परिवार होंगे जिन्हे मदद नहीं मिली। उनको भी मदद मिलनी चाहिए।
भीड़ न देख उखड़ा राहुल का मूड
टूंडला की खाट सभा में वह करीब पौने दो घंटे देर से पहुंचे थे। यहां से उन्हे गांधी पार्क की सभा में आने की जल्दी थी। टटू़ंडला से फीरोजाबाद तक रोड शो की तैयारी थी। मीरा चौराहे पर एक जगह कांग्रेस नेता सतीश अग्रवाल नेताजी ने राहुल गांधी का स्वागत किया तब यहां कुछ देर के लिए यहां काफिला रूक गया। शाम करीब सात बजे राहुल गांधी सभा स्थल गांधी पार्क पहुंचे तो यहां उनके कद के अनुसार भीड़ नहीं थी। जबकि गांधी पार्क का मैदान सभाओं की दृष्टि से काफी छोटा माना जाता है। महिलाओं के बैठने के लिए डाली गयी कुर्सियां खाली पडी थी। भीड़ न देख राहुल का मूड खराब हो गया। वह अधिक कुछ नहीं बोले। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर यहां से सांसद रहे हैं और कार्यकर्ताओं के लगातार संपर्क में रहे हैं इस लिए उन्हें उम्मीद थी कि गांधी पार्क की सभा में भीड़ होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कांग्रेस महानगर अध्यक्ष गुलाम जिलानी ने मायूसी के साथ कहा आज पर्व का दिन था, अग्रसेन शोभायात्रा भी निकल रही थी। हमने मेहनत को खूब की थी।