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सोशल मीडिया पर न डाले कुर्बानी के फोटो: मौलाना
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सोशल मीडिया पर न डाले कुर्बानी के फोटो: मौलाना
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। दस जुलाई को बकरीद पर कुर्बानी को लेकर इस्लामिक सेंटर ने एडवाइजरी जारी की है। ताकि त्योहार को अमन -चैन के साथ मनाया जा सके और कुर्बानी का फर्ज भी अदा हो सके। बृहस्पतिवार को इस्लामिक सेंटर के सचिव मौलाना आलम मुस्तफा याकूबी ने बकरीद को लेकर कहा कि अहम इबादत कुर्बानी है। मुसलमानों के लिए कुरान हदीस के मुताबिक ही कुर्बानी करनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि कुर्बानी कोई रस्म नहीं है। कुर्बानी के दिनों मे अल्लाह को कुर्बानी से बढ़कर कोई और अमल पसंद नहीं, इसलिए बकरीद पर जहां तक मुमकिन हो कुर्बानी करने की कोशिश करनी चाहिए। कहा कि बकरीद पर कुर्बानी के जानवर की फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर न डालें। जिन लोगों पर कुर्बानी वाजिब हो। वो अपनी जगह पर कुर्बानी न कर सकें तो वो दूसरी जगह पर कुर्बानी कराएं। अगर यह मुमकिन नहीं तो कुर्बानी के दिन गुजरने के बाद कुर्बानी के बराबर रकम गरीबों में सदका कर दें। मुस्तफा याकूबी ने कहा कि मुस्लिम समाज कोई ऐसा काम न करें। जिससे पूरे मुस्लिम समाज को शर्मिंदगी उठानी पड़े। कुर्बानी सड़कों पर और खुले में न करें, प्रतिबंधित जानवर की कुर्बानी न करें। जिससे किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। दस जुलाई को बकरीद पर कुर्बानी को लेकर इस्लामिक सेंटर ने एडवाइजरी जारी की है। ताकि त्योहार को अमन -चैन के साथ मनाया जा सके और कुर्बानी का फर्ज भी अदा हो सके। बृहस्पतिवार को इस्लामिक सेंटर के सचिव मौलाना आलम मुस्तफा याकूबी ने बकरीद को लेकर कहा कि अहम इबादत कुर्बानी है। मुसलमानों के लिए कुरान हदीस के मुताबिक ही कुर्बानी करनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि कुर्बानी कोई रस्म नहीं है। कुर्बानी के दिनों मे अल्लाह को कुर्बानी से बढ़कर कोई और अमल पसंद नहीं, इसलिए बकरीद पर जहां तक मुमकिन हो कुर्बानी करने की कोशिश करनी चाहिए। कहा कि बकरीद पर कुर्बानी के जानवर की फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर न डालें। जिन लोगों पर कुर्बानी वाजिब हो। वो अपनी जगह पर कुर्बानी न कर सकें तो वो दूसरी जगह पर कुर्बानी कराएं। अगर यह मुमकिन नहीं तो कुर्बानी के दिन गुजरने के बाद कुर्बानी के बराबर रकम गरीबों में सदका कर दें। मुस्तफा याकूबी ने कहा कि मुस्लिम समाज कोई ऐसा काम न करें। जिससे पूरे मुस्लिम समाज को शर्मिंदगी उठानी पड़े। कुर्बानी सड़कों पर और खुले में न करें, प्रतिबंधित जानवर की कुर्बानी न करें। जिससे किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे।
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